फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   recep-tayyip-erdogan-raises-kashmir-issue-in-unga-dialogue-un-charter-india-stance

संयुक्त राष्ट्र महासभा: एर्दोगन ने फिर उठाया कश्मीर मुद्दा, कही ये बात; भारत पहले भी सुना चुका है दो टूक

Tue, 22 Sep 2026 10:49 PM IST
देवेश त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मैनहैटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मैनहैटन Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Tue, 22 Sep 2026 10:49 PM IST
सार

तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया। उन्होंने दक्षिण एशिया के विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के तहत बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही। गौरतलब है कि भारत पहले भी कई बार कश्मीर मुद्दे को लेकर तमाम पक्षों को दो टूक सुना चुका है। 

विज्ञापन
recep-tayyip-erdogan-raises-kashmir-issue-in-unga-dialogue-un-charter-india-stance
एर्दोगन बोले- संवाद से सुलझे विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक बार फिर कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया है। उन्होंने दक्षिण एशिया के सभी विवादों, जिसमें कश्मीर भी शामिल है, को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के तहत बातचीत के जरिए सुलझाने की बात कही।
विज्ञापन


संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान एर्दोगन ने मंगलवार को कहा, "दक्षिण एशिया में यह महत्वपूर्ण है कि कश्मीर मुद्दे सहित सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के तहत बातचीत के जरिए सुलझाया जाए।" एर्दोगन पिछले कुछ वर्षों से संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कश्मीर का मुद्दा उठाते रहे हैं। भारत ने उनके ऐसे बयानों पर लगातार आपत्ति जताई है।
विज्ञापन


गाजा और फलस्तीन का जिक्र कर क्या बोले एर्दोगन?
एर्दोगन ने अपने संबोधन में गाजा की स्थिति और फलस्तीन के मुद्दे पर भी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की। उन्होंने फलस्तीन को व्यापक स्तर पर मान्यता देने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत की। फलस्तीन के मुद्दे पर बोलते हुए एर्दोगन ने फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की अनुपस्थिति का जिक्र किया। अब्बास लगातार दूसरे वर्ष संयुक्त राष्ट्र की बैठक में शामिल नहीं हो सके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


एर्दोगन ने कहा कि तुर्किये संयुक्त राष्ट्र के मंच से फलस्तीनी लोगों के मुद्दे को उठाता रहेगा। गाजा की स्थिति पर उन्होंने इस्राइल के सैन्य अभियान की आलोचना की और वहां की मानवीय स्थिति को लेकर चिंता जताई।

2019 में की थी क्या टिप्पणी?
एर्दोगन ने 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर पर टिप्पणी की थी। सितंबर 2019 में 74वें यूएन महासभा के सत्र में उन्होंने कहा था कि "80 लाख लोग लगभग नाकाबंदी में हैं और दुर्भाग्य से कश्मीर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।"

उन्होंने यह भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पिछले 72 वर्षों में इस विवाद पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे सका। एर्दोगन की टिप्पणी पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। भारत ने तुर्किये से दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी से बचने को कहा था।

2021 में भी उठाया था मुद्दा
एर्दोगन ने इसके बाद भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधनों में कश्मीर का जिक्र किया। 2021 में उन्होंने कश्मीर को 74 साल से जारी समस्या बताया था और ऐसा समाधान निकालने की बात कही थी जो "हमारे कश्मीरियों की आकांक्षाओं" को प्रतिबिंबित करे।

भारत ने तब भी उनके बयान पर आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि एर्दोगन की लगातार टिप्पणियां इतिहास और कूटनीति की समझ को नहीं दर्शाती हैं। नई दिल्ली ने यह भी कहा था कि इस तरह के हस्तक्षेप का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ सकता है।

2025 में फिर उठाया था कश्मीर
कुछ समय तक संयुक्त राष्ट्र में एर्दोगन के भाषणों में कश्मीर का मुद्दा कम प्रमुख रहने के बाद उन्होंने 2025 में 80वें यूएन महासभा के सत्र में फिर इसका जिक्र किया। यह बयान भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के एक दौर के बाद आया था।

उन्होंने कहा था, "हम तनाव के बाद हुए युद्धविराम से खुश हैं। कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए।" भारत ने इस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी थी और दोहराया था कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है। नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसे मुद्दे को उठाने पर भी आपत्ति जताई थी, जिसे वह द्विपक्षीय और आंतरिक मामला मानता है।


भारत ने हमेशा दिखाया है ऐसे बयानों पर आईना
भारत ने हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर जम्मू-कश्मीर को देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताया है। सितंबर 2026 में भी भारत के स्थायी मिशन ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान और अन्य पक्षों की टिप्पणियों को खारिज किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed