World: ईरानी बंदरगाह पर हुए विस्फोट में मृतक संख्या 70 हुई; कनाडा में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन
ईरान ने कहा कि दक्षिणी बंदरगाह पर विस्फोट से लगी आग को बुझा दिया गया है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 70 हो गई है। यह विस्फोट शनिवार को बंदर अब्बास के निकट शाहिद राजाई बंदरगाह पर हुआ था। सूत्रों ने बताया था कि बंदरगाह पर कथित तौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए ठोस ईंधन के रूप में प्रयोग किए जाने वाले रसायनों को भंडार किया गया था। इसमें विस्फोट के चलते यह हादसा हुआ था। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इससे इन्कार किया था। धमाके में एक हजार से अधिक लोग जख्मी भी बताए जा रहे हैं। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के हवाले से दावा किया गया है कि हताहतों का आंकड़ा बढ़ सकता है क्योंकि अभी भी लगभग 1000 लोग घायल हैं। प्लैनेट लैब्स पीबीसी की तस्वीरें उस समय सामने आईं, जब स्थानीय खबरों में विस्फोट के कारणों पर सवाल खड़े किए गए।
कनाडा में पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करने के लिए प्रदर्शन
कनाडा में शनिवार को विभिन्न समुदायों के सैकड़ों लोगों ने पहलगाम हमले में मारे गए लोगों की याद में कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान दहशतगर्दों को समर्थन देने वाले पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करने की मांग की गई। हिंदू फोरम कनाडा, सीओएचएनए और कई अन्य हिंदू संगठनों के आह्वान पर टोरंटो में निकाले गए इस मार्च में सैकड़ों की संख्या में हिंदू, यहूदी, बलोच, ईरानी और कनाडाई शामिल हुए और उन्होंने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। सभा में इस पर जोर दिया गया कि नरसंहार से लेकर सांस्कृतिक बिनाश तक हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि अनियंत्रित धार्मिक चरमपंथ से जुड़ी वैश्विक चुनौतियां हैं।
गूगल ने एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर मोबाइल यूजर्स (उपयोगकर्ताओं) के लिए अपने जीमेल एप में महत्वपूर्ण अपडेट पेश किए हैं। द वर्ज के अनुसार, अपडेट का मकसद डिजाइन में सुधार और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) तक नई पहुंच के साथ यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाना है। इससे एंड्रॉइड टैबलेट और फोल्डेबल डिवाइस का इस्तेमाल करने वालों को जीमेल एप इंटरफेस से सुविधा होगी। लैंडस्केप यूजर्स अब लिस्ट और चैट पैन को अपने पसंदीदा आकार में एडजस्ट (समायोजित) कर सकते हैं। इस अपडेट में नीचे की तरफ गोली के आकार के बटन और ऊपर की तरफ गोल सर्च बार है। एंड्रॉयड और आईओस दोनों पर वर्कस्पेस यूजर्स के लिए जीमेल एप साइडबार में जेमिनी का इमेज जनरेटर आ रहा है। यह सुविधा यूजर्स को जीमेल एप के भीतर इमेज बनाने और उन्हें सीधे ईमेल ड्राफ्ट में सहेजने, कॉपी करने या इनसर्ट करने में सक्षम बनाती है।
पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में भारत ने इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में होने वाली एशियाई वॉलीबॉल चैंपियनशिप में अपनी टीम नहीं भेजने का फैसला लिया है। पाकिस्तान वॉलीबॉल महासंघ (पीवीएफ) ने रविवार को कहा कि भारत ने अगले माह इस्लामाबाद में होने वाली मध्य एशियाई वॉलीबॉल प्रतियोगिता से अपना दल हटा लिया है। पीवीएफ के अधिकारी अब्दुल अहद ने कहा कि भारत ने 28 मई से जिन्ना परिसर में शुरू होने वाली चैंपियनशिप के लिए 22 खिलाड़ियों सहित 30 सदस्यीय टीम भेजने की पुष्टि की थी। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटक शहीद हुए थे, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। अहद ने कहा, भारतीय वॉलीबॉल अधिकारियों ने क्षेत्रीय संस्था को सूचित किया है कि उनकी सरकार ने पहलगाम में हुई घटना के बाद टूर्नामेंट के लिए उन्हें जारी किए गए एनओसी को रद्द कर दिया है। भारत की जगह अब अफगानिस्तान या श्रीलंका की टीम भाग लेगी। इस प्रतियोगिता में ईरान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान की टीमें को हिस्सा लेना है।
सिंगापुर के लिटिल इंडिया के इतिहास को एक किताब में समेटा गया है। इसका इतिहास 1822 से शुरू होता है, जब यहां बसने वाले प्रारंभिक भारतीय समुदाय के सदस्यों ने सांस्कृतिक व वाणिज्यिक गतिविधियों की शुरुआत की थी। लेखिका सौंदरा नायकी वैरावन ने रविवार को कहा, यह किताब 1822 में लिटिल इंडिया परिसर के मुख्य मार्ग सेरांगून रोड की स्थापना से लेकर आज तक का विवरण प्रस्तुत करती है कि किस प्रकार यह भारतीय मूल के लोगों के लिए वाणिज्यिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करता है। भारतीय उच्चायुक्त शिल्पक अंबुले व सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज यो ने 187 पन्नों की कॉफी टेबल पुस्तक लिटिल इंडिया एंड द सिंगापुर इंडियन कम्युनिटी: थ्रू द एजेस का शुक्रवार को संयुक्त रूप से विमोचन किया।
वर्षों तक तकनीकी दिग्गज और विश्व के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में ख्याति अर्जित करने वाले एलन मस्क की हाल के महीनों में वॉशिंगटन में ताकत तो बढ़ी, लेकिन उनकी लोकप्रियता में कमी आई है। द एसोसिएटेड प्रेस-नॉर्क सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च के एक सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई। पोल के अनुसार, केवल 33 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क मस्क के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा 41 प्रतिशत था। मस्क राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सरकारी खर्च में कटौती और पुनर्गठन के प्रयासों का चेहरा हैं, वे अब अलोकप्रिय हो रहे हैं। नॉर्थ कैरोलिना के 27 वर्षीय डेमोक्रेट अर्नेस्ट परेरा ने कहा, यह शर्मनाक है कि उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा को नष्ट कर लिया। वे अपनी ही हवा में बह गए। पोल में पाया गया कि दो-तिहाई वयस्क मानते हैं कि मस्क का संघीय सरकार पर अत्यधिक प्रभाव है, हालांकि यह प्रभाव जल्द खत्म हो सकता है, क्योंकि मस्क जल्द ही प्रशासनिक भूमिका छोड़ सकते हैं। पेंसिल्वेनिया की 75 वर्षीय रिटायरी सुसान वोल्फ ने कहा कि सरकार बहुत बड़ी है, लेकिन मस्क ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। मस्क की सरकारी दक्षता विभाग (डोजी) ने हजारों कर्मचारियों की छंटनी की, लेकिन एक ट्रिलियन डॉलर की कटौती का लक्ष्य 150 बिलियन तक सिमट गया। पोल में 50 प्रतिशत लोग ट्रंप की कर्मचारी कटौती को अत्यधिक मानते हैं, जबकि 30 प्रतिशत इसे सही और 14 प्रतिशत और कटौती चाहते हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान में बढ़ रहा मलेरियाः WHO
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और पाकिस्तान के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा मंत्रालय ने देश भर में मलेरिया के मामलों में तेजी से वृद्धि पर चिंता जताई है और इसे सीधे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जोड़ा है। पाकिस्तान में मलेरिया के सालाना 20 लाख से अधिक मामले आते हैं। डब्ल्यूएचओ व मंत्रालय के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि तेजी से बढ़ते इस खतरे को रोकने के लिए तीव्र कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है। यह चेतावनी विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जारी की गई। इसमें डब्ल्यूएचओ और पाकिस्तानी अधिकारियों ने बीमारी से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया है। संघीय स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफा कमाल ने कहा, मलेरिया एक बड़ा वैश्विक खतरा है। हम खुद देख रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन हमारे देश में जोखिम और मामलों दोनों को कैसे बढ़ा रहा है।
पाकिस्तान के खिलाफ लंदन की सड़कों पर उतरे भारतीय
कनाडा में भीड़ को कुचलने वाले संदिग्ध पर लगे हत्या के आरोप
फ्लोरिडा में फेरी से टकराई नौका, कई घायल
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तैयारियां शुरू: बीजिंग
चीनी विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय तीर्थयात्रियों की कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने के लिए चीन और भारत के बीच तैयारियां जोरों पर हैं। 2020 से पांच साल बाद यह यात्रा इस साल जून में फिर से शुरू की जा ही है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन के तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में कैलाश पर्वत और मानसरोवर की भारतीय तीर्थयात्रा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और लोगों के बीच आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्वत और झील तिब्बती बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म सहित कई धर्मों के अनुयायियों के लिए पवित्र हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है। बीजिंग दोनों देशों के नेताओं के बीच महत्वपूर्ण आम समझ को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों के मजबूत व स्थिर विकास को आगे बढ़ाने के लिए नई दिल्ली के साथ काम करने के लिए तैयार है।
त्रिनिदाद और टोबैगो ने सोमवार को अचानक चुनाव कराए। नए प्रधानमंत्री ने पिछले महीने राष्ट्रपति से संसद को भंग करने को कहा था और उसके बाद ही यह चुनाव हुए। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए 41 उम्मीदवारों को मतदान किया। जो पार्टी 21 सीटें जीतेगी, वही बहुमत हासिल करेगी और उसी पार्टी के नेता को आमतौर पर प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है। इस देश की 14 लाख है। यहां दो मुख्य पार्टियां हैं। इनमें एक पीपल्स नेशनल मूवमेंट है, जिसका नेतृत्व वर्तमान प्रधानमंत्री स्टुअर्ट यंग करते हैं और दूसरी यूनाइटेड नेशनल कांग्रेस है, जिसका नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर नेतृत्व करती हैं। यह चुनाव उस समय हो रहे हैं, जब यह तेल और गैस से समृद्ध देश अपराध और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
तय हो गई पोप चुनने की गुप्त मतदान की तारीख, कौन- कौन है इस पद की दावेदारी में
पोप फ्रांसिस के बाद उनका उत्तराधिकारी कौन बनेगा। इस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं। नए पोप के चुनाव के लिए सात मई का दिन गुप्त मतदान प्रक्रिया शुरू करने के लिए तय किया गया है। कार्डिनल्स का कॉलेज सिस्टिन चैपल में अपने पसंदीदा उम्मीदवारों के लिए तब तक वोट करेगा जब तक कि एक नाम प्रबल तौर पर सामने न आ जाए, क्योंकि इस मतदान का नतीजा कैथोलिक चर्च और दुनिया के 1.4 अरब बपतिस्मा वाले रोमन कैथोलिकों पर गहरा असर डालेगा। नया पोप चुनने जा रहे 80 फीसदी कार्डिनल्स को पोप फ्रांसिस ने खुद नियुक्त किया है। ये न केवल पहली बार पोप का चुनाव कर रहे हैं, बल्कि इससे बड़े पैमाने पर वैश्विक नजरिया भी सामने आएगा। इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब पोप के लिए वोट देने वालों में से आधे से भी कम यूरोपीय होंगे।