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कांग्रेस घास खेत-खलिहान में सर्वाधिक हानिकारक

Badaun Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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फसल और मानव शरीर पर घास के बताए साइड इफेक्ट
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अन्न के साथ शरीर में पहुंचे तो बीमारियों की आशंका
फसल उत्पादन को करीब 35 फीसदी कर देती है प्रभावित
उझानी(बदायूं)। गाजर घास जिसे देहात में कांग्रेस घास और कृषि वैज्ञानिक पार्थेनियम हिसटेरोफोरस के नाम से पुकारते हैं, यह फसल और मानव शरीर दोनों को नुकसानदायक है। इसके रोकथाम को चलाए गए सप्ताह में वैज्ञानिकों ने विस्तृत जानकारी दी। कहा, कांग्रेस घास एक बार उग जाए तो उसे सहज नष्ट करना मुश्किल हो जाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में गोष्ठी के अंतिम दिन सबसे पहले कांग्रेस घास के बारे में समझाया गया। इस घास का पौधा एक से डेढ़ मीटर तक लंबाई पकड़ लेता है। खेतों के अलावा यह रेलवे लाइन के आसपास, बंजर पड़ भूमि ओर पार्कों आदि में उगता है। एक पौधा एक बार में करीब 25 हजार बीज देता है जो हर स्तर पर नुकसानदायक है। वैज्ञानिक डा. रक्षपाल सिंह ने कहा कि कांग्रेस घास का बीज अन्न के साथ शरीर में पहुंच जाए तो एलर्जी, अस्थमा, बुखार और एक्जिमा जैसी बीमारियां घर करने लगती हैं। दुधारू पशु भी इसके प्रकोप का शिकार बन जाते हैं।
उद्यान विशेषज्ञ वैज्ञानिक यशपाल सिंह ने कहा कि कांग्रेस घास के खरपतवार से खाद्यान और सब्जी फसलों के उत्पादन में करीब 35 प्रतिशत तक गिरावट का आंकलन है। शस्य वैज्ञानिक अर्जुन सिंह के मुताबिक- गाजर घास के प्रभावी नियंत्रण के लिए किसानों को वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप कार्य करना चाहिए। गोष्ठी में मौजूद युवकों ने इसे लेकर वैज्ञानिकों से संवाद भी किया। साथ रोकथाम की दिशा में सुझाव भी रखे। इसके अलावा वैज्ञानिक अनिल कटियार, रीना सेठी, श्रीपाल सिंह आदि भी अपना पक्ष रखा।

इंसेट
घास नियंत्रण को यह करें
0 खरपतवार नजर आने पर घास पर फूल आने से पहले उसे जड़ से उखाड़ फेंके अथवा कंपोस्ट एवं वर्मी कंपोस्ट बनाने में प्रयोग करें।
0 कांग्रेस घास की पत्ती खाने वाली मैक्सिकन बीटल नाम के शत्रु कीट को पौधे पर छोड़ दें।
0 खाली खेतों और कृषि विहीन भूमि पर घास के समूल नष्ट को ग्लाइफोसेट नामक खरपतवार नाशी रसायन की 10 से 15 मिली लीटर मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
0 घासकुल की फसलों में गाजर घास के नियंत्रण को मेट्रिब्यूजिन नामक खरपतवार नाशक की तीन से पांच ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से मिलाकर फसल बुआई के 25 से 35 दिन पर छिड़काव करें।

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