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हूती विद्रोहियों की बढ़ रही ताकत: सऊदी अरब पर किया नए हमलों का दावा; यमन सरकार बोली- करेंगे जवाबी कार्रवाई
Sun, 13 Sep 2026 05:46 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, काहिरा
पीटीआई, काहिरा
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 13 Sep 2026 05:46 PM IST
सार
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से नए हमले करने का दावा किया है। हूती प्रवक्ता ने सऊदी अरब के नजरान क्षेत्र में एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की बात कही। सऊदी नागरिक सुरक्षा के मुताबिक, यमन सीमा के पास एक प्रक्षेप्य गिरने से दो लोग घायल हुए और कई इमारतों को नुकसान पहुंचा।
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यमन में हूतियों की बढ़त से बढ़ी चिंता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रविवार को पड़ोसी सऊदी अरब पर मिसाइलों और ड्रोन से नए हमले करने का दावा किया। वहीं, यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने लाल सागर के तट पर विद्रोहियों की तेजी से बढ़त को 'दर्दनाक' घटनाक्रम बताया है। सरकार के मुताबिक, ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच यह एक नया मोर्चा बन सकता है।
हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास एक प्रमुख बंदरगाह शहर और एक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। यह जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के रूप में महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हूती विद्रोहियों की बढ़त से बाजारों में चिंता बढ़ी है और यमन के नागरिकों को भीषण गृहयुद्ध की वापसी का डर सताने लगा है।
सऊदी अरब में सैन्य अड्डे को निशाना बनाने का दावा
हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने एक बयान में दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के नजरान क्षेत्र के शरूराह प्रांत में एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। उन्होंने हमले के समय की जानकारी नहीं दी और अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत भी नहीं दिया।
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सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने रात में बताया कि लाल सागर के पास यमन सीमा से लगे अल-तव्वाल इलाके में एक प्रक्षेप्य गिरा। इससे दो लोग घायल हुए और एक मस्जिद सहित कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। विभाग ने इसके लिए हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया। उसने यह भी बताया कि शरूराह प्रांत में चेतावनी सायरन बजाए गए, लेकिन किसी के हताहत होने या नुकसान की जानकारी नहीं दी।
रविवार को सऊदी अरब की ओर से हूती विद्रोहियों पर किसी नए हमले को लेकर कोई बयान नहीं आया। हूती विद्रोही हाल में घोषित नाकाबंदी के तहत सऊदी तेल ढांचे और समुद्री जहाजों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अन्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद बाजारों में चिंता बनी हुई है और तेल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है।
यमन सरकार ने जवाबी कार्रवाई का संकल्प लिया
यमन सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उसकी सेनाएं लाल सागर के तट पर लौटेंगी और हूती विद्रोहियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेंगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब हूती विद्रोहियों की बढ़त से बचकर भाग रहे लोगों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उन्होंने सरकारी बलों को पीछे हटते और लोगों से भागने की अपील करते देखा।
सत्तारूढ़ राष्ट्रपति परिषद के सदस्य सुल्तान अल-अरादा ने बंदरगाह शहर मोखा और यमन के पश्चिमी तट के अन्य इलाकों में सरकारी बलों के पतन को 'दर्दनाक और खेदजनक' बताया। केंद्रीय मारीब प्रांत के गवर्नर अल-अरादा ने शनिवार देर रात प्रसारित एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा कि सरकारी बल 'फिलहाल फिर से संगठित हो रहे हैं और किसी न किसी रूप में लड़ाई में लौटेंगे।'
हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों यमन सरकार नहीं कर पाई कार्रवाई?
शुक्रवार को यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने सेना और कई सहयोगी लड़ाकों के बीच 'समन्वय की कमी' को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे हूती विद्रोहियों को 'अनमोल मौका' मिला। गोपनीयता की शर्त पर बात करने वाले अधिकारी ने यह भी कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि सऊदी वायुसेना ने मोखा पर कब्जा रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की। मोखा इस जलडमरूमध्य से करीब 80 किलोमीटर दूर है।
हूती विद्रोहियों की तेजी से बढ़त यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी अरब दोनों के लिए बड़ा झटका है। दोनों पिछले 12 वर्षों से हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहे हैं। ताजा तनाव से 2022 में हुए युद्धविराम पर भी खतरा मंडरा रहा है। हूती विद्रोहियों की यह बढ़त बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के दूसरी ओर जिबूती स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे से उनकी दूरी को घटाकर महज 32 किलोमीटर कर देती है। यह अफ्रीका में अमेरिका का प्रमुख सैन्य अड्डा है। जिबूती में चीन, फ्रांस और जापान समेत कई देशों के सैन्य अड्डे भी हैं।
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हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास एक प्रमुख बंदरगाह शहर और एक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। यह जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के रूप में महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हूती विद्रोहियों की बढ़त से बाजारों में चिंता बढ़ी है और यमन के नागरिकों को भीषण गृहयुद्ध की वापसी का डर सताने लगा है।
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सऊदी अरब में सैन्य अड्डे को निशाना बनाने का दावा
हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने एक बयान में दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के नजरान क्षेत्र के शरूराह प्रांत में एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। उन्होंने हमले के समय की जानकारी नहीं दी और अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत भी नहीं दिया।
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सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने रात में बताया कि लाल सागर के पास यमन सीमा से लगे अल-तव्वाल इलाके में एक प्रक्षेप्य गिरा। इससे दो लोग घायल हुए और एक मस्जिद सहित कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। विभाग ने इसके लिए हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया। उसने यह भी बताया कि शरूराह प्रांत में चेतावनी सायरन बजाए गए, लेकिन किसी के हताहत होने या नुकसान की जानकारी नहीं दी।
रविवार को सऊदी अरब की ओर से हूती विद्रोहियों पर किसी नए हमले को लेकर कोई बयान नहीं आया। हूती विद्रोही हाल में घोषित नाकाबंदी के तहत सऊदी तेल ढांचे और समुद्री जहाजों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अन्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद बाजारों में चिंता बनी हुई है और तेल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है।
यमन सरकार ने जवाबी कार्रवाई का संकल्प लिया
यमन सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उसकी सेनाएं लाल सागर के तट पर लौटेंगी और हूती विद्रोहियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेंगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब हूती विद्रोहियों की बढ़त से बचकर भाग रहे लोगों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उन्होंने सरकारी बलों को पीछे हटते और लोगों से भागने की अपील करते देखा।
सत्तारूढ़ राष्ट्रपति परिषद के सदस्य सुल्तान अल-अरादा ने बंदरगाह शहर मोखा और यमन के पश्चिमी तट के अन्य इलाकों में सरकारी बलों के पतन को 'दर्दनाक और खेदजनक' बताया। केंद्रीय मारीब प्रांत के गवर्नर अल-अरादा ने शनिवार देर रात प्रसारित एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा कि सरकारी बल 'फिलहाल फिर से संगठित हो रहे हैं और किसी न किसी रूप में लड़ाई में लौटेंगे।'
हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों यमन सरकार नहीं कर पाई कार्रवाई?
शुक्रवार को यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने सेना और कई सहयोगी लड़ाकों के बीच 'समन्वय की कमी' को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे हूती विद्रोहियों को 'अनमोल मौका' मिला। गोपनीयता की शर्त पर बात करने वाले अधिकारी ने यह भी कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि सऊदी वायुसेना ने मोखा पर कब्जा रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की। मोखा इस जलडमरूमध्य से करीब 80 किलोमीटर दूर है।
हूती विद्रोहियों की तेजी से बढ़त यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और सऊदी अरब दोनों के लिए बड़ा झटका है। दोनों पिछले 12 वर्षों से हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहे हैं। ताजा तनाव से 2022 में हुए युद्धविराम पर भी खतरा मंडरा रहा है। हूती विद्रोहियों की यह बढ़त बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के दूसरी ओर जिबूती स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे से उनकी दूरी को घटाकर महज 32 किलोमीटर कर देती है। यह अफ्रीका में अमेरिका का प्रमुख सैन्य अड्डा है। जिबूती में चीन, फ्रांस और जापान समेत कई देशों के सैन्य अड्डे भी हैं।