फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   why Iran is not losing and how it rapidly repairs underground missile bunkers

पश्चिम एशिया की जंग मुश्किल क्यों: US ने 12,300 ठिकानों पर निशाना साधा, फिर भी ईरान ने मिसाइल बंकर ठीक कर लिए

Sat, 04 Apr 2026 02:19 PM IST
Nitin Gautam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Nitin Gautam Updated Sat, 04 Apr 2026 02:19 PM IST
सार

अमेरिका, ईरान पर बीते पांच हफ्तों में 12 हजार से ज्यादा हमले कर चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान की वायु और नौसेना तबाह हो चुकी है। इसके बावजूद ईरान जिस तरह से पलटवार कर रहा है, उसने सभी को हैरान कर दिया है। आखिर जानते हैं कैसे अमेरिका और इस्राइल काफी कोशिशों के बाद भी ईरान को नहीं हरा पा रहे हैं?

विज्ञापन
why Iran is not losing and how it rapidly repairs underground missile bunkers
ईरान इस्राइल युद्ध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका और इस्राइल पांच हफ्तों में 12,300 से ज़्यादा ईरानी ठिकानों पर हमले कर चुके हैं। व्हाइट हाउस और पेंटागन बड़ी कामयाबी का दावा कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया की मानें तो खुफिया एजेंसियां खुद इन दावों पर सवाल उठा रही हैं। ईरान के मिसाइल बंकर घंटों में दोबारा चालू हो रहे हैं। आधे से ज्यादा लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं और हजारों ड्रोन अभी भी तैयार हैं। तो असली तस्वीर क्या है? जानिए
विज्ञापन


ईरान युद्ध को लेकर पहले वो बड़ी बातें, जो आपको जाननी चाहिए:
  • ईरानी सेना ने एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू जेट को गोलाबारी में मार गिराया। दो पायलट वाले इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि दोनों देशों के अधिकारियों ने की है। 
  • विज्ञापन
  • घटना के बाद एक पायलट को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अभी भी लापता है। दूसरे पायलट की तलाश की जा रही है। 
  • इस बीच, ईरान ने मध्यस्थता की पाकिस्तान की पेशकश को सिरे से खारिज कर दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका नेतृत्व वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करेगा। 
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • अमेरिका पांच हफ्तों में ईरान के 12,300 ठिकानों पर हमले कर चुका है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ईरान घंटों में अपने मिसाइल बंकर दोबारा चालू कर रहा है।
  • ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद से अब तक कम से कम 2,076 लोगों की मौत हो चुकी है और 26,500 लोग घायल हुए हैं।

अब सवाल-दर-सवाल जानते हैं असली हालात...
क्या ईरान की मिसाइल क्षमता सच में तबाह हो गई?
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस दावे पर संदेह जताया है कि अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट करने के करीब है, जबकि यही इस युद्ध का एक प्रमुख लक्ष्य था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के पास अभी भी इतनी बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर बचे हैं कि वह इस्राइल और खाड़ी के अन्य देशों पर हमले जारी रख सके। खुफिया एजेंसियां बचे हुए लॉन्चरों की सटीक संख्या को लेकर अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।

व्हाइट हाउस और पेंटागन क्या दावे कर रहे हैं?
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा था कि लोग राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना की शानदार उपलब्धियों को कमतर आंकने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले 90 प्रतिशत कम हो गए हैं। उनकी नौसेना तबाह हो चुकी है। दो-तिहाई सुविधाएं क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुकी हैं और अमेरिका-इस्राइल का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है।

वहीं, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोमवार को कहा था, 'हां, वे अभी भी कुछ मिसाइलें दागेंगे, लेकिन हम उन्हें मार गिराएंगे। वे जमीन के नीचे जाएंगे, लेकिन हम उन्हें ढूंढ निकालेंगे।'

ईरान हार क्यों नहीं रहा, असली वजह क्या है?
इसकी सबसे बड़ी वजह है ईरान की दशकों पुरानी भूमिगत तैयारी। CNN ने तीन सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान के मिसाइल लॉन्चर सुरंगों और गुफाओं के विशाल नेटवर्क में छुपे हुए हैं। यही वजह है कि उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान जानबूझकर अपने लॉन्चरों को बंकरों और गुफाओं में सुरक्षित रख रहा है ताकि युद्ध लंबा खिंचने पर दबाव बनाए रख सके।

ईरान के मिसाइल बंकर हमलों के बाद इतनी जल्दी दोबारा कैसे चालू हो जाते हैं?
यही वह सवाल है जो अमेरिकी रणनीतिकारों को सबसे ज़्यादा परेशान कर रहा है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अमेरिकी और इस्राइली बमों से क्षतिग्रस्त हो चुके भूमिगत बंकरों में से लॉन्चरों को सुरक्षित बचा लेता है और उसे मरम्मत कर दोबारा हमले करता है।

ईरान अभी भी कितनी मिसाइलें दाग रहा है?
ईरान अभी भी इस्राइल पर प्रतिदिन करीब 20 मिसाइलें दाग रहा है। वह एक बार में दो-दो मिसाइलें दागता है। एक पश्चिमी अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि ईरान प्रतिदिन 15 से 30 बैलिस्टिक मिसाइलें और 50 से 100 ड्रोन दाग रहा है। 

अन्य खुफिया रिपोर्ट्स में क्या सामने आया?
CNN ने अमेरिकी खुफिया आकलन से परिचित तीन सूत्रों के हवाले से बताया कि पांच हफ्तों की लगातार बमबारी के बावजूद ईरान के करीब 50% मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं। एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन भी अभी भी ईरान के पास मौजूद हैं। यानी उसकी करीब 50% ड्रोन क्षमता बरकरार है। एक सूत्र ने कहा, "वे अभी भी पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाने की स्थिति में हैं।" साथ ही ईरान की तटीय रक्षा से जुड़ी क्रूज मिसाइलों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी सुरक्षित है। यह जखीरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को खतरे में डालने की क्षमता रखता है।


अमेरिका के लिए ईरानी लॉन्चरों को ट्रैक करना इतना मुश्किल क्यों है?
इसकी कई वजहें हैं। पहली- ईरान बड़ी संख्या में नकली लॉन्चर तैनात कर रहा है और अमेरिका को यकीन नहीं है कि उसने जितने लॉन्चर नष्ट किए, उनमें से कितने असली थे? दूसरी- ईरान 'दागो और भागो' की रणनीति अपना रहा है। मोबाइल प्लेटफॉर्म अपनी मिसाइलें दागने के बाद तुरंत जगह बदल लेते हैं। यह वही चुनौती है, जो यमन में हूतियों के खिलाफ भी झेलनी पड़ी। तीसरी- बमबारी से पहले भी ईरान के लॉन्चरों की कुल संख्या का अमेरिकी अनुमान पूरी तरह सटीक नहीं था। ऐसे में ट्रैकिंग मुश्किल है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहम बेन तालेब्लू के अनुसार, ईरान के हवाई क्षेत्र में अभी भी श्रेष्ठता बनाम वर्चस्व की जंग है। उन्होंने कहा अक्षम वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट वायु रक्षा प्रणाली नहीं कह सकते। हमें हैरान नहीं होना चाहिए कि वे अभी भी लड़ रहे हैं। अमेरिकी विमान कम ऊंचाई पर मिशन उड़ा रहे हैं, जिससे वे ईरान की मिसाइलों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। संभव है कि ईरान ने एफ-15 पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल दागी हो, लेकिन अधिक संभावना है कि एक पोर्टेबल लॉन्चर से मिसाइल दागी गई हो या कंधे पर रखकर दागे जाने वाले लॉन्चर का इस्तेमाल किया गया हो। ऐसी मिसाइलों का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है और यह दर्शाता है कि ईरान कमजोर है, लेकिन अभी भी घातक है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed