Shani Gochar 2025: शनि देव को ज्योतिष में न्याय का ग्रह कहा गया है। इसलिए जब भी शनि का राशि परिवर्तन होता है तो उसका एक बड़ा और व्यापक प्रभाव देखने को प्राप्त होता है। शनि देव 29 मार्च 2025 को मीन राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में सभी 12 राशियों पर इसका प्रभाव होगा। आइये जानते है कि आपकी राशि पर इसका क्या प्रभाव होगा।
मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए शनि दसवें और 11वें भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके द्वादश भाव में होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति के विदेश, एकांत ,अध्यात्म और व्यय का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके द्वितीय, छठे, और भाग्य स्थान पर होगी। मेष राशि के जातकों के लिए शनि का यह गोचर कुछ प्रतिकूल परिणाम लेकर के आ सकता है। आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा। आमदनी से अधिक खर्च हो सकता है। पारिवारिक वाद विवाद की संभावना बन सकती है। पैतृक संपत्ति को लेकर कुछ दिक्कत आ सकती है। अपने खर्चों को लेकर सावधान रहे। भाग्य का साथ मिलेगा। धर्म कर्म में आपकी रूचि बढ़ेगी। अपने पूर्वजों के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं।
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वृषभ राशि
- फोटो : अमर उजाला
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि भाग्य स्थान और दशम भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके लाभ स्थान में यानी की 11वें भाव में होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति की इच्छा पूर्ति का विचार किया जाता है। उसके कर्मों के परिणाम का विचार किया जाता है। उसके मित्र, बंधु बांधव और मुनाफे का विचार भी किया जाता है। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके प्रथम भाव ,पंचम भाव, अष्टम भाव पर जाएगी। शनि का यह गोचर वृषभ राशि के जातकों के लिए किसी राजयोग से कम नहीं होगा। इस समय आपको अपने कर्म स्थल पर सफलताएं प्राप्त होगी। आपके रुके हुए काम पूरे होंगे। संतान के स्वास्थ्य में सुधार होगा। शेयर मार्केट, सट्टा , जुआ लॉटरी से फायदा होगा। कोई पुरानी बीमारी ठीक हो सकती है। पैतृक संपत्ति प्राप्त हो सकती है।
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मिथुन राशि
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मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि अष्टम और भाग्य स्थान के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके दशम भाव में होने जा रहा है। यह व्यक्ति के कर्म का भाव है और इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके द्वादश भाव ,चतुर्थ भाव और सप्तम भाव पर जा रही है। शनिदेव का यह गोचर मिथुन राशि के जातकों के लिए बहुत अच्छा रहने वाला है। आपके कार्यस्थल पर जो उचित परिणाम या अनुकूल परिणाम आपको प्राप्त नहीं हो रहे थे वह अब आपको होने लग जाएंगे। इसके अलावा आपको विदेश यात्राएं करने का मौका प्राप्त हो सकता है। आप कोई संपत्ति की खरीद कर सकते हैं। साझेदारी में कोई नया काम शुरू करना चाहते थे तो वह कर सकते हैं। हालांकि अपने पति के स्वास्थ्य का आपको ख्याल रखना होगा। शनि का यह गोचर कुल मिलाकर आपके लिए अच्छा रहेगा।
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कर्क राशि
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कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए शनि सप्तम और अष्टम भाव के स्वामी होकर अकारक होते हैं और अब शनि का गोचर आपके नवम भाव में होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति के धर्म का विचार किया जाता है। उसके पूर्वजों का विचार किया जाता है। धार्मिक यात्राओं का विचार किया जाता है। भाग्य का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि 11वें भाव को , आपके तीसरे भाव को और आपके छठे भाव पर होगी। कर्क राशि के जातकों के लिए शनि का गोचर मिला जुला रहने वाला है। अष्टम भाव के स्वामी का नवम भाव में जाने से आपको पैतृक संपत्ति को लेकर कुछ नुकसान हो सकता है। भाई बहनों के साथ विवाद होगा। हालांकि आपकी इच्छाएं पूरी होगी। आपको यात्राएं करने का मौका प्राप्त होगा। आपका कम्युनिकेशन अच्छा होगा। आपको नई नौकरी प्राप्त हो सकती है। आपकी कोई पुरानी बीमारी ठीक हो सकती है। आपके शत्रुओं से आपको मुक्ति मिलेगी।
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सिंह राशि
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सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों के लिए शनि छठे और सातवें भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके अष्टम भाव से होने जा रहा है। इस भाव से शारीरिक कष्ट का भी विचार होता है। इसके अलावा यह भाव आध्यात्मिक उन्नति का भी भाव है। शनि देव जब यहां गोचर करेंगे तो आपको अब अगले ढाई साल शनिदेव की ढैया से गुजरना पड़ेगा। अष्टम भाव में शनि का गोचर अच्छा नहीं कहा जाता। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके दशम भाव , आपके द्वितीय भाव, और आपके पंचम भाव पर होगी। शनि देव का यह गोचर आपको पारिवारिक मामलों में कुछ असफलता प्रदान कर सकता है। इस समय आपके क्रोध की वृद्धि हो सकती है। आपके ऊपर कर्ज बढ़ सकता है। कोई बीमारी आपको परेशान कर सकती है। इसके अलावा आपको आर्थिक लेन-देन में भी सावधानी रखनी होगी। कार्यस्थल पर बहुत सावधानी से कार्य करना होगा। आपके खिलाफ शत्रुओं की साजिश बढ़ सकती है।
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कन्या राशि
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कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों के लिए शनि पंचम और छठे भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके सप्तम भाव से होने जा रहा है। इस भाव से आपकी पत्नी, आपकी साझेदारी का विचार किया जाता है। यह भाव हर उसे चीज को दर्शाता है जो घर से बाहर आपको मिलती है। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके भाग्य स्थान पर होगी , प्रथम भाव पर होगी और चतुर्थ भाव पर होगी। कन्या राशि के जातकों के लिए सप्तम भाव में शनि का गोचर उनके विवाह के रास्ते खोल सकता है। जिनका विवाह नहीं हो रहा है उनका विवाह हो सकता है। इसके अलावा आप कोई नया काम भी शुरू कर सकते हैं। काफी समय से आपका कोई काम अटका हुआ था वह पूरा हो सकता है। हालांकि आपको अपने आलस का त्याग करना होगा। शनि देव की दृष्टि आपके प्रथम भाव पर जा रही है इसलिए आपके कुछ कार्यों में देरी भी हो सकती है। मानसिक चिंताएं हो सकती है। मां के स्वास्थ्य को लेकर कुछ कठिनाई आ सकती है। हालांकि आपके पिता और गुरुओं का आशीर्वाद आपको प्राप्त होगा। कुछ धार्मिक यात्राएं होंगी और यात्राओं में आपकी कुछ ऐसे लोगों से मुलाकात हो सकती है जो आपके जीवन को एक नई दिशा देने का प्रयास करेंगे।
तुला राशि
तुला राशि के जातकों के लिए शनि देव चतुर्थ और पंचम भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके छठे भाव से होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति के शत्रु, रोग और ऋण का विचार किया जाता है। शनि देव की दृष्टि आपके अष्टम भाव, द्वादश भाव और तीसरे भाव पर होगी। तुला राशि के जातकों के लिए शनि देव का यह गोचर कुछ मानसिक कष्ट का कारण बन सकता है। संतान और मां को लेकर आपके मन में परेशानी होगी। हालांकि आपको नई नौकरी प्राप्त हो सकती है। विदेशी मामलों से सफलता प्राप्त होगी। विदेश में व्यापार करते हैं तो अच्छा रहेगा। यात्राओं से फायदा होगा। कम्युनिकेशन अच्छा होगा। तकनीक के फील्ड में काम कर रहें जातकों को फायदा होगा।
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वृश्चिक राशि
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वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि तीसरे और चौथे भाव के स्वामी होते हैं और शनि का गोचर आपके पंचम भाव से होगा। इस भाव से व्यक्ति की संतान , बुद्धि और शिक्षा का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके सप्तम भाव ,11वें भाव और दूसरे भाव पर होगी। इस भाव में विराजमान शनि के कारण आपको शिक्षा और बुद्धि के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। आपके कुछ पुराने अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं। किसी बड़ी यूनिवर्सिटी में आपका एडमिशन हो सकता है। संपत्ति से फायदा होगा। आपका विवाह हो सकता है। आपके घर में संतान पैदा हो सकती है। इसके अलावा आप धार्मिक स्थलों की भी अच्छी यात्राएं करेंगे, मित्रों से मदद प्राप्त होगी।
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धनु राशि
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धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए शनि दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके चतुर्थ भाव से होगा। इस भाव से व्यक्ति के मानसिक सुख और मां का विचार किया जाता है। इस भाव में शनि का गोचर जब होगा तो आप शनि के ढैया के प्रभाव में आएंगे। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके छठे भाव, दशम भाव और आपके लग्न पर होगी। धनु राशि के जातकों को शनिदेव के इस गोचर से संपत्ति का फायदा हो सकता है। आप कहीं विदेश में जाकर संपत्ति की खरीद कर सकते हैं। इसके अलावा आपकी कोई पुरानी बीमारी नष्ट हो सकती है। आपके कार्य स्थल पर आपको कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। आपके सीनियर्स को आपको खुश करके चलना होगा। आलस का त्याग करना होगा। आपके कार्यों में कुछ देरी हो सकती है जिसके कारण आपको मानसिक कष्ट की अनुभूति प्राप्त हो सकती है।
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मकर राशि
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मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए शनि प्रथम और द्वितीय भाव के स्वामी होते हैं और शनि का गोचर आपके तृतीय भाव में होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति के कम्युनिकेशन और यात्राओं का विचार किया जाता है। लेखन का विचार भी इसी भाव से किया जाता है। इस भाव में विराजमान शनिदेव की दृष्टि आपके पंचम नवम और द्वादश भाव पर होगी। मकर राशि के जातकों के लिए शनि का यह राशि परिवर्तन बहुत अच्छा रहेगा। आप साढ़े साती से मुक्त होने जा रहे हैं। इसलिए शनिदेव आपको बहुत अच्छा परिणाम देंगे। आपके घर में मांगलिक आयोजन होने लग जाएंगे। आपके भाग्य का साथ मिलेगा। आपको अपने लेखन से फायदा होगा। अगर आप पत्रकार हैं तो आपको अच्छी सफलता प्राप्त होगी। इसके अलावा आप अगर विदेश में अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो उसमें भी आपको सफलता प्राप्त हो सकती है। घर में नए सदस्य का आगमन भी हो सकता है।
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कुंभ राशि
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कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों के लिए शनि प्रथम भाव और द्वादश भाव के स्वामी होते हैं और शनि का गोचर अब आपके द्वितीय भाव से होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति की वाणी और कुटुंब का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके चतुर्थ ,अष्टम और 11वें भाव पर होगी। कुंभ राशि के जातकों के लिए शनि की साढ़े साती का अंतिम चरण शुरू होने जा रहा है। आपको अपनी वाणी को अच्छा रखना होगा। पैसे की सारसंभाल करनी होगी। अत्यधिक खर्च से आपको बचना होगा। कहीं ऐसा ना हो कि आपकी आमदनी से अधिक आपका खर्चा हो जाए। आप नई संपत्ति की खरीद कर सकते हैं। आध्यात्म में आपका मन लगेगा। आपको मित्रों से और परिवार के सदस्यों से फायदा हो सकता है। इसके अलावा आप जो भी व्यवसाय कर रहे हैं उसमें भी वृद्धि हो सकती है।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए शनि देव 11 वें और व्यय यानी कि द्वादश भाव के स्वामी होते हैं। अब शनि का गोचर आपके लग्न में ही होने जा रहा है। इस भाव से व्यक्ति के व्यक्तित्व और प्रसिद्धि का विचार किया जाता है। शनि देव जब आपके लग्न में गोचर करेंगे तो आपकी साढ़े साती का मध्य चरण शुरू होगा। इस भाव में विराजमान शनि की दृष्टि आपके तृतीय भाव ,सप्तम भाव और दशम भाव पर होगी। शनि देव का लग्न में गोचर आपके जीवन में कुछ चुनौतियां लेकर के आ सकता है। आपको इस समय अपनी यात्राओं में बेहद सावधान रहना होगा। यात्राओं से कुछ खास फायदा नहीं होगा। वैवाहिक जीवन में शनि तनाव उत्पन्न कर सकता है। कार्य स्थल पर आपको बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। अपने सहकर्मियों के साथ आपके व्यवहार अच्छा रखना होगा। अगर साझेदारी में कोई काम शुरू करना चाहते हैं तो सोच समझकर ही जीवन में आगे बढ़ना होगा। शनि के लग्न में गोचर करने से आपके कार्यों में कुछ देरी हो सकती है जिसके कारण आपके भीतर एक अलग ही प्रकार की झुंझलाहट हो सकती है।