Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangladesh Political Violence Continues Despite Change in Power Report Reveals Worrying Picture

बांग्लादेश: सत्ता बदलने के बाद भी नहीं थम रही राजनीतिक हिंसा, नौ महीने में 94 की मौत; रिपोर्ट में खुलासा

Sun, 08 Nov 2026 08:14 PM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, ढाका।
आईएएनएस, ढाका। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 08 Nov 2026 08:14 PM IST
विज्ञापन
Bangladesh Political Violence Continues Despite Change in Power Report Reveals Worrying Picture
बीएनपी के नेता तारिक रहमान - फोटो : पीटीआई
बांग्लादेश में सियासी नेतृत्व बदलने के बाद भी राजनीतिक हिंसा की घटनाएं जारी हैं। हाल के दिनों में सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के समर्थकों की हत्याओं ने दिखाया है कि स्थानीय प्रभाव, राजनीतिक पदों और संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर पुरानी प्रतिद्वंद्विता अब भी बनी हुई है।
विज्ञापन


'द डिप्लोमैट' में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने पिछले दो दशकों से ज्यादा समय के दौरान हुई राजनीतिक हिंसा के पैटर्न का अध्ययन किया है। इसके लिए बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठन 'ऐन ओ सालिश केंद्र' (एएसके) के रिकॉर्ड, अकादमिक रिसर्च और मीडिया रिपोर्टों का इस्तेमाल किया गया। 
विज्ञापन


रिपोर्ट के अनुसार, बड़े राजनीतिक बदलावों के दौर में भी विभिन्न सरकारों के दौरान राजनीतिक झड़पें लगातार होती रही हैं।

हाल की एक घटना 18 अक्टूबर को हुई, जब नारायणगंज जिले के पैस्का इलाके में बीएनपी की युवा शाखा 'जुबो दल' के स्थानीय नेता रिपन मियां का पीछा कर उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। परिवार वाले उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्थानीय बीएनपी कार्यकर्ताओं के मुताबिक, एक धार्मिक कार्यक्रम की मेहमान सूची में किसका नाम शामिल किया जाए, इसी बात को लेकर दो गुटों के बीच तनाव बढ़ गया था। रिपन की बेटी शीला ने स्थानीय मीडिया को बताया कि कई लोगों ने उनके पिता का पीछा किया और उन पर हमला किया। स्थानीय बीएनपी अध्यक्ष ने इस हत्या को राजनीतिक दबदबे की लड़ाई से जुड़ा बताया।

एक अन्य घटना 28 फरवरी को चुआडांगा जिले में हुई, जहां बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी (जेआई) समर्थकों के बीच झड़प में दो भाइयों की मौत हो गई। 

पुलिस के अनुसार, रमजान के दौरान इफ्तार के बाद शुरू हुई बहस हिंसक संघर्ष में बदल गई।

इस घटना में हाफिजुर रहमान की कुछ घंटों बाद मौत हो गई, जबकि उनके भाई मोफिजुर रहमान, जो स्थानीय जेआई नेता थे, ने 10 मार्च को ढाका के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। 

दोनों पार्टियों ने इस घटना के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया। परिवार की ओर से दर्ज हत्या के मामले के बाद पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक स्थानीय बीएनपी नेता और उसकी स्वयंसेवी शाखा का एक पूर्व पदाधिकारी शामिल था। यह घटना बीएनपी के सत्ता में लौटने के दो सप्ताह से भी कम समय बाद हुई थी।

रिपोर्ट में दिए गए एएसके के आंकड़े समस्या की गंभीरता को दिखाते हैं। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच संगठन ने राजनीतिक हिंसा की 467 घटनाएं दर्ज कीं, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई और 3,587 लोग घायल हुए। इनमें से 112 घटनाएं बीएनपी के अंदरूनी गुटों के बीच संघर्ष की थीं, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 1,215 लोग घायल हुए।

ये आंकड़े अंतरिम प्रशासन और बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान के नेतृत्व वाली निर्वाचित सरकार दोनों के कार्यकाल को शामिल करते हैं। तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद संभाला था।

रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई नई बात नहीं है। 2002 से 2006 के बीच, जब बीएनपी पहले सत्ता में थी, तब एएसके ने पार्टी के भीतर 284 अंदरूनी झड़पें दर्ज की थीं, जिनमें 55 लोगों की मौत हुई थी। उसी अवधि में अवामी लीग (एएल) के भीतर हुए संघर्षों में 37 लोगों की जान गई थी।

जब 2009 में अवामी लीग दोबारा सत्ता में आई, तब 2009 से 2012 के बीच एएसके ने पार्टी के भीतर 799 अंदरूनी संघर्ष दर्ज किए, जिनमें 97 लोगों की मौत हुई। उसी दौरान बीएनपी में 229 झड़पें हुईं और 21 लोगों की मौत हुई।

रिपोर्ट में स्थानीय चुनावों, खासकर यूनियन परिषद चुनावों के दौरान होने वाली हिंसा पर भी प्रकाश डाला गया है। एएसके के अनुसार, चुनावी हिंसा से जुड़ी घटनाओं में 2016 में 147 लोगों और 2021 में 113 लोगों की मौत हुई थी। इससे पता चलता है कि स्थानीय राजनीतिक पदों के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा कई बार जानलेवा रूप ले लेती है।

रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक संगठनों के भीतर वर्चस्व की लड़ाई, साथ ही ठेकों, जमीन, संपत्ति और रोजगार से जुड़े विवाद, हिंसा के प्रमुख कारण हैं।

अगस्त 2024 में हुए राजनीतिक बदलाव, जिसने प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन का अंत किया, से लोगों को उम्मीद थी कि देश में नई राजनीतिक संस्कृति विकसित होगी। लेकिन बाद की घटनाओं से संकेत मिला कि स्थानीय प्रभाव और आर्थिक नेटवर्क पर नियंत्रण की लड़ाई अंतरिम सरकार और बीएनपी के सत्ता में लौटने के बाद भी जारी रही।


रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन जरूर होते रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर चलने वाली राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता खत्म नहीं हुई है। यही वजह है कि राजनीतिक हिंसा बार-बार सामने आती रहती है और देश के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed