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Hindi News ›   World ›   Women's Equality Day 2021: Where are Malala, who can understand the pain of Afghan women better than them

महिला समानता दिवस 2021: कहां हैं मलाला, अफगान महिलाओं की पीड़ा को उनसे बेहतर कौन समझ सकता है

Thu, 26 Aug 2021 05:44 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Thu, 26 Aug 2021 05:44 PM IST
सार

हर साल 26 अगस्त को महिला समानता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पहली बार 1971 में अमेरिका में  उस दिन को याद करने के लिए मनाया गया था जब 1920 में 19वें संशोधन के बाद अमेरिकी महिलाओं को वोट देने का संवैधानिक अधिकार हासिल हुआ था। महिला समानता दिवस के इस मौके पर अफगान महिलाओं की स्थिति को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है। 

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Women's Equality Day 2021: Where are Malala, who can understand the pain of Afghan women better than them
मलाला यूसुफजई: हमले के बाद की तस्वीर - फोटो : Twitter : @Malala

विस्तार

अफगानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण के बाद से महिलाओं की आजादी और अधिकारों को लेकर सबसे ज्यादा बात हो रही है। क्योंकि दुनिया को इस बात का डर है कि तालिबान शासन में महिलाओं के सारे अधिकार छीन लिए जाएंगे। 1996 से 2001 तक जब अफगानिस्तान में तालिबान का शासन रहा तो महिलाएं बहुत बदतर हालात में जी रही थीं। ऐसे में एक बार फिर नोबल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को ढूंढा जा रहा है जो उसी तालिबान के आतंक का शिकार रही हैं जिसका राज अब अफगानिस्तान में है। 
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मलाला ने बताया वो कहां हैं
मलाला ने एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए बताया है कि वो कहां है। मलाला ने कहा है दो हफ्ते पहले, जब अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से हट गए और तालिबान ने नियंत्रण हासिल कर लिया, तो वे बोस्टन एक अस्पताल के बिस्तर पर लेटी हुई थीं। वहां उनकी छठी सर्जरी चली रही थी, क्योंकि तालिबान ने उन पर गोली चलाई थी और उन्हें अभी भी सर्जरी कराने की जरूरत पड़ रही है। मलला ने तालिबान शासन का रूप दिखाने के लिए हॉस्पिटल के बेड से अपनी सर्जरी की पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। 
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मेरी कहानी खत्म हो जाती
मलाला ने अपने पोस्ट में लिखा है अक्टूबर 2012 में, पाकिस्तानी तालिबान का एक सदस्य उनकी स्कूल बस में चढ़ गया था। उसने मलाला को गोली मारी जो उनकी बायीं कनपटी में लगी। उस गोली से उनकी बाईं आंख, खोपड़ी और मस्तिष्क चपेट में आ गए। गोली ने चेहरे की नस को चीर दिया था, कान का परदा फट गया और उनके जबड़े टूट गए थे। घटना के बाद  बर्मिंघम के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल पहुंचने पर मलाला अपना आधा चेहरा ही पहचान पाई थीं। उनकी आंखें काली थी,  उस पर गन पाउडर के छींटे अब तक थे। उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी।
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उन्होंने बताया है, जब तालिबान ने मुझे गोली मारी, तो पाकिस्तान के पत्रकार और कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लोग पहले से ही मेरा नाम जानते थे। वे जानते थे कि मैं वर्षों से लड़कियों की शिक्षा पर काम कर रही हूं और महिला शिक्षा पर चरमपंथियों के प्रतिबंध के खिलाफ बोल रही हूं। उन्होंने मुझ पर हुए हमले की सूचना दी तो दुनिया भर के लोगों की प्रतिक्रिया आईं। लेकिन यह अलग भी हो सकता था। मेरी कहानी एक स्थानीय समाचार में खत्म हो सकती थी। 

मैं एक गोली से उबर रही, अफगानिस्तान के लोग दशकों से गोलियां खा रहे हैं
मलाला ने आगे लिखा है, नौ साल बाद, मैं अभी भी सिर्फ एक गोली से उबरने की कोशिश में हूं। मेरे शरीर पर क गोली और कई सर्जरी के निशान हैं। अफगानिस्तान के लोगों ने पिछले चार दशकों में लाखों गोलियां खाई हैं। मेरा दिल उन लोगों के लिए टूट रहा है जिनके नाम हम भूल जाएंगे या कभी नहीं जान पाएंगे, मदद के लिए जिनकी पुकार अनसुनी रह जाएगी। नौ अगस्त को बोस्टन में मैं सुबह पांच बजे हॉस्पिटल जाने के लिए जागी तभी खबर मिली कि तालिबान ने कुंदुज शहर पर कब्जा कर लिया है। यह अफगानिस्तान का पहला बड़ा शहर था, जो तालिबान के कब्जे में आ गया था। मुझे लगता है कि मैं देख रही हूं कि अफगानिस्तान किस तरह तालिबान के कब्जे में आ गया है। यह ऐसा ही है जैसे मुझे गोली मारी गई थी।


दुनिया भर के नेताओं से कर रहीं आग्रह 
इससे पहले मलाला ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा था कि वे अफगान की स्थिति खासकर वहां की महिलाओं और लड़कियों की स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं। मलाला ने कहा मैं अफगानिस्तान में महिला अधिकार कार्यकर्ताओं सहित कुछ कार्यकर्ताओं से बात कर रही हूं, वे अपने आने वाले जीवन को लेकर अनिश्चिंतता महसूस कर रहे हैं। मलाला संकट में फंसी अफगान महिलाओं और लड़कियों की मदद के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से लेकर दुनिया के तमाम नेताओं से गुहार लगा रही हैं। उन्होंने इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय नेताओं से तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
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