विदेश के समाचार: फ्रांस छात्र आंदोलन बेकाबू, अब तक 5000 गिरफ्तार; भारतीय मूल का अफ्रीकी फर्जी डॉक्टर बेनकाब
फ्रांस में कक्षाओं की बदतर स्थिति, फंड की कमी और शिक्षकों की भारी कमी के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन अब पूरी तरह हिंसक रूप ले चुका है। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि पेरिस के पुलिस प्रमुख ने इसे नियंत्रण से बाहर करार दिया है। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है और चेतावनी दी है कि हिंसा और तोड़फोड़ से अब पूरी सख्ती से निपटा जाएगा। पिछले सोमवार से लेकर अब तक देश भर में लगभग 5,000 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से ज्यादातर किशोर हैं। शुक्रवार को पूरे फ्रांस में दंगा रोधी पुलिस और हाई स्कूल के छात्रों के बीच भीषण झड़पें हुईं। इस हिंसा में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जबकि राष्ट्रीय पुलिस प्रवक्ता अगाथे फौकॉल्ट के अनुसार 600 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। इसके अलावा शिक्षकों और आम नागरिकों पर भी हमले किए गए हैं।
फर्जी डिग्री से डॉक्टर बना भारतीय मूल का दक्षिण अफ्रीकी, गिरफ्तार
भारतीय मूल के 39 वर्षीय रेशल दयानंद पर फर्जी मेडिकल डिग्री से डॉक्टर के रूप में पंजीकरण और अस्पताल में इंटर्न के तौर पर काम करने का आरोप है। बुधवार को डरबन की विशेष वाणिज्यिक अपराध अदालत में उसपर जालसाजी, धोखाधड़ी और स्वास्थ्य पेशा अधिनियम व इलेक्ट्रॉनिक संचार और लेनदेन अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगा। उसे चेतावनी देकर रिहा कर दिया गया। क्वाज़ुलु-नटाल पुलिस प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सिम्फिव मलोंगो ने स्थानीय दैनिक द विटनेस को बताया कि मामला 19 नवंबर, 2026 तक टाल दिया गया है। दयानंद ने क्वाज़ुलु-नटाल विश्वविद्यालय में बैचलर ऑफ मेडिसिन और बैचलर ऑफ सर्जरी की डिग्री पूरी नहीं की। 2013 में उसे बाहर किया गया था, फिर 2015 में प्रवेश मिला, पर वह एक अंतिम मॉड्यूल पास नहीं कर सका। डिग्री के बिना भी, दयानंद ने 2016 में हेल्थ प्रोफेशंस काउंसिल ऑफ साउथ अफ्रीका में अवैध पंजीकरण कराया। उसने नॉर्थडेल अस्पताल में इंटर्नशिप की। अधिकारियों का आरोप है कि उसने विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के साथ मिलकर फर्जी शैक्षणिक प्रतिलेख और डिग्री प्रमाण पत्र बनाए।
सरकार की सख्ती के बाद एपल ने भारत में अपने एप स्टोर से बिटचैट हटाया
एपल ने भारत में ऑफलाइन मैसेजिंग एप बिटचैट को अपने एप स्टोर से हटा दिया है। एप के डेवलपर जैक डोर्सी ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये इसकी जानकारी दी। उन्हाेंने कहा कि यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मांग पर की गई है। उन्होंने एपल की एप रिव्यू टीम की ओर से भेजे गए नोटिस का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। एपल के नोटिस के अनुसार, भारत में एप स्टोर इसलिए हटाया गया क्योंकि इसमें ऐसा कंटेंट शामिल है जिसे भारत में अवैध माना गया है। यह एप रिव्यू गाइडलाइन्स के अनुरूप नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि डेवलपर एप को हटाए जाने या भारत के कानूनों और आवश्यकताओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए सीधे मंत्रालय से संपर्क कर सकता है। बिटचैट दूसरे देशों के एप स्टोर पर उपलब्ध रहेगा। भारत में इसका टेस्ट फ्लाइट संस्करण भी उपलब्ध नहीं रहेगा और सार्वजनिक टेस्टफ्लाइट लिंक काम नहीं करेंगे।
जुलाई में भी हुई थी कार्रवाई
बिटचैट पर सरकार की कार्रवाई का यह दूसरा मामला है। इससे पहले जुलाई में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने माइक्रोसॉफ्ट के स्वामित्व वाले गिटहब को बिटचैट हटाने का निर्देश दिया था। उस समय डोर्सी ने सरकार के कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि भारत सरकार बिटचैट जैसी तकनीकों को पसंद नहीं करती और इसे हटाना चाहती है। बिटचैट ब्लूटूथ आधारित विकेंद्रीकृत नेटवर्क के जरिये आसपास के उपकरणों के बीच सीधे संचार की सुविधा देता है। इसकी मदद से इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध होने के बावजूद संचार संभव हो सकता है।