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एवरग्रैंड: क्या है चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी का संकट, जिससे दुनिया के 500 बड़े अमीरों के 10 लाख करोड़ एक दिन में डूबे
Wed, 22 Sep 2021 10:51 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 22 Sep 2021 10:51 AM IST
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एवरग्रैंड कंपनी के संकट में आने के बाद हजारों की संख्या में लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। इस बीच कंपनी के हेडक्वार्टर की सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मियों को बुलाया गया है।
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विस्तार
भारत में सोमवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। यह गिरावट सिर्फ सेंसेक्स या निफ्टी तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि अमेरिका के डाउ जोन्स, वॉल स्ट्रीट से लेकर जापान के निक्केई तक लाल निशान पर बंद हुए। आगे भी शेयर बाजारों के गिरने का खतरा बना हुआ है। इसकी दो मुख्य वजहें सामने आईं। पहली और प्रमुख वजह रही चीन की सबसे बड़ी और जबरदस्त कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी एवरग्रैंड को लेकर पैदा हुआ संकट। इसने दुनियाभर में कारोबारी माहौल को चिंता में डाल दिया। दूसरी वजह रही अमेरिका की वित्त मंत्री जैनेट येलेन की वह चेतावनी, जिसमें उन्होंने बेतहाशा बढ़ते कर्ज को लेकर आर्थिक तबाही की चेतावनी दी और संसद से इन कर्जों पर सीमा लगाने की अपील की।क्या है एवरग्रैंड और क्यों आया इस कंपनी पर संकट?
दुनियाभर के शेयर बाजारों को एवरग्रैंड संकट को लेकर हाई अलर्ट पर रखा गया है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर एवरग्रैंड कंपनी क्या है? बताया जाता है कि एवरग्रैंड की शुरुआत 1996 में एक बोतलबंद पानी बेचने की कंपनी के तौर पर हुई थी। इस कंपनी ने रियल एस्टेट में उतरने के साथ ही मध्यमवर्गीयों के लिए जबरदस्त स्कीम्स उतारीं और इतने सालों में चीन के रियल एस्टेट मार्केट की अग्रणी कंपनी बन गई।
मौजूदा समय में एवरग्रैंड चीन के पूरे रियल एस्टेट बिजनेस का दो फीसदी हिस्सा नियंत्रित करती है। एवरग्रैंड के पास चीन के 280 शहरों में 1300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स हैं। यह चीन की एक प्रोफेशनल फुटबॉल टीम ग्वांगझू फुटबॉल क्लब पर भी मालिकाना हक रखती है।
मौजूदा समय में एवरग्रैंड चीन के पूरे रियल एस्टेट बिजनेस का दो फीसदी हिस्सा नियंत्रित करती है। एवरग्रैंड के पास चीन के 280 शहरों में 1300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स हैं। यह चीन की एक प्रोफेशनल फुटबॉल टीम ग्वांगझू फुटबॉल क्लब पर भी मालिकाना हक रखती है।
एवरग्रैंड ने रियल एस्टेट मार्केट में मध्यमवर्ग के बीच अच्छी पहचान बनाई। हालांकि, जबरदस्त ग्रोथ के दौरान कंपनी पर 300 अरब डॉलर (करीब 22 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का कर्ज हो गया। इसी साल चीन ने जब अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल एजुकेशन जैसे सेक्टरों पर पाबंदियां लगाईं, तब रियल एस्टेट सेक्टर में भी यह डर फैल गया कि चीन कर्ज को सीमित करने के लिए इस पर एक सीलिंग तय कर सकता है। पिछले साल भी चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने रियल एस्टेट मालिकों के लिए नियम बनाए थे, जिसके तहत उन्हें मिलने वाले कर्ज पर नियंत्रण लगाया जाना तय किया गया।
इसी डर के माहौल के बीच एवरग्रैंड ने अपने कारोबार को बेचना शुरू कर दिया। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से चीन के प्रॉपर्टी मार्केट में छाई सुस्ती के चलते कंपनी को अपनी संपत्तियां बड़ी छूट के साथ बेचनी पड़ीं। इससे कंपनी रकम जुटाने में तो सफल हुई, लेकिन 22 लाख करोड़ रुपए का कर्ज चुकाना तो दूर, कंपनी को इस कर्ज पर पैदा हुए 8.4 करोड़ डॉलर (करीब 618 करोड़ रुपये) के ब्याज को चुकाने में भी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। जुटाई गई रकम अब तक सिर्फ कंपनी के बिजनेस को चलाते रखने के काम आई है।
अब एवरग्रैंड के सामने क्या-क्या चुनौतियां?
एवरग्रैंड के सामने अब सबसे बड़ी चिंता कर्ज पर लगे इसी ब्याज को चुकाने की है। इस हफ्ते से कंपनी ने अपने वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस के निवेशकों को उनकी राशि लौटाना शुरू कर दिया। लेकिन धनराशि न जुटा पाने की वजह से उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अगर एवरग्रैंड डूबती है, तो इससे जुड़े लोगों और कंपनियों के लिए पांच बड़ी समस्या होंगी...
1. एवरग्रैंड की इमारतों के बनने से पहले ही बड़ी संख्या में लोगों ने कंपनी से प्रॉपर्टी खरीदना शुरू कर दिया था। फिलहाल कंपनी की 800 रिहायशी इमारतों का काम अधूरा है। यानी अगर एवरग्रैंड डूबती है, तो उन हजारों लोगों का पैसा भी डूब जाएगा, जिन्होंने प्रॉपर्टी खरीदने में रकम लगाई।
2. इसके अलावा चीन और दुनियाभर में कई कंपनियां हैं, जो एवरग्रैंड के साथ व्यापार करती हैं। इनमें निर्माण क्षेत्र और डिजाइनिंग से जुड़ी फर्म और मैटेरियल की सप्लाई करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। एवरग्रैंड के डूबने की वजह से इससे जुड़ी कंपनियों के लिए भी भारी मुसीबत पैदा होगी। यहां तक कि कुछ कंपनियों के दिवालिया होने तक की नौबत आ जाएगी।
2. इसके अलावा चीन और दुनियाभर में कई कंपनियां हैं, जो एवरग्रैंड के साथ व्यापार करती हैं। इनमें निर्माण क्षेत्र और डिजाइनिंग से जुड़ी फर्म और मैटेरियल की सप्लाई करने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। एवरग्रैंड के डूबने की वजह से इससे जुड़ी कंपनियों के लिए भी भारी मुसीबत पैदा होगी। यहां तक कि कुछ कंपनियों के दिवालिया होने तक की नौबत आ जाएगी।
3. एवरग्रैंड के डूबने का असर कंपनी में काम कर रहे लोगों पर पड़ेगा, जिनकी नौकरी चली जाएगी। इससे चीन में बेरोजगारी संकट बढ़ने का खतरा है। एवरग्रैंड ने रकम न जुटा पाने की वजह से अपने कुछ कर्मचारियों को भी पेमेंट नहीं किया है। यानी चीन में हर तरफ हंगामा मचने की आशंका जताई जा रही है।
4. एवरग्रैंड जैसी बड़ी कंपनी के डूबने का सबसे बड़ा असर चीन के आर्थिक सिस्टम पर पड़ेगा। दरअसल, इस कंपनी ने 171 घरेलू बैंकों और 121 वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लिया है। अगर एवरग्रैंड ब्याज नहीं चुका पाती है तो बैंक और बाकी कर्जदाता इसे आगे कम ब्याज देंगे। इस स्थिति में क्रेडिट क्रंच होने की संभावना सबसे ज्यादा है। यह ऐसी स्थिति है जब कंपनी वहन करने लायक दरों पर कर्ज ले सकती है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह काफी खराब संकेत होंगे, क्योंकि जिन कंपनियों को कर्ज में मुश्किल आती है, उनके आगे बढ़ने के मौके कम होते हैं। यहां तक कि उनके बंद होने की भी नौबत आ जाती है।
4. एवरग्रैंड जैसी बड़ी कंपनी के डूबने का सबसे बड़ा असर चीन के आर्थिक सिस्टम पर पड़ेगा। दरअसल, इस कंपनी ने 171 घरेलू बैंकों और 121 वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लिया है। अगर एवरग्रैंड ब्याज नहीं चुका पाती है तो बैंक और बाकी कर्जदाता इसे आगे कम ब्याज देंगे। इस स्थिति में क्रेडिट क्रंच होने की संभावना सबसे ज्यादा है। यह ऐसी स्थिति है जब कंपनी वहन करने लायक दरों पर कर्ज ले सकती है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह काफी खराब संकेत होंगे, क्योंकि जिन कंपनियों को कर्ज में मुश्किल आती है, उनके आगे बढ़ने के मौके कम होते हैं। यहां तक कि उनके बंद होने की भी नौबत आ जाती है।
5. वैश्विक लेवल पर इसे लेकर चिंता इसलिए जताई जा रही है क्योंकि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अगर एवरग्रैंड जैसी कंपनी डिफॉल्ट करती है तो इससे जुड़ी विदेशी कंपनियों पर भी बड़ा असर पड़ेगा और इसका नुकसान वैश्विक स्तर पर होगा। उधर विदेशी निवेशक भी इसी चिंता में पैसा लगाने के लिए चीन की तरफ देखना बंद कर सकते हैं।
एवरग्रैंड को बचाने के लिए चीन सरकार आगे आ सकती है?
एवरग्रैंड में फिलहाल 2 लाख कर्मचारी काम करते हैं। ये कंपनी चीन में हर साल करीब 38 लाख रोजगार भी पैदा करती है। ऐसे में कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस कंपनी को बचाने में चीन की सरकार आगे आ सकती है। इसकी दो वजहें होंगी...
- रियल एस्टेट कंपनी के डूबने का असर इससे जुड़े कारोबारों और सप्लायरों पर पड़ेगा। यानी पूरी सप्लाई चेन ही बाधित हो जाएगी।
- एवरग्रैंड जैसी कंपनी के डूबने से लाखों लोगों पर संकट होगा। न सिर्फ यहां नौकरी करने वालों पर, बल्कि पैसा लगाने वाली जनता पर भी।
वैश्विक स्तर पर एवरग्रैंड संकट का क्या असर?
एवरग्रैंड पर छाए इस संकट का असर सोमवार को शेयर बाजारों पर देखा गया। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 500 सबसे अमीर लोगों को एक दिन में 135 अरब डॉलर (करीब 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। टेस्ला के मालिक एलन मस्क की नेटवर्थ सबसे ज्यादा 7.2 अरब डॉलर (करीब 53 हजार करोड़ रुपये) और अमेजन के जेफ बेजोस को 5.6 अरब डॉलर (करीब 41 हजार करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ। इसके अलावा एवरग्रैंड के संस्थापक और चेयरमैन हुई का यान की संपत्ति में भी जबरदस्त गिरावट आई है और वह अब 2017 के सबसे ऊंचे 42 अरब डॉलर (करीब 3 लाख करोड़ रुपये) से 7.3 अरब डॉलर (करीब 54 हजार करोड़ रुपये) की नेटवर्थ पर रह गए हैं।