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यमन की राजधानी के पास हवाई हमला: गांव पर बरसीं मिसाइलों से तबाही, 27 लोगों की मौत; क्यों बिगड़े हालात?
Sat, 07 Nov 2026 07:24 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, काहिरा।
पीटीआई, काहिरा।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 07 Nov 2026 07:24 PM IST
सार
यमन की राजधानी सना के पास स्थित एक गांव में शनिवार को हुए हवाई हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हो गए। हूती स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस हमले का आरोप सऊदी अरब पर लगाया है, जो यमन में महीनों पुराने युद्धविराम के टूटने के बाद बढ़ते तनाव को दर्शाता है। इससे एक दिन पहले भी एक बाजार में हुए हमले में 30 लोगों की जान चली गई थी, जिससे इलाके में मानवीय संकट और गहरा गया है।
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यमन में मिसाइल हमला
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
यमन की राजधानी सना के करीब स्थित अल-शरईया गांव में शनिवार को हुए एक भीषण हवाई हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया है। हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबही ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि इस हमले में कम से कम 27 लोगों की जान चली गई है, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हताहत होने वालों में सबसे अधिक संख्या महिलाओं और छोटे बच्चों की है। हूती प्रशासन ने सीधे तौर पर सऊदी अरब पर इन रिहायशी मकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है, हालांकि सऊदी अधिकारियों की तरफ से इस पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
युद्ध विराम टूटने से अचानक क्यों बिगड़े यमन के हालात?
यह दर्दनाक हमला यमन में जारी गृहयुद्ध के तेजी से और खौफनाक रूप से बिगड़ने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। गर्मियों के दौरान वर्षों से चला आ रहा युद्धविराम पूरी तरह टूट चुका है, जिसके बाद से हिंसा का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। इस समय यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों, जिनका कब्जा सना, उत्तरी और पश्चिमी यमन पर है और दक्षिण व पूर्व में स्थित सऊदी समर्थित सुरक्षा बलों के बीच भीषण संघर्ष छिड़ा हुआ है। इससे महज एक दिन पहले यानी शुक्रवार को भी दक्षिणी यमन के एक व्यस्त बाजार पर हुए हवाई हमले में कम से कम 30 लोगों की जान चली गई थी, जिसका आरोप दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगा रहे हैं।
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बचाव दल पर भी दागी गईं मिसाइलें, अस्पतालों में मचा कोहराम
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि शुरुआती हवाई हमलों में अल-शरईया गांव के कई मकान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए। बेहद चिंताजनक बात यह रही कि इसके बाद हुए दूसरे दौर के हमलों में राहत और बचाव कार्य में जुटे इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स (बचाव दल) को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया गया।
हूती संचालित अल-मसीरा टीवी पर जारी फुटेज में एम्बुलेंस से लहूलुहान और मासूम बच्चों के शवों को अस्पताल लाते हुए देखा गया, जबकि गांव में हर तरफ बिखरा मलबा और उड़ती धूल के बीच बदहवास लोग खेतों की तरफ जान बचाकर भागते नजर आए।
यह भी पढ़ें: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ खोला नया मोर्चा: 20 अधिकारियों की टीम करेगी निगरानी; क्या है आयरन गेट प्लान?
रेड सी और रणनीतिक द्वीपों पर हूती विद्रोहियों का कब्जा
यमन में हालिया महीनों के दौरान सैन्य संघर्ष काफी तेजी से बढ़ा है। बीते सितंबर महीने में हूती विद्रोहियों ने तेज सैन्य अभियान चलाते हुए लाल सागर के तटीय इलाकों और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के कई रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। इसके साथ ही विद्रोहियों ने दक्षिणी यमन के मुख्य द्वार माने जाने वाले रणनीतिक शहर तइज की भी घेराबंदी कर रखी है। इस जमीनी संघर्ष के बीच हूती गुटों की तरफ से सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाकर हमले भी तेज कर दिए गए हैं।
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हताहत होने वालों में सबसे अधिक संख्या महिलाओं और छोटे बच्चों की है। हूती प्रशासन ने सीधे तौर पर सऊदी अरब पर इन रिहायशी मकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है, हालांकि सऊदी अधिकारियों की तरफ से इस पर तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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युद्ध विराम टूटने से अचानक क्यों बिगड़े यमन के हालात?
यह दर्दनाक हमला यमन में जारी गृहयुद्ध के तेजी से और खौफनाक रूप से बिगड़ने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। गर्मियों के दौरान वर्षों से चला आ रहा युद्धविराम पूरी तरह टूट चुका है, जिसके बाद से हिंसा का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। इस समय यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों, जिनका कब्जा सना, उत्तरी और पश्चिमी यमन पर है और दक्षिण व पूर्व में स्थित सऊदी समर्थित सुरक्षा बलों के बीच भीषण संघर्ष छिड़ा हुआ है। इससे महज एक दिन पहले यानी शुक्रवार को भी दक्षिणी यमन के एक व्यस्त बाजार पर हुए हवाई हमले में कम से कम 30 लोगों की जान चली गई थी, जिसका आरोप दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगा रहे हैं।
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बचाव दल पर भी दागी गईं मिसाइलें, अस्पतालों में मचा कोहराम
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि शुरुआती हवाई हमलों में अल-शरईया गांव के कई मकान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए। बेहद चिंताजनक बात यह रही कि इसके बाद हुए दूसरे दौर के हमलों में राहत और बचाव कार्य में जुटे इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स (बचाव दल) को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया गया।
हूती संचालित अल-मसीरा टीवी पर जारी फुटेज में एम्बुलेंस से लहूलुहान और मासूम बच्चों के शवों को अस्पताल लाते हुए देखा गया, जबकि गांव में हर तरफ बिखरा मलबा और उड़ती धूल के बीच बदहवास लोग खेतों की तरफ जान बचाकर भागते नजर आए।
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रेड सी और रणनीतिक द्वीपों पर हूती विद्रोहियों का कब्जा
यमन में हालिया महीनों के दौरान सैन्य संघर्ष काफी तेजी से बढ़ा है। बीते सितंबर महीने में हूती विद्रोहियों ने तेज सैन्य अभियान चलाते हुए लाल सागर के तटीय इलाकों और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के कई रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। इसके साथ ही विद्रोहियों ने दक्षिणी यमन के मुख्य द्वार माने जाने वाले रणनीतिक शहर तइज की भी घेराबंदी कर रखी है। इस जमीनी संघर्ष के बीच हूती गुटों की तरफ से सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाकर हमले भी तेज कर दिए गए हैं।