इस्राइल: यरुशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद करने का एलान, 12 अधिकारियों पर भी रोक; क्यों लिया गया फैसला?
इस्राइल ने वेस्ट बैंक की इस्राइली बस्तियों को लेकर ब्रिटेन के प्रतिबंधों के जवाब में यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद करने का फैसला किया है। 12 ब्रिटिश अधिकारियों पर भी रोक लगाई गई है।
विस्तार
वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों को लेकर ब्रिटेन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के बाद इस्राइल ने मंगलवार को बड़ा जवाबी कदम उठाया। इस्राइल ने यरुशलम स्थित ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास को बंद करने का एलान किया है। इसके साथ ही 12 ब्रिटिश अधिकारियों के देश में प्रवेश पर रोक लगाने की भी घोषणा की गई है।
इस्राइल का यह फैसला ब्रिटेन की ओर से वेस्ट बैंक में फलस्तीनियों के खिलाफ इस्राइली बस्तियों के निवासियों की हिंसा को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद आया है। ब्रिटेन ने इन प्रतिबंधों को लेकर पश्चिमी देशों की अगुवाई में अहम भूमिका निभाई थी।
गिदोन सार ने ब्रिटेन पर क्या आरोप लगाए?
इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड के बयान पर कड़ी नाराजगी जताई। सार ने ब्रिटिश विदेश मंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों को ‘बेतुका झूठ’ बताया। उन्होंने ब्रिटेन के इस कदम को नैतिक रूप से गलत बताते हुए इसे एक संप्रभु देश के आंतरिक मामलों और उसकी चुनावी प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप करार दिया। सार ने बताया कि पूर्वी यरुशलम स्थित ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास को बंद किया जाएगा। यह दूतावास वेस्ट बैंक में फलस्तीनी प्राधिकरण से जुड़ा हुआ है।
12 ब्रिटिश अधिकारियों पर भी क्यों लगी रोक?
इस्राइल ने केवल वाणिज्य दूतावास बंद करने तक ही अपना जवाब सीमित नहीं रखा। विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि ब्रिटेन अब गाजा के लिए अमेरिका की अगुवाई वाले समन्वय मिशन में हिस्सा नहीं ले सकेगा। इसके अलावा 12 ब्रिटिश अधिकारियों के इस्राइल में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने का एलान किया गया है।
एड मिलिबैंड ने इस्राइल पर क्या कहा था?
ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों से जुड़े लोगों को 'सेटलर आतंकवादी' बताते हुए उन पर फलस्तीन में जातीय सफाए का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार वेस्ट बैंक पर इस्राइल के कब्जे को पूरी तरह गैरकानूनी मानेगी। मिलिबैंड ने इसे वहां पीड़ित लोगों के लिए जरूरी कदम बताया और कहा कि यह न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की शुरुआत होनी चाहिए।
ब्रिटेन की ओर से घोषित प्रतिबंधों में वेस्ट बैंक की बस्तियों से आने वाले सभी सामान के आयात पर रोक और वहां सेवाएं देने वाली कंपनियों पर पाबंदियां शामिल हैं। मिलिबैंड ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ब्रिटिश जनता कब्जे का समर्थन करने के लिए अपनी दुकानों और सुपरमार्केट में बस्तियों के उत्पाद देखना चाहती है। उन्होंने फलस्तीन में सामने आए घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मौजूदगी में हुई स्थिति पर गहरी शर्मिंदगी भी जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि ब्रिटेन दो-राष्ट्र समाधान के विनाश को स्वीकार नहीं करेगा।
चुनाव से पहले इस्राइल के इस कदम के क्या मायने?
इस्राइल का यह फैसला 27 अक्तूबर को होने वाले चुनाव से एक महीने से कुछ अधिक समय पहले आया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चुनाव प्रचार के दौरान वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों के समर्थन को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं।
अमेरिका ने ब्रिटेन के प्रतिबंधों पर क्या रुख अपनाया?
अमेरिका ने ब्रिटेन के कदम का साथ देने से इनकार किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका फलस्तीनी क्षेत्र में बस्तियों को लेकर इस्राइल पर ब्रिटेन की तरह प्रतिबंध नहीं लगाएगा। रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका इस्राइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में ऐसी किसी भी स्थिति को नहीं देखना चाहता, जिससे वहां अस्थिरता पैदा हो।