कोविड-19 का सच : क्या कभी दुनिया जान पाएगी कहां हुई वायरस की उत्पत्ति? कैसे यह पूरी दुनिया में फैला?
एक साल से ज्यादा हो गया पर अब भी कोविड-19 वायरस कैसे पैदा हुआ, इसके बारे में दुनिया को ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। चीन का वुहान इसका एपिक सेंटर माना गया। डब्ल्यूएचओ की टीम ने वहां जाकर जांच की, लेकिन रिपोर्ट का इंतजार है। शायद ही कभी दुनिया के सामने इसकी पूरी सचाई आ पाएगी।
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कोविड-19 वायरस की उत्पत्ति के सच के बारे में कुछ संकेत मिलने की हल्की उम्मीद जागी है, हालांकि यह शक कायम है कि क्या कभी पूरा सच सामने आ पाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड- 19 वायरस की उत्पत्ति की वास्तविक जानकारी से भविष्य में महामारियों को रोकने में मदद मिल सकती है। मगर हकीकत यह है कि कोविड-19 के स्रोत की जांच का मामला महाशक्तियों के आपसी टकराव की भेंट चढ़ता दिख रहा है।
इसी महीने आएगी वुहान दौरे की रिपोर्ट
हाल में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की टीम ने इसी जांच पड़ताल के लिए चीन के वुहान शहर का दौरा किया था। ये टीम संभवतः इस महीने के मध्य में अपने शुरुआती निष्कर्ष दुनिया को बताएगी। पहले टीम ने कहा था कि वह कोई अंतरिम रिपोर्ट जारी नहीं करेगी। हालांकि अब उसने अपना रुख बदला है। इस मुद्दे पर इतना विवाद खड़ा हो चुका है कि उसके निष्कर्षों को दुनिया के तमाम देश स्वीकार कर लेंगे, इसे लेकर भी शक पैदा हो गया है।
वैज्ञानिकों ने की नए सिरे से जांच की मांग
गौरतलब है कि पिछले गुरुवार को दो दर्जन से अधिक वैज्ञानिकों ने एक बयान जारी कर इस मामले की नए सिरे से जांच की मांग की थी। उस बयान में दावा किया गया कि डब्लूएचओ की टीम को चीन में सभी अहम जगहों पर जाने की आजादी नहीं दी गई। इनमें वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट भी है, जहां कोरोना वायरस के बारे में अनुसंधान हुआ था।
चीन की प्रयोगशाला में बना वायरस?
इसके पहले डब्लूएचओ की टीम ने अपनी चीन यात्रा के आखिर में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि कोरोना वायरस किसी प्रयोगशाला में हादसे की वजह से मनुष्य में संक्रमित हुआ, इस बात की संभावना बेहद कम है। लेकिन टीम ने कहा कि उसने इस संभावना की जांच का विकल्प खुला रखा है। गौरतलब है कि चीन का दावा है कि कोवड- 19 वायरस की उत्पत्ति किसी और देश में हुई और वहां से दूषित फ्रोजन फूड के साथ वह चीन पहुंचा। जबकि अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश इस वायरस को चीन की प्रयोगशाला में बनाए जाने का आरोप लगा चुके हैं।
चीन का दावा नहीं मानते वैज्ञानिक
ज्यादातर वैज्ञानिक भी चीन के दावे को स्वीकार नहीं करते। अब तक सबसे ज्यादा स्वीकार्य बात इसे समझा गया है कि ये वायरस किसी पशु से मनुष्य में संक्रमित हुआ। बहुत-सी दूसरी वायरल महामारियों में पशु से मनुष्य में वायरस के संक्रमण की बात साबित हो चुकी है।
अब कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम के वैक्सीन बन जाने से दुनिया में भरोसा पैदा हुआ है, लेकिन वैज्ञानिकों में ये आशंका बनी हुई है कि इस महामारी पर काबू पाए जाने के बाद अमेरिका सहित तमाम देशों की दिलचस्पी भविष्य के लिए अनुसंधान में घट जाएगी। जबकि कोरोना महामारी के बीच ही दुनिया के कई हिस्सों में कई दूसरी महामारियों की भी मार पड़ी है।
आपातकाल में लेते हैं संकल्प, बाद में भूल जाते
इसके मद्देनजर अमेरिका में जॉन हॉपकिन्स सेंटर फॉर हेल्थ सिक्युरिटी में सीनियर स्कॉलर जेनिफर नुजो ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘महामारियों के लिए तैयार रहने का खर्च हमें लगातार उठाना होगा। अक्सर हमारे सामने आपातकालीन स्थिति आती है और तब हम संकल्प लेते हैं कि आगे ऐसा नहीं होने देंगे। तब धन उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन कुछ वर्षों के बाद लोग भूल जाते हैं। उसके बाद रिसर्च के लिए बजट में कटौती शुरू हो जाती है।’ कई विशेषज्ञों का कहना है कि आगे की तैयारी के लिए जरूरी है कि अभी पूरी पारदर्शिता बरती जाए। जबकि कोविड- 19 के मामले में पारदर्शिता का सवाल लगातार विवादों से घिरा हुआ है।