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Pope Francis: जानिए कौन थे पोप फ्रांसिस, जिनके निधन से शोक में डूबे डेढ़ अरब कैथोलिक ईसाई

Mon, 21 Apr 2025 02:28 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वेटिकन Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 21 Apr 2025 02:28 PM IST
सार

साल 2013 में जब पोप फ्रांसिस ईसाईयों के सबसे बड़े धर्मगुरु बने तो उन्होंने अपने कार्यकाल में वेटिकन की नौकरशाही में बड़े बदलाव किए और उसे पुनर्गठित किया। साथ ही वेटिकन के प्रशासन में पार्दर्शिता लेकर आए।

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पोप फ्रांसिस - फोटो : पीटीआई

विस्तार

ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरू पोप फ्रांसिस का निधन हो गया है। वह 88 साल के थे और बीते दिनों गंभीर रूप से बीमार हुए थे और हाल ही में अस्पताल से डिस्चार्ज हुए थे। वेटिकन ने सोमवार को पोप फ्रांसिस के निधन की सूचना जारी की। पोप फ्रांसिस पहले लैटिन अमेरिकी धर्मगुरू थे, जो पोप के पद पर पहुंचे। उन्हें साल 2013 में पोप की उपाधि मिली थी। बतौर पोप अपने 12 साल के कार्यकाल में पोप फ्रांसिस ने वेटिकन सिटी में कई अहम प्रशासनिक बदलाव किए। 
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कौन थे पोप फ्रांसिस
पोप फ्रांसिस का जन्म 17 दिसंबर 1936 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुआ था। उनका नाम जोर्गे मारियो बर्गोलियो था। पोप की उपाधि पाने वाले पोप फ्रांसिस पहले जेसुइट थे। धर्म की राह पर आने से पहले जोर्गे मारियो बर्गोलियो ने बतौर केमिकल टेक्निशियन अपने करियर का शुरुआत की और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में लंबे समय तक काम किया। इसी दौरान उनका धर्म की तरफ झुकाव बढ़ा और वे चर्च से जुड़ गए। जब पोप 21 साल के थे, तो वे न्यूमोनिया से पीड़ित हो गए, इसके चलते उनके फेफड़े का एक हिस्सा भी निकालना पड़ा। साल 1958 में वे ईसाई धर्म की एक परंपरा जेसुइट से जुड़ गए और धार्मिक शिक्षा देना शुरू कर दिया। साल 1969 में वे पादरी बने। 
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समलैंगिक जोड़ों को आशीर्वाद देने की शुरू की परंपरा
पोप फ्रांसिस साल 1992 में वे ब्यूनस आयर्स में ऑक्सीलरी बिशप नियुक्त हुए। साल 1998 में वे आर्कबिशप बने और साल 2001 में कार्डिनल की उपाधि से नवाजे गए। साल 2013 में जब बेनेडिक्ट 16वें पोप पद से हटे तो पोप फ्रांसिस को उनकी जगह पोप बनाया गया। साल 2013 में जब पोप फ्रांसिस ईसाईयों के सबसे बड़े धर्मगुरु बने तो उन्होंने अपने कार्यकाल में वेटिकन की नौकरशाही में बड़े बदलाव किए और उसे पुनर्गठित किया। साथ ही वेटिकन के प्रशासन में पार्दर्शिता लेकर आए। पोप फ्रांसिस ने बतौर पोप चार बड़े धार्मिक दस्तावेज लिखे, 65 देशों का दौरा किया और 900 से ज्यादा संत बनाए। पोप फ्रांसिस ने पादरियों को समलैंगिक जोड़ों को आशीर्वाद देने की मंजूरी दी, साथ ही वेटिकन में महिलाओं की अहम पदों पर नियुक्ति की। पोप फ्रांसिस ने आध्यात्मिक नवीनीकरण और गरीबों के कल्याण पर जोर दिया। उन्होंने चर्च की नीति में मदद के लिए आठ कार्डिनल्स की एक परिषद बनाने का अभूतपूर्व कदम उठाया। 

एक दिन पहले ही ईस्टर पर लोगों से की थी मुलाकात
पोप फ्रांसिस ने अपने निधन से एक दिन पहले ही ईस्टर के मौके पर वेटिकन में श्रद्धालुओं से मुलाकात की थी। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद पहली बार पोप फ्रांसिस लोगों से मिले थे। इस दौरान पोप फ्रांसिस ने लोगों को ईस्टर की शुभकामनाएं भी दी थीं। पोप फ्रांसिस ने ईस्टर के मौके पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से भी मुलाकात की थी। 
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