Iran Unrest: क्या पूरा होगा राष्ट्रपति ट्रंप का सपना, रूस और चीन गिरने देंगे ईरान में खामेनेई का विकेट?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों खुले संकेतों में बात कर रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सुर भी ऐसे ही हैं। अमेरिका असल में ईरान के रास्ते अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा तक पहुंच बनाना चाहता है।
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पश्चिमी मीडिया ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को लेकर अपनी भविष्यवाणी में मग्न है। खामेनेई भूमिगत हैं। उनका देश प्रदर्शन की आग में जल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान की आग में घी डालकर उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन क्या रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के शी जिनपिंग इस सपने को साकार होने देंगे?
देश के सामरिक, रणनीतिक, कूटनीतिक जानकार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर गड़ाए हैं। वायुसेना के पूर्व अधिकारी एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि ईरान बड़े संकट में है, लेकिन शक्ति संतुलन के लिहाज से ऐसा नहीं होना चाहिए। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई का विकेट गिरने का मतलब दुनिया में अमेरिकी बादशाहत से लगा लीजिए। कुमार कहते हैं कि ईरान में तख्तापलट के बाद भी दुनिया में कोई स्थिरता आने के संकेत नहीं है।
एक पूर्व विदेश सचिव नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि पिछले कुछ साल से दुनिया की भू-राजनीतिक स्थिति लगातार बदल रही है। सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान में सहयोग, समन्वय, समझौता और आपसी सहमति पर गौर कीजिए। इस्लामिक मिलिशिया का भी रुख बदल रहा है। इस्राइल से खाड़ी क्षेत्र में डर बढ़ रहा है। अमेरिका पर भरोसा संदेह के दायरे में आ रहा है। कतर, यमन, यूएई के मामले ने नया संकेत दे दिया है। ऐसा लगता है कि इस्लामिक मिलिशिया सुरक्षा को ध्यान में रखकर विकल्प तैयार कर रही है।
अब तो खुले संकेत में बात कर रहे हैं ट्रंप, पुतिन और शी...
एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को अमेरिका गिरफ्तार करके ले आया। क्यों? यह संदेश किसके लिए था? अमेरिका को अपने विशेष दस्ते की इस काबिलियत को दिखाने की जरूरत क्या थी? इस प्रकरण से सबसे ज्यादा चीन के सामरिक रणनीतिकार हैरान हैं। उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे वेनेजुएला में इतना सब हो गया और उनकी तकनीक, इंजीनियरिंग, काबिलियत मूक दर्शक बनी रही। फिर तेल टैंकरों को फ्रीज करना? अब राष्ट्रपति ट्रंप खुलकर धमकी दे रहे हैं, जबकि बेन्जामिन नेतेन्याहू अपने अंदाज को बदल कर सतर्क हैं। माना जा रहा है कि वेनेजुएला के मादुरो पर शिकंजा कसने के बाद रूस ने यूक्रेन पर हाइपरसोनिक मिसाइल दागी थी। सामरिक विशेषज्ञ इसे बड़ी गंभीरता से ले रहे हैं। उनका मानना है कि रूस लगातार यूरोप और अमेरिका समेत अन्य को संदेश दे रहा है। इसी हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली की गति के आस-पास की मिसाइल से ईरान ने भी इस्राइल पर हमला किया था। फिर परमाणु हमले की धमकी भी। चीन का रूख लगातार बड़े संदेश दे रहा है।
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ईरान के बाद क्या रूकेंगे डोनाल्ड ट्रंप?
इसकी संभावना काफी कम है। यूएई को इसकी तपिश महसूस हो रही है। ग्रीनलैंड अमेरिका के राष्ट्रपति की खुली धमकी को सुन रहा है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप अफगानिस्तान में अमेरिका की मंशा को जता चुके हैं। जानकारों का मानना है कि ईरान में तख्तापलट के बाद मिडिल ईस्ट तक अमेरिका का प्रभुत्व बनेगा। ईरान से अफगानिस्तान-पाकिस्तान तक ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अमेरिका की स्थिति काफी अच्छी हो जाएगी। इस तरह से ईरान में सीरिया की तरह तख्ता पलट रूस और चीन के रास्ते में बड़ी दीवार साबित हो सकता है।
अब प्रॉक्सी नहीं, देश लड़ रहे हैं...
इस्राइल का हूती, हिज्बुल्ला, हमास से टकराव ईरान की प्रॉक्सियों से जंग मानी जा रही थी। अब यह जंग यहां से आगे निकल चुकी है। अब देश लड़ रहे हैं। ईरान जैसे देश में विदेशी ताकतों के सहयोग पर अंदरूनी ताकतें प्रदर्शन के माध्यम से बगावत की ओर हैं। अमेरिका-ईरान में धमकियों का दौर चल रहा है और इस्राइल संवेदनशील हालात की कल्पना करके बेहद सतर्क है। अमित शुक्ला कहते हैं कि यह लड़ाई अब संसाधन पर कब्जा, वर्चस्व की जंग और विस्तारवाद की नीति के जरिए बदल रही भू-राजनीतिक स्थिति की है।
...तो क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका?
इसकी संभावना कम है। एयर वाइस मार्शल का कहना है कि अमेरिका ईरान पर हमला कर भी सकता है, लेकिन लग रहा है कि ईरान के शहरों में विरोधियों को बड़ा समर्थन मिल रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप भी लगातार विरोधियों पर सैन्य कार्रवाई की दशा में हस्तक्षेप की धमकी दे रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि सीरिया की तरह हालात के हाथ से निकलते देखकर खामेनेई प्रशासन हथियार डाल सकता है। अभी नहीं तो कुछ समय बाद ही सही। रंजीत कुमार कहते हैं कि बिना अमेरिका के ईरान में उतरे यदि उसके मन माफिक हो जाए तो ट्रंप के लिए इससे अच्छा ‘गिफ्ट’ क्या हो सकता है?
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