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Soumya Murder Case: टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड में 18 अक्तूबर को आएगा फैसला, जानिए पूरा मामला

Sat, 14 Oct 2023 03:44 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sat, 14 Oct 2023 03:44 AM IST
सार

सौम्या विश्वनाथन की 30 सितंबर, 2008 को सुबह लगभग 3:30 बजे अपनी कार में काम से घर लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि उसकी हत्या के पीछे डकैती का मकसद था। 

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Soumya Murder Case  TV journalist Soumya Vishwanathan  Verdict october 18
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या मामले में शुक्रवार को अदालत ने अपना फैसला 18 अक्तूबर के लिए सुरक्षित रख लिया। मामला 2008 का है, जिसे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पांडे ने निर्देश दिया कि फैसला सुनाते समय सभी आरोपियों को अदालत में उपस्थित रहना होगा। 

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एएसजे पांडे ने कहा कि 18 अक्तूबर को फैसले के लिए पेश किया जाए। कार्यवाही के दौरान, न्यायाधीश ने कहा कि एक आरोपी अजय सेठी अतिरिक्त दलीलों के संबंध में एक लिखित प्रस्तुति देना चाहता था।     
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न्यायाधीश ने कहा, "पक्ष 14 अक्तूबर तक लिखित दलीलें, यदि कोई हों, दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं।" अदालत ने 6 अक्तूबर को कहा था कि बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी हो चुकी हैं, और मामले को अतिरिक्त दलीलों या स्पष्टीकरण के लिए टाल दिया गया। 
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हत्या के पीछे डकैती का मकसद
सौम्या विश्वनाथन की 30 सितंबर, 2008 को सुबह लगभग 3:30 बजे अपनी कार में काम से घर लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि उसकी हत्या के पीछे डकैती का मकसद था। 

पांच लोगों- रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी को उसकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और मार्च 2009 से हिरासत में हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कठोर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाया था। 

मलिक और दो अन्य यानी कि रवि कपूर और अमित शुक्ला को पहले 2009 में आईटी कार्यकारी जिगिशा घोष की हत्या में दोषी ठहराया गया था। पुलिस ने कहा कि जिगिशा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी से विश्वनाथन की हत्या के मामले का खुलासा हुआ। 

2017 में मिली थी ये सजा
ट्रायल कोर्ट ने 2017 में जिगिशा घोष हत्या मामले में कपूर और शुक्ला को मौत की सजा और मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हालांकि, अगले साल, उच्च न्यायालय ने कपूर और शुक्ला की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था और आजीवन कारावास को बरकरार रखा था। जिगिशा हत्याकांड में मलिक को सजा 


इंडिया टुडे में काम करने वाली 25 वर्षीय सौम्या विश्वनाथन 15 साल पहले 30 सितंबर 2008 को दक्षिणी दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर अपनी कार में मृत पाई गई थीं।

मामले में सफलता 2009 में बीपीओ कर्मचारी घोष की हत्या की जांच के दौरान मिली थी। जब एक आरोपी ने सौम्या की हत्या में भी शामिल होने की बात कबूल कर ली।

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