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Unique reunite : 'करतार' ने कराया 75 साल बाद भाइयों से मिलन, 1947 के विभाजन के वक्त बिछड़ी थी बहन

Wed, 18 May 2022 04:13 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, इस्लामाबाद
पीटीआई, इस्लामाबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 18 May 2022 04:13 PM IST
सार

सिख परिवार में जन्मी मुमताज बीबी विभाजन के वक्त नवजात थी। वह एक हिंसक भीड़ द्वारा मार डाली गई अपनी मां के शव पर लेटी थी। तभी एक मुस्लिम दंपती मुहम्मद इकबाल व अल्लाह रखी ने उसे उठा लिया था

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Woman separated from family during Partition in 1947 reunites with brothers from India at Kartarpur
बुजुर्ग मुमताज बीबी का करतारपुर में अपने भाइयों से अनूठा मिलन हुआ - फोटो : social media

विस्तार

इसे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में की गई दुआओं का असर कहिए या कुछ और लेकिन बिछड़ने के 75 साल बाद एक बहन का उसके भाइयों से मिलना किसी दुर्लभ संयोग से कम नहीं है। 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान भयानक खून खराब के बीच यह बहन अपने परिवार से बिछड़ गई थी। इसके बाद उसकी परवरिश एक मुस्लिम दंपती ने की थी।

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इस बहन के बिछड़ने की कहानी भी रौंगटे खड़े करने वाली है। पाकिस्तान के अखबार 'डॉन' में बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार सिख परिवार में जन्मी मुमताज बीबी विभाजन के वक्त नवजात थी। वह एक हिंसक भीड़ द्वारा मार डाली गई अपनी मां के शव पर लेटी थी। तभी एक मुस्लिम दंपती मुहम्मद इकबाल व अल्लाह रखी ने उसे उठा लिया था और अपनी बेटी के रूप में उसकी परवरिश की। उन्होंने उसका नाम मुमताज बीबी रखा। 
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दो साल पहले बताया कि वह सिख परिवार की बेटी है
विभाजन के बाद उक्त मुस्लिम दंपती पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखपुरा जिले के वारिका तिआन गांव में बस गए थे। इकबाल व उनकी पत्नी ने मुमताज को यह नहीं बताया था कि वे उसके माता-पिता नहीं हैं। दो साल पहले जब इकबाल की सेहत बिगड़ने लगी तब उन्होंने मुमताज से कहा कि वह उनकी बेटी नहीं है, वह एक सिख परिवार की संतान है। 
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इकबाल की मृत्यु के बाद मुमताज व उसके बेटे शहबाज ने सोशल मीडिया के जरिए अपने परिजनों को तलाशना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने मुमताज के असल पिता का नाम पता चला और यह भी पता चला कि पाकिस्तान छोड़ने पर मजबूर किए जाने के बाद वह भारत के पंजाब प्रांत के पटियाला जिले के सिदराना गांव में बस गए थे। इसके बाद दोनों परिवार सोशल मीडिया के जरिए जुड़ गए। 

गुरुद्वारा दरबार साहिब पहुंचे भाई
कुछ समय बात मुमताज के असली भाई गुरुमीत सिंह, नरेंद्र सिंह व अमरिंदर सिंह अपने अन्य परिजनों के साथ करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब पहुंचे। मुमताज भी अपने परिजनों के साथ वहां पहुंची और 75 साल बाद अपने बिछड़े भाइयों से मिली। 


भारत-पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। यह रास्ता पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारत के पंजाब में स्थित गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक से जोड़ता है। दरबार साहिब सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव का महाप्रयाण स्थल है। यह 4 किलोमीटर लंबा गलियारा सिख तीर्थयात्रियों दरबार साहिब जाने के लिए वीजा मुक्त यात्रा की सुविधा देता है। 

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