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पश्चिम एशिया तनाव: यूएस के हमले में ईरानी नावें तबाह; हूती लड़ाकों के हमलों के बीच सऊदी-मिस्र की नजदीकी बढ़ी

Wed, 16 Sep 2026 02:48 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 16 Sep 2026 02:48 AM IST
सार

अमेरिका ने दो ईरानी नावों को तबाह करने का दावा किया है, जबकि ईरान ने इस घटना की अलग जानकारी दी है। उधर, हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मिस्र पहुंचे हैं। अमेरिका के युद्ध पर खर्च 38 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुका है। पश्चिम एशिया क्षेत्र की ताजा स्थिति क्या है? पढ़िए रिपोर्ट

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West Asia Tensions US strike on Iranian boats Saudi prince Salman In Egypt Houthi attacks in yemen Middle East
पश्चिम एशिया संघर्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी सेना ने मंगलवार को कहा कि उसने इस हफ्ते ईरान की दो छोटी नावों पर गोली चलाई। इसके बाद दोनों नावों को नष्ट कर दिया गया। सेना के मुताबिक, ये नावें ईरान के पास समुद्र में एक बिना चालक वाले जहाज को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रही थीं। यह छह महीने से ज्यादा समय से जारी युद्ध में दोनों पक्षों के बीच हुई ताजा झड़प है।
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अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ईरानी नावों ने हाल ही में एक अमेरिकी बिना चालक वाले समुद्री जहाज को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की थी। लेकिन वे इसमें सफल नहीं हुईं। अमेरिकी सेना ने इसका कड़ा जवाब दिया।
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ईरान के सरकारी मीडिया ने सोमवार को अलग जानकारी दी। उसने बताया कि ईरान के दक्षिणी तट पर होर्मोजगान प्रांत में मछली पकड़ने वाली दो नावों पर हमला हुआ। एक प्रांतीय अधिकारी के हवाले से कई मछुआरे लापता बताए गए।
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यह छह महीने से ज्यादा पुराने युद्ध में हुई ताजा गोलीबारी है। दोनों पक्ष होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण चाहते हैं। यह दुनिया के लिए एक बेहद अहम ऊर्जा और तेल परिवहन मार्ग है। अमेरिका ने हाल के हफ्तों में इस मार्ग पर ईरान की पकड़ कुछ हद तक कमजोर की है।

लेकिन इस युद्ध का असर तेल और पेट्रोल की कीमतों पर पड़ा है। कीमतें बढ़ी हैं। यह संघर्ष अमेरिका में भी राजनीतिक समस्या बन रहा है। नवंबर में अमेरिकी कांग्रेस के मध्यावधि चुनाव होने हैं। ऐसे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी पर दबाव बढ़ रहा है।

ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही ईरान के साथ सैन्य संघर्ष खत्म होगा, तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष जल्द खत्म हो जाएगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को ओमान के विदेश मंत्री से फोन पर बात की। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह जानकारी दी। दोनों के बीच खाड़ी के अरब देश ओमान की कोशिशों पर चर्चा हुई। ओमान तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिश कर रहा है।

हूती और सऊदी अरब के बीच संघर्ष बढ़ा 
ईरान के समर्थन वाले यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमले बढ़ा दिए हैं। इन हमलों का असर तेल की दुनिया पर भी पड़ा है। हूती विद्रोही सऊदी अरब के जहाजों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं।

पश्चिम एशिा के संघर्ष में यह एक नया मोर्चा बन गया है। इससे सऊदी अरब के लिए अपना तेल दुनिया तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। कुछ दूसरे रास्ते भी प्रभावित हुए हैं। कुछ मार्ग पूरी तरह बंद हो गए हैं। 

कुछ दिन पहले सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन पर भी हमला हुआ था। इस हमले में पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा। हूती विद्रोहियों की ताकत भी बढ़ी है। इससे उनके लिए लाल सागर के रास्ते सऊदी तेल के निर्यात को रोकना आसान हो सकता है। 

इस युद्ध का असर सिर्फ तेल पर नहीं पड़ा है। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। वाशिंगटन से आई नई रिपोर्ट्स में युद्ध पर अमेरिका के खर्च की जानकारी दी गई है। इनमें मिसाइलों को रोकने वाली उन्नत मिसाइलों के भंडार में कमी की जानकारी भी है। अमेरिकी विमानों, सैन्य ठिकानों और राजनयिक ठिकानों को हुए नुकसान का भी जिक्र है।

गैर-दलीय कांग्रेस बजट कार्यालय यानी सीबीओ ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक, 1 अगस्त तक ईरान के खिलाफ युद्ध पर पेंटागन का खर्च 38 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुका था। युद्ध की तीव्रता के आधार पर हर महीने 3 अरब डॉलर या उससे ज्यादा खर्च हो सकता है।

ये भी पढ़ें: रिपोर्ट में खुलासा: अमेरिका ने ईरान से जंग में फूंके 38 अरब डॉलर; कितने विमान गंवाए, हर महीने कितना खर्च?

यह आंकड़ा रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कांग्रेस को दिए बयान से काफी मिलता है। हेगसेथ ने भी बताया था कि अब तक युद्ध पर कितना खर्च हुआ है। सीबीओ ने कहा कि इस युद्ध का असर महंगाई पर भी पड़ेगा। इसके कारण अगले साल की पहली तिमाही तक महंगाई बढ़ी रह सकती है।

पेंटागन के महानिरीक्षक की सोमवार को जारी रिपोर्ट में भी नुकसान की जानकारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के हमलों में पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैकड़ों इमारतों और दूसरी संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है। कुछ इमारतें पूरी तरह नष्ट भी हुई हैं। दर्जनों अमेरिकी विमान और ड्रोन भी क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं।

समुद्री ड्रोन को लेकर भी टकराव
टिम हॉकिन्स ने मंगलवार को बताया कि ताजा घटना में शामिल समुद्री ड्रोन को 'सेलड्रोन' कहा जाता है। यह एक छोटा समुद्री जहाज है। इसकी लंबाई करीब 25 फीट यानी 8 मीटर है। यह बिना किसी व्यक्ति के खुद चल सकता है। सेंटकॉम कई साल से इस तरह के ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है। इनका इस्तेमाल समुद्र में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जाता है।

हॉकिन्स ने कहा कि कमान के सभी समुद्री ड्रोन का हिसाब मौजूद है। उन्होंने कहा कि कोई भी ड्रोन गायब नहीं है। अमेरिकी सेना लंबे समय से कहती रही है कि सेलड्रोन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक बाजार में आसानी से उपलब्ध है। सेना के मुताबिक, इसमें कोई संवेदनशील तकनीक नहीं है।

होर्मोजगान के उप-राज्यपाल अहमद नफीसी ने भी घटना की जानकारी दी। उन्होंने ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को बताया कि सोमवार शाम दो नावों पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि हमला फारस की खाड़ी में एक 'दुश्मन ड्रोन' से किया गया। हालांकि, आईआरएनए की रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया कि ईरानी बलों ने अमेरिकी ड्रोन पर कब्जा करने की कोशिश की थी।

इस घटना की खबर सबसे पहले एक्सियोस ने दी थी। एक हफ्ते पहले ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बताया था कि ईरानी नौसेना ने अमेरिकी सेना के एक पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन को पकड़ लिया है। यह घटना होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश के पास हुई थी। उस समय हॉकिन्स ने कहा था कि यह ड्रोन पानी में सर्वे कर रहा था। इसी दौरान उसमें खराबी आ गई। यह ड्रोन अब अमेरिकी सेना के कब्जे में नहीं था।

उन्होंने जोर देकर कहा था कि ड्रोन खराब था। उन्होंने यह भी बताया था कि यह एक पुराना मॉडल था। इसमें संवेदनशील जानकारी जुटाने की क्षमता नहीं थी। इसमें कोई गुप्त सोनार या रडार उपकरण भी नहीं था।

सऊदी क्राउन प्रिंस मिस्र क्यों पहुंचे? 
सऊदी अरब पर लगातार हमले हो रहे हैं। ऐसे में सऊदी क्राउन प्रिंस मंगलवार को मिस्र पहुंचे। उन्होंने यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ मिस्र से समर्थन मांगा। हूती विद्रोहियों ने समुद्री जहाजों के लिए अहम रास्तों को प्रभावित किया है। इसका असर दुनियाभर में तेल की कीमतों पर पड़ा है। तेल महंगा हो गया है।

मिस्र से सऊदी अरब को सैन्य मदद मिलने की संभावना कम है। लेकिन अरब दुनिया में मिस्र का काफी प्रभाव है। वह सऊदी अरब के समर्थन में दूसरे देशों को साथ लाने में मदद कर सकता है। इसी बीच हूती अधिकारियों ने मंगलवार को एक और दावा किया। उनके मुताबिक, सऊदी लड़ाकू विमानों ने यमन पर हमला किया। इसमें तीन लोगों की मौत हुई। मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल हैं।

सऊदी और मिस्र के नेताओं की काहिरा में मुलाकात
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान मंगलवार को मिस्र पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मुलाकात की। दोनों देशों ने आगे की कार्रवाई को लेकर कोई पक्की जानकारी नहीं दी। हालांकि, अल-सिसी के कार्यालय ने कहा कि मिस्र अपने लाल सागर वाले पड़ोसी सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा है।

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को कई हफ्तों तक बड़े स्तर पर बंद रखा जाएगा। इस पाइपलाइन की मरम्मत की जा रही है। इस पर ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया के हमले हुए थे। अधिकारियों के मुताबिक, इसके कारण रोजाना कई मिलियन बैरल तेल बाजार से बाहर हो सकता है।

हूती लड़ाकों ने हाल में बड़ी बढ़त हासिल की है। उन्होंने लाल सागर के बंदरगाह मोक्का पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास और उसके आसपास तीन रणनीतिक द्वीपों पर भी कब्जा किया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता टॉम वेल्स ने हूती विद्रोहियों से हमले तुरंत बंद करने को कहा। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और यमन को अपनी रक्षा करने का अधिकार है।

ईरान में लोगों से हथियार चलाना सीखने की अपील
ईरान के सरकारी टीवी ने बताया कि आम लोगों को असॉल्ट राइफल चलाना सिखाने के लिए भर्ती किया जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ हवाई युद्ध शुरू होने के बाद यह दूसरी ऐसी भर्ती मुहिम है।

इस कदम को अमेरिका के खिलाफ ईरान की चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ फिर से युद्ध शुरू करने की धमकी दी है। कई महीनों से चल रही बातचीत भी कमजोर पड़ रही है। इसी बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए रखी है।

इन स्वयंसेवकों को 'जांफदा' कहा जाता है। इसका मतलब ऐसे लोग हैं, जो अपनी जान कुर्बान करने के लिए तैयार हैं। इस अपील से यह संकेत भी मिलता है कि ईरान में सरकार के कट्टर समर्थक हथियारबंद लोग बढ़ सकते हैं। वे ईरान की धार्मिक सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों को दबाने में भी मदद कर सकते हैं।

गाजा में इस्राइली हमलों में सात लोगों की मौत 
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गाजा में इस्राइली हमले पूरे दिन हुए। ये हमले मंगलवार रात तक जारी रहे। अधिकारियों के मुताबिक, सात लोगों की मौत हुई। मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल हैं। अस्पताल के अधिकारियों और स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, हमले गाजा शहर में हुए। उत्तरी गाजा में भी हमले हुए। दक्षिणी शहर खान यूनिस में भी हमले की खबर है। इस्राइली सेना ने कहा कि पहले हमले में हमास का एक कमांडर मारा गया। बाकी हमलों को लेकर इस्राइली सेना ने टिप्पणी नहीं की। 

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों में संघर्ष तेज, पहली बार मक्का में हमले का अलर्ट
हूती विद्रोहियों और ईरान समर्थित गुटों के लगातार हमलों के बाद सऊदी अरब को मक्का में हवाई हमले का अलर्ट जारी करना पड़ा है। यह पहला मौका है जब मक्का पर हमले का खतरा जताया गया है। खाड़ी के अरब देश अपनी सुरक्षा के लिए लंबे समय से अपनी जमीन पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर निर्भर रहे हैं, लेकिन ईरान के साथ जारी युद्ध और अब हूती विद्रोहियों के हमलों ने अमेरिकी सुरक्षा गारंटी की सीमाओं को उजागर कर दिया है।


हूती विद्रोहियों ने बीते एक हफ्ते में सऊदी अरब पर हमलों की रफ्तार तेज कर दी है। जवाब में सऊदी और यमन की वायुसेना ने हूती ठिकानों पर बमबारी की है। हालांकि, हूती लड़ाकों ने लाल सागर से लगे यमन के लगभग पूरे पश्चिमी तट और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास एक रणनीतिक द्वीप पर नियंत्रण कर लिया है। लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले झेल रहे खाड़ी देशों के सामने अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

स्पाईवेयर को लेकर अलर्ट  
ब्रिटेन, अमेरिका और नीदरलैंड्स की खुफिया एजेंसियों ने मंगलवार को एक साझा साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। दावा किया गया है कि ईरान सरकार से जुड़े साइबर हमलावर चोजन ब्रिक नाम के खतरनाक स्पाईवेयर का इस्तेमाल कर राजनीतिक विरोधियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को निशाना बना रहे हैं।
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