भारत ने क्यों बुलाए राजनयिकों के परिवार?: बांग्लादेश बोला- 'कोई खतरा नहीं', चुनाव से पहले बयान ने बढ़ाई हलचल
भारत द्वारा बांग्लादेश में तैनात राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने पर ढाका ने कहा है कि ऐसा करने की कोई ठोस वजह नहीं है। विदेश सलाहकार एमडी तौहीद हुसैन ने कहा कि देश में विदेशी राजनयिकों के लिए कोई खतरा नहीं है। भारत का यह कदम बांग्लादेश चुनाव से पहले उठाया गया है, जिससे कूटनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
विस्तार
भारत द्वारा बांग्लादेश में तैनात अपने राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने के फैसले पर अब ढाका की प्रतिक्रिया सामने आई है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार एमडी तौहीद हुसैन ने साफ कहा है कि भारत के इस कदम की कोई ठोस वजह नहीं है, क्योंकि बांग्लादेश में ऐसा कोई सुरक्षा हालात नहीं हैं जो विदेशी राजनयिकों या उनके परिवारों के लिए खतरा पैदा करते हों।
क्या है पूरा मामला?
पिछले सप्ताह भारत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को स्वदेश बुलाने का निर्णय लिया था। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं और देश में कुछ कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। भारत के इस कदम को लेकर ढाका में राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
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यह भारत का आंतरिक फैसला
- ढाका में मीडिया को संबोधित करते हुए एमडी तौहीद हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश में विदेशी राजनयिकों के लिए कोई सुरक्षा खतरा नहीं है।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ओर से इस मुद्दे पर बांग्लादेश सरकार को कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई।
- तौहीद हुसैन ने कहा कि भारतीय राजनयिकों के परिवारों को बुलाना भारत का आंतरिक फैसला है।
- उन्होंने जोड़ा कि भारत अपने अधिकारियों या उनके परिवारों को कभी भी वापस बुलाने के लिए स्वतंत्र है।
सुरक्षा हालात पर बांग्लादेश का रुख
विदेश मामलों के सलाहकार ने दोहराया कि बांग्लादेश में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य है और विदेशी मिशन पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत को कोई आशंका है या वह कोई संदेश देना चाहता है, तो इसके पीछे उसकी अपनी वजहें हो सकती हैं, लेकिन बांग्लादेश को किसी ठोस खतरे की जानकारी नहीं है।
भारतीय मिशनों का कामकाज जारी
बांग्लादेश में भारत के पांच राजनयिक मिशन ढाका स्थित उच्चायोग सहित खुलना, चट्टोग्राम, राजशाही और सिलहट। सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। विदेश सलाहकार ने बताया कि इन मिशनों की गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा है। हाल ही में ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने गणतंत्र दिवस पर एक आधिकारिक समारोह भी आयोजित किया, जो सामान्य कूटनीतिक कामकाज का संकेत है।
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चुनाव से पहले बढ़ी कूटनीतिक चर्चा
भारत का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश आम चुनाव की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल, चरमपंथी तत्वों की गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को देखते हुए भारत ने एहतियातन यह कदम उठाया हो सकता है। हालांकि बांग्लादेश सरकार लगातार यह दोहरा रही है कि देश में स्थिति नियंत्रण में है।
बांग्लादेश ने स्पष्ट किया है कि अगर भारतीय राजनयिक अपने परिवारों को वापस भेजते हैं, तो उसे इस पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इस बयान ने यह भी साफ कर दिया है कि ढाका इस फैसले को सुरक्षा संकट के रूप में देखने को तैयार नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या भारत और बांग्लादेश के बीच इस मुद्दे पर कोई औपचारिक संवाद होता है या नहीं।
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