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अमेरिका पहले विश्व युद्ध के लिए मजबूर क्यों हुआ था?

Sun, 11 Nov 2018 02:10 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Sun, 11 Nov 2018 02:10 PM IST
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why America was compelled to participate in first world war?
बुड्रो विल्सन

अमेरिका पहले विश्व युद्ध में 6 अप्रैल 1917 को शामिल हुआ, लेकिन युद्ध का रास्ता दो महीने पहले तय हो चुका था। तब जर्मन सरकार ने ब्रिटिश द्वीपों के चारों ओर तटीय जल पर गैर-प्रतिबंधित पनडुब्बी हमलों की युद्ध नीति को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया था। दूसरे शब्दों में कहें तो वो समुद्रमार्ग से गुजरने वाले हर जहाज पर हमला करने की नीति पर लौट आने वाले थे जिसमें अमेरिकी जहाज भी शामिल थे।

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तटस्थ रहने की अमेरिकी नीति

अमेरिका के राष्ट्रपति वूड्रो विल्सन विपक्ष के घोर विरोध के बावजूद ढाई साल तक अपने देश को यूरोपीय संघर्ष से दूर रखने के लिए नाज़ुक राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में कामयाब रहे थे। विल्सन एक धीर गंभीर बुद्धिजीवी थे, वो प्रेस्बिटेरियन स्कॉट के वशंज थे। अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान उनके बचपन के अनुभव बेहद कड़वे थे, यही वजह थी कि वो देश को 1914 में शुरू हुए यूरोपीय संघर्ष से दूर रखना चाहते थे।

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ये एक ऐसी लड़ाई थी जिसका असर और मकसद उन्होंने देखा था। उनके विचार में इसमें हिस्सा लेने से अमरीकी विदेश नीति को कोई फायदा नहीं था। तटस्थ रहना विल्सन का आदर्श वाक्य था, और इसी धुरी के आधार पर वो यूरोपीय देशों से व्यवहार कर रहे थे।

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थियोडेर रूजवेल्ट समेत कई आलोचकों की नजर में वो 'सोच और कार्यवाही' दोनों में तटस्थ बन गए थे।

why America was compelled to participate in first world war?
प्रथम विष्व युद्ध में अमेरिका

'ये हमें युद्ध से दूर रखेगा'
बेहद उकासावे के माहौल के बावजूद युद्ध के शुरुआती सालों में विल्सन अपनी तटस्थता की नीति पर कायम रहे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मई 1915 में देखा गया, जब दक्षिणी आयरलैंड के तट पर एक जर्मन पनडुब्बी ने आरएमएस ल्यूसतानिया नाम के ब्रिटिश यात्री जहाज को नष्ट कर दिया था। इसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे, जिनमें 128 अमेरिकी शामिल थे।

सितंबर 1915 में मामले में हस्तक्षेप के लिए आंतरिक विरोध बढ़ रहा था, जब विल्सन ने जर्मनी को आदेश दिया कि बिना चेतावनी के जहाजों को ना डुबाया जाए। इस तरह से विल्सन ने सावधानी के साथ सतर्कता बरकरार रखी। यहां तक कि उसके बाद वाले सालों में भी उनके चुनावी अभियान का यही नारा था 'उन्होंने हमें यु्द्ध से बाहर रखा।'

मुश्किल से ही सही लेकिन वो चुनाव जीते। 31 जनवरी 1917 में जब यूरोप में संघर्ष खत्म हुआ तब उन्होंने सीनेट में एक भाषण के दौरान कानूनविदों से दोनों देशों के बीच 'शांति की नींव' बनाए रखने के लिए मदद की अपील की थी। लेकिन विल्सन को अचानक अपने विचार बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

why America was compelled to participate in first world war?
प्रथम विश्व युद्ध में अमेरिकी सेना

वो एक चिट्ठी और एक टेलीग्राम
सीनेट में अपने भाषण के एक हफ्ते बाद वाशिंगटन डीसी में जर्मनी के राजदूत योहेन हैनरिक फॉन बर्नस्ट्रॉफ ने अमेरिका के विदेश मंत्री रॉबर्ट लेंसिंग को बुलाया। फॉन बर्नस्ट्रॉफ के पास एक चिट्ठी थी जिसमें जर्मनी ने समुद्री रास्ते में पनडुब्बी हमले की अपनी नीति को बहाल करने की घोषणा की थी।

बस यहीं से अमेरिका के युद्ध में शमिल होने की उलटी गिनती शुरू हुई। पहला कूटनीतिक संबध टूट गया था। अगला निशाना था वो बीच का बिंदु जिसे विल्सन 'सशस्त्र तटस्थता' कहते थे। क्योंकि बात यहीं खत्म नहीं हुई।

जर्मनी के विदेश मामलों के मंत्री आर्थर सिमरमन की ओर से एक टेलीग्राम मेक्सिको भेजा गया था जो प्रेस में लीक हो गया था और लोगों के आक्रोश की वजह बन गया था।जर्मनी दूतावास के जरिए मेक्सिको को सिमरमन ने एक प्रस्ताव दिया था जिसमें साफ संदेश लिखा था 'चलो एकसाथ मिलकर युद्ध करते हैं, चलो एकसाथ मिलकर शांति बनाते हैं.'

दरअसल इसके जरिए जर्मनी ने मेक्सिको को अमेरिका के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के लिए आर्थिक मदद की पेशकश की थी और टेक्सस, एरीजोना और न्यू मेक्सिको की सरहदों को दोबारा वापस पाने के लिए कहा था, जिन्हें 19वीं सदी में ताकतवर उत्तर के पड़ोसियों ने जीत लिया था।

क्योंकि ब्रितानी सरकार ने अमेरिका को चेतावनी देने वाला टेलीग्राम बीच में ही रोक दिया था तो कुछ लोगों को लगा कि ये संदेश मित्र राष्ट्रों ने विल्सन के तटस्थ रहने के कदम को खत्म करने के लिए दिया गया है।

हालांकि 29 मार्च को सिमरमन ने एक भाषण के दौरान कहा था कि वो इस मामले में अपनी भागीदारी स्वीकारते हैं और अमेरिका के 'शत्रुता भरे व्यवहार' को देखते हुए ये न्यायोचित भी है।

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प्रथम विश्व युद्ध में अमेरिकी सेना

एक 'अनिवार्य' कदम
2 अप्रैल को विल्सन ने संसद से कहा कि वो एक बेहद गंभीर और दुखद कदम उठा रहे हैं, उन्होंने संसद से कहा वो जर्मनी की इस कार्रवाई को अमरीकी सरकार और जनता के खिलाफ युद्ध की घोषणा को तौर पर लें।

सशस्त्र तटस्थता बेअसर साबित हो चुकी थी, क्योंकि इसके चलते जर्मन पनडुब्बी हमलों से जहाजों की रक्षा के लिए तैनाती असंभव थी। विल्सन ने कहा 'हम जर्मनी के लोगों के खिलाफ नहीं हैं। उनके लिए हमारे मन में सिर्फ सहानुभूति और मित्रता का भाव है। लोकतंत्र के वजूद के लिए दुनिया को सुरक्षित होना होगा।'

तब 16 अप्रैल 1917 को राष्ट्रपति ने आधिकारिक बयान पर हस्ताक्षर किए थे। इसी के साथ अमेरिका पहले विश्व युद्ध में शामिल हो गया था।

पेट्रिक ग्रेगरी 'एन अमेरिकन ऑन द वेस्टर्न फ्रंटद फर्स्ट वर्ल्ड वॉर लेटर्स ऑफ आर्थर क्लिफर्ड 1917-18' किताब के सह लेखक हैं, जो 2016 में द हिस्ट्री प्रेस ने प्रकाशित की थी।

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