Pakistan: कौन है पाकिस्तान की 'इंपोर्टेड गवर्नमेंट' और 'टोला', इमरान खान यह बोल कर किसे लेते हैं निशाने पर?
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विस्तार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के हालात पर अपनी सरकार को यह कह कर लिया यहां 'इंपोर्टेड गवर्नमेंट' है। यानी पाकिस्तान की सत्ता पाकिस्तान के हुक्मरान नहीं, बल्कि कोई बाहर से ही चला रहा है। यही नहीं पाकिस्तान में लगातार इमरान खान एक 'टोले' की बात करते आए हैं। और तो और कुछ दिन पहले जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भारत आए, तब भी इमरान खान की पार्टी के नेताओं ने पाकिस्तान में बिलावल को यह कहकर निशाने पर लिया कि वह इंपोर्टेड सरकार और विदेशी मंसूबों को पूरा करने के लिए बाहर जा रहे हैं। तो ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि आखिर इमरान खान अपने मुल्क में चल रही सरकार को किसके इशारे पर चलने वाली सरकार घोषित कर रहे हैं।
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विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि इमरान खान कभी पाकिस्तान में चलने वाली सरकार को अमेरिका के इशारे पर चलने वाली सरकार कह चुके हैं। जबकि कई बार बार चीन को भी पाकिस्तान में बहुत दखलअंदाजी करने के लिए सेना और नेताओं को आड़े हाथों लेते रहे हैं। भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि इमरान खान का कोई भी विदेशी मामलों का पॉलिटिकल स्टैंड नहीं है। वह कभी तो चीन के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए बीजिंग पहुंच जाते हैं, तो कभी रूस के साथ मजबूत रिश्ते को बनाने के लिए पुतिन से मिलते हैं। जब पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार गिर जाती है, तो वह सड़कों पर चिल्ला-चिल्ला कर इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हैं। इसलिए इमरान खान जब यह बार-बार कहते हैं कि पाकिस्तान में एक 'टोला' है और 'इंपोर्टेड सरकार' है, तो वह इशारों-इशारों में अमेरिका को भी निशाने पर लेते हैं और चीन को भी निशाने पर लेते हैं। 'टोले' का जिक्र कर इमरान खान अपने देश के हुक्मरानों सेना समेत खुफिया एजेंसियों के लोगों को लेकर निशाना साधते रहते हैं।
विदेशी मामलों के जानकार अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि पाकिस्तान की हालत इस वक्त दुनिया के सबसे फकीर और बदहाल देशों में हो रही है। इसलिए दुनिया का हर मुल्क पाकिस्तान का अपने-अपने लिहाज से इस्तेमाल कर रहा है। वह कहते हैं कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान के दिखावे वाले लोकतंत्र के बीच में है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान में लोकतंत्र है यह दिखाने के लिए सरकार तो रहती है, लेकिन पूरा होल्ड पाकिस्तान की सेना और इंटेलिजेंस एजेंसी का ही होता है। ऐसे में सेना अपने लिहाज से ही पाकिस्तान को चलाती है। विदेशी मामलों के जानकार बताते हैं कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जब पिछले साल अप्रैल में सत्ता से हटाया गया था, तो इमरान खान ने सड़क पर चिल्लाना शुरू किया था कि उनको सत्ता से हटाने में अमेरिका का हाथ है। अपनी रैलियों से लेकर बड़े-बड़े कार्यक्रमों में भी कुछ सबूत होने का दावा करते थे कि अमेरिका के कहने पर ही उनको प्रधानमंत्री के पद से हटाया गया है।
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वरिष्ठ राजनयिक और विदेशी मामलों के जानकार आरएन पुरी कहते हैं कि जिस तरीके से इमरान खान शहबाज शरीफ की सरकार को अमेरिका की ओर से आयातित सरकार बताते हैं, उसे शहबाज शरीफ खारिज करते हैं। इमरान खान के इन दावों को तो अमेरिका ने भी नकार दिया था और यह कहकर पाकिस्तान पर हमला किया था कि यह उनका आंतरिक मामला है। अब एक बार जब फिर इमरान खान की पाकिस्तान में गिरफ्तारी हुई है, तो पूर्व प्रधानमंत्री चिल्ला चिल्ला कर इंपोर्टेड गवर्नमेंट और टोलों की बात कर रहे हैं।
वह इस पूरे मामले में विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि इमरान खान की पार्टी के नेता लगातार इस बात को लेकर बयान देते रहे हैं कि इमरान खान की पहले हुई गिरफ्तारी में चीन का हाथ था। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से चीन पाकिस्तान में अपना पैसा लगाकर पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से को अपने कब्जे में करके अपना फायदा देख रहा है, उसे लेकर पाकिस्तान के नेताओं और सेना में अंदरूनी टकराव उभरता रहा है। पाकिस्तान की सेना लगातार चीन को सपोर्ट करके पाकिस्तान से गुजरने वाले आर्थिक गलियारे को मदद करती रही है। इसी दौर में इमरान खान की हुई एक गिरफ्तारी में उनकी पार्टी के नेताओं ने चीन के ऊपर अपनी गिरफ्तारी का आरोप लगाया था।
दिल्ली विश्वविद्यालय में विदेशी मामलों के जानकार और सहायक प्रोफेसर अभिषेक सिंह कहते हैं कि जब से इमरान खान को सत्ता से बेदखल किया गया है तब से वह चीन को अपना दुश्मन मानने लगे हैं। यही वजह है कि जब इमरान खान अपनी गिरफ्तारी के दौरान इंपोर्टेड सरकार और टोले का जिक्र करते हैं, तो उसमें चीन की सरकार को पाकिस्तान में बहुत दखल देने वाली सरकार मानते हैं। जबकि पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों को टोले में गिनते हैं। वह कहते हैं कि इमरान खान ने जब अमेरिका को यह कहकर निशाने पर लिया था कि उनके कहने पर पाकिस्तान की सत्ता से उनको बेदखल किया गया, तो अमेरिका ने इस पर न सिर्फ आपत्ति दर्ज की, बल्कि पाकिस्तान की मिलने वाली कई वित्तीय मदद को भी रोक दिया था।
अभिषेक कहते हैं कि इसमें कहीं पर से कोई शक नहीं है कि पाकिस्तान इस वक्त अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। पाकिस्तान के ऊपर चीन और अमेरिका अपने अपने हिसाब से उसे देख रहा है। वरिष्ठ राजनयिक अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि पाकिस्तान अमेरिका और चीन दोनों देशों के सामने हाथ फैलाए खड़ा रहता है। विदेशी मदद के नाम पर अमेरिका जहां उसको मदद के बहाने अफगानिस्तान समेत आसपास की स्थिति पर नजर बनाए रहता है। वही चीन पाकिस्तान में निवेश करके ना सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है, बल्कि पाकिस्तान को कर्जे में डुबोता रहता है। अमरेंद्र कठुआ कहते हैं कि रही बात इमरान खान की गिरफ्तारी की, तो इस वक्त पाकिस्तान में सेना और आईएसआई मिलकर सत्ता चला रहे हैं। इमरान लगातार दोनों पर सवालिया निशान उठा रहे थे। इसलिए उनकी गिरफ्तारी तो होनी तय थी।