नेपाल बाढ़ अपडेट: मृतकों की संख्या 1,400 के पार, छह हजार से अधिक लोग अब भी लापता; अब कैसा है नेपाल का हाल?
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या 1,404 पहुंच गई है, जबकि 6,150 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल प्रभावित जिलों में तलाश अभियान चला रहे हैं। अब तक 13,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि शवों की पहचान चुनौती बनी हुई है।
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नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 1,400 के पार पहुंच गई है। प्रभावित जिलों से लगातार और शव बरामद हो रहे हैं, जबकि बचाव दल अब भी लापता 6,000 से अधिक लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के ताजा बुलेटिन के अनुसार, मृतकों का आंकड़ा 1,404 तक पहुंच चुका है। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 13,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, वहीं करीब 6,150 लोग अब भी लापता हैं।
यह भयानक तबाही नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टान का मलबा खिसकने (एवलांच) की वजह से शुरू हुई थी। इसके चलते हिमालयी सीमाई इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में अचानक भीषण बाढ़ आ गई, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल के गांवों और कस्बों को उजाड़ दिया। बाढ़ का तेज बहाव अपने साथ मकानों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा ले गया और कई जलविद्युत परियोजनाओं (हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स) को भी भारी क्षति पहुंचाई। चीनी मीडिया के अनुसार, सीमा पार चीनी इलाके में भी इस आपदा ने 43 लोगों की जान ले ली और वहां 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल में सबसे अधिक तबाही चितवन जिले में दर्ज की गई, जहां से सबसे ज्यादा 364 शव निकाले गए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व से 232 और नवलपरासी पश्चिम से 222 शव मिले हैं। बाकी शव नुवाकोट, रसुवा, गोरखा, धाडिंग और तनहुं जिलों से बरामद किए गए हैं।
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प्रशासन के लिए मृतकों की पहचान करना सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक मिले शवों में से केवल 104 की ही पहचान हो सकी है, जिन्हें परिजनों को सौंपा गया है। पानी में दूर तक बहने की वजह से शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके हैं, सड़-गल गए हैं या फिर केवल टुकड़ों में मिले हैं। लंबे समय तक पानी, कीचड़ और मलबे में रहने से चेहरे, कपड़े या निजी सामान से शिनाख्त करना मुश्किल हो गया है। फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि अब डीएनए जांच ही मुख्य जरिया बची है, लेकिन परिजनों और अवशेषों के नमूनों के मिलान की यह प्रक्रिया काफी समय लेने वाली है।
बाढ़ से तबाह हुए रसुवा और नुवाकोट जिलों की जलविद्युत परियोजनाओं में बड़ी संख्या में लापता कर्मचारियों को तलाशने के लिए टीमें लगातार जुटी हैं। इस अभियान में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, प्रोजेक्ट कर्मी और विदेशी तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि बुधवार को चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग से पांच शव बरामद किए गए। भारतीय और नेपाली बचाव दलों ने कई दिनों तक कीचड़ और मलबा हटाने के बाद पावरहाउस तक रास्ता बनाया। उन्होंने बताया कि बचाव दलों को वहां कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं मिला।