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Nepal: सुप्रीम कोर्ट से नेपाल के पूर्व पीएम देउबा और उनकी पत्नी को राहत, धन शोधन मामले में गिरफ्तारी पर रोक
Mon, 25 May 2026 08:34 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, काठमांडू
पीटीआई, काठमांडू
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 25 May 2026 08:34 PM IST
सार
नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। धन शोधन मामले में जारी वारंट की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया है।
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नेपाल के पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा
- फोटो : IANS
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विस्तार
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने धन शोधन के एक मामले में उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति महेश शर्मा पौडेल और नित्यानंद पांडे की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए काठमांडू जिला अदालत के फैसले पर सवाल उठाए।
काठमांडू जिला अदालत ने 6 अप्रैल को देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। यह दंपति 26 फरवरी से ही इलाज के लिए विदेश में था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि वारंट जारी करने में कानूनी प्रक्रिया का सही पालन नहीं हुआ। आरजू राणा देउबा नेपाल की पूर्व विदेश मंत्री भी रह चुकी हैं।
इस मामले के पीछे पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों का संदर्भ है। पिछले साल 8 और 9 सितंबर को काठमांडू में 'जेन-जी' समूह ने सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कुल 76 लोगों की मौत हुई थी। प्रदर्शन के पहले ही दिन पुलिस की फायरिंग में 19 लोग मारे गए थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने देउबा के घर पर हमला कर दिया था। इस हमले में देउबा और उनकी पत्नी को चोटें आई थीं।
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ये भी पढ़ें: CISF: डीजी प्रवीर रंजन ने किया एआईजी जय प्रकाश आजाद की किताब 'होगी जय..हे पुरुषोत्तम नवीन!' का विमोचन
हमले के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो में प्रदर्शनकारी बड़ी मात्रा में नेपाली और अमेरिकी डॉलर जलाते हुए नजर आए थे। धन शोधन विभाग ने इस मामले की जांच शुरू की और जले हुए नोटों की राख के आधार पर एक फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार की। इसी आधार पर कार्रवाई की कोशिश हो रही थी।
नेपाल पुलिस ने इस मामले में देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए इंटरपोल से भी संपर्क किया था। हालांकि, इंटरपोल ने पुलिस की इस मांग को ठुकरा दिया। इंटरपोल का कहना था कि पुलिस ने जो दस्तावेज दिए हैं, वे कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अधिकारियों को निर्देश मिला है कि वे इस दंपति को गिरफ्तार न करें।
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काठमांडू जिला अदालत ने 6 अप्रैल को देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। यह दंपति 26 फरवरी से ही इलाज के लिए विदेश में था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि वारंट जारी करने में कानूनी प्रक्रिया का सही पालन नहीं हुआ। आरजू राणा देउबा नेपाल की पूर्व विदेश मंत्री भी रह चुकी हैं।
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इस मामले के पीछे पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों का संदर्भ है। पिछले साल 8 और 9 सितंबर को काठमांडू में 'जेन-जी' समूह ने सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कुल 76 लोगों की मौत हुई थी। प्रदर्शन के पहले ही दिन पुलिस की फायरिंग में 19 लोग मारे गए थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने देउबा के घर पर हमला कर दिया था। इस हमले में देउबा और उनकी पत्नी को चोटें आई थीं।
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हमले के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो में प्रदर्शनकारी बड़ी मात्रा में नेपाली और अमेरिकी डॉलर जलाते हुए नजर आए थे। धन शोधन विभाग ने इस मामले की जांच शुरू की और जले हुए नोटों की राख के आधार पर एक फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार की। इसी आधार पर कार्रवाई की कोशिश हो रही थी।
नेपाल पुलिस ने इस मामले में देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए इंटरपोल से भी संपर्क किया था। हालांकि, इंटरपोल ने पुलिस की इस मांग को ठुकरा दिया। इंटरपोल का कहना था कि पुलिस ने जो दस्तावेज दिए हैं, वे कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अधिकारियों को निर्देश मिला है कि वे इस दंपति को गिरफ्तार न करें।