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नेपाल: आखिर क्यों इस बार इतनी अहमियत मिल रही है स्थानीय चुनावों को?

Mon, 25 Apr 2022 03:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 25 Apr 2022 03:03 PM IST
सार

नेपाल में 2015 में नया संविधान लागू होने के बाद ये दूसरा मौका है, जब स्थानीय निकायों के लिए चुनाव हो रहे हैं। 2017 में ये चुनाव तीन चरणों में कराए गए थे। तब मई, जून और सितंबर में मतदान हुआ था। लेकिन इस बार एक ही चरण में पूरा मतदान होगा। इस बार चुनाव के लिए पर्चा भरने की तारीख 24-25 अप्रैल रखी गई थी...

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With the filing of nomination papers for the local elections in Nepal, now the country attention has shifted to the polling to be held on May 13
नेपाल में स्थानीय चुनाव - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल में स्थानीय चुनावों के लिए पर्चा दाखिल होने के साथ ही अब देश का ध्यान 13 मई को होने वाले मतदान पर केंद्रित हो गया है। आम तौर पर स्थानीय चुनावों को जितनी अहमियत मिलती है, उससे कहीं ज्यादा दिलचस्पी इस बार देखी जा रही है। इसकी वजह ये आम राय है कि इन चुनावों के रूझान से इस बात का ठोस संकेत मिल जाएगा कि इस साल के अंत में होने वाले संसदीय चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहेगा।

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नेपाल में 2015 में नया संविधान लागू होने के बाद ये दूसरा मौका है, जब स्थानीय निकायों के लिए चुनाव हो रहे हैं। 2017 में ये चुनाव तीन चरणों में कराए गए थे। तब मई, जून और सितंबर में मतदान हुआ था। लेकिन इस बार एक ही चरण में पूरा मतदान होगा। इस बार चुनाव के लिए पर्चा भरने की तारीख 24-25 अप्रैल रखी गई थी। पहले प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस ने कहा था कि वह सत्ताधारी गठबंधन के अन्य दलों के साथ इन चुनावों के लिए गठजोड़ नहीं करेगी। उससे चुनावी सूरत बेहद धुंधली हो गई थी। लेकिन बाद में पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ तालमेल करने का एलान किया।

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राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन

पिछले साल नेपाली कांग्रेस ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट), जनता समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जन मोर्चा के साथ राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन बनाया था। मौजूदा देउबा सरकार से ये पांचों पार्टियां शामिल हैं। विश्लेषकों के मुताबिक नेपाली कांग्रेस को स्थानीय स्तर पर पांचों सहयोगी पार्टियों के साथ तालमेल में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। उधर विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, नेपाल परिवार दल, और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल किया है।

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13 मई को कुल 753 स्थानीय निकायों के लिए चुनाव होगा। उनमें छह महानगर परिषद, 11 उप महानगर परिषद, 276 शहरी नगरपालिकाएं और 460 ग्रामीण नगरपालिकाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं के लिए कुल 35,221 प्रतिनिधियों का चुनाव होगा। इन चुनावों के लिए 79 पंजीकृत दलों के उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है।

सहयोगी दलों से बनी सहमति

नेपाली कांग्रेस ने छह महानगरों और 11 उप महानगरों में सीटों के बंटवारे पर सहयोगी दलों के साथ सहमति बना ली है। लेकिन खबरों के मुताबिक छोटे शहरों और गांवों में ये तालमेल ठीक से नहीं बना है। वहां भ्रम की स्थिति है। साथ ही नेपाली कांग्रेस के एक हिस्से में सहयोगी दलों के लिए सीट छोड़े जाने को लेकर असंतोष भी देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन चुनावों में एक करोड़ 77 लाख से ज्यादा मतदाता वोट डाल सकेंगे। इस बार 36 लाख 59 हजार से ज्यादा मतदाता पहली बार वोट डाल पाएंगे। इन मतदाताओं के लिए 10,756 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।



पिछली बार पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी यूएमएल सबसे बड़ा दल बन कर उभरी थी। विश्लेषकों के मुताबिक अभी भी ये पार्टी बाकी दलों की तुलना में ज्यादा लोकप्रिय नजर आ रही है। अगर वह पांच दलों के गठबंधन से ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही, तो उसका राष्ट्रीय राजनीति पर तुरंत असर देखने को मिल सकता है।

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