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इस्राइल ने भारत से की मांग: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को घोषित करें आतंकी संगठन, बताया विश्व के लिए खतरा
Mon, 25 May 2026 09:58 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, तेल अवीव
पीटीआई, तेल अवीव
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 25 May 2026 09:58 PM IST
सार
इस्राइल ने भारत से ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की है। इस्राइल इसे दुनिया के लिए बड़ा खतरा मानता है। अमेरिका और कनाडा जैसे देश इसे पहले ही प्रतिबंधित कर चुके हैं। यह संगठन सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता के अधीन काम करता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इस्राइल ने भारत से उम्मीद जताई है कि वह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को एक आतंकवादी संगठन घोषित करे। एक इस्राइली अधिकारी ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि कई देश पहले ही IRGC की गतिविधियों और उसके स्वभाव को पहचान चुके हैं। उन्हें उम्मीद है कि भारत भी जल्द ही ऐसा ही फैसला लेगा।
इस्राइली अधिकारी ने IRGC को स्वतंत्र दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत यह फैसला ले। उनके अनुसार, पूरी दुनिया IRGC के काम करने के तरीके को जानती है। इसके निशान केवल इस क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में देखे जा सकते हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह मुद्दा भारत के सामने रखा गया है, तो उन्होंने कहा कि वे अपने भारतीय समकक्षों के साथ हर मौके पर इस विषय को उठाते हैं। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे देशों के साथ-साथ यूरोपीय संसद ने भी IRGC के खिलाफ कदम उठाए हैं। इन देशों ने इसे आतंकवादी गतिविधियों और उग्रवादी समूहों की मदद करने के कारण प्रतिबंधित किया है।
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IRGC ईरान के सशस्त्र बलों की सबसे शक्तिशाली शाखा है। यह देश की सामान्य सेना से अलग स्वतंत्र रूप से काम करती है। यह सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को रिपोर्ट करती है। इसकी स्थापना 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने की थी। आज यह एक विशाल सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक संस्थान बन चुका है। इसके पास अपनी थल सेना, नौसेना, एयरोस्पेस डिवीजन, खुफिया इकाइयां और विशेष अभियान विंग है।
ये भी पढ़ें: Nepal: सुप्रीम कोर्ट से नेपाल के पूर्व पीएम देउबा और उनकी पत्नी को राहत, धन शोधन मामले में गिरफ्तारी पर रोक
IRGC ही 'बसीज' अर्धसैनिक बल और 'कुद्स फोर्स' की देखरेख करती है। पश्चिमी देशों का आरोप है कि कुद्स फोर्स पश्चिम एशिया में उग्रवादी समूहों को समर्थन देती है। लगभग 1,80,000 से अधिक कर्मियों वाली यह संस्था ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, सीमा सुरक्षा और आंतरिक निगरानी में मुख्य भूमिका निभाती है। मानवाधिकार समूहों और पश्चिमी सरकारों ने IRGC पर ईरान के भीतर विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने का भी आरोप लगाया है। आर्थिक तंगी और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर हुए प्रदर्शनों को दबाना इस संगठन के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।
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इस्राइली अधिकारी ने IRGC को स्वतंत्र दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत यह फैसला ले। उनके अनुसार, पूरी दुनिया IRGC के काम करने के तरीके को जानती है। इसके निशान केवल इस क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में देखे जा सकते हैं।
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जब उनसे पूछा गया कि क्या यह मुद्दा भारत के सामने रखा गया है, तो उन्होंने कहा कि वे अपने भारतीय समकक्षों के साथ हर मौके पर इस विषय को उठाते हैं। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे देशों के साथ-साथ यूरोपीय संसद ने भी IRGC के खिलाफ कदम उठाए हैं। इन देशों ने इसे आतंकवादी गतिविधियों और उग्रवादी समूहों की मदद करने के कारण प्रतिबंधित किया है।
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IRGC ईरान के सशस्त्र बलों की सबसे शक्तिशाली शाखा है। यह देश की सामान्य सेना से अलग स्वतंत्र रूप से काम करती है। यह सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को रिपोर्ट करती है। इसकी स्थापना 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने की थी। आज यह एक विशाल सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक संस्थान बन चुका है। इसके पास अपनी थल सेना, नौसेना, एयरोस्पेस डिवीजन, खुफिया इकाइयां और विशेष अभियान विंग है।
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IRGC ही 'बसीज' अर्धसैनिक बल और 'कुद्स फोर्स' की देखरेख करती है। पश्चिमी देशों का आरोप है कि कुद्स फोर्स पश्चिम एशिया में उग्रवादी समूहों को समर्थन देती है। लगभग 1,80,000 से अधिक कर्मियों वाली यह संस्था ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, सीमा सुरक्षा और आंतरिक निगरानी में मुख्य भूमिका निभाती है। मानवाधिकार समूहों और पश्चिमी सरकारों ने IRGC पर ईरान के भीतर विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने का भी आरोप लगाया है। आर्थिक तंगी और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर हुए प्रदर्शनों को दबाना इस संगठन के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।