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US-Iran Peace Deal: 'ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटी', अमेरिका-ईरान शांति समझौता होने लगा प्रभावी?
Tue, 16 Jun 2026 10:08 PM IST
Pavan
आईएएनएस, तेहरान
आईएएनएस, तेहरान
Published by: Pavan
Updated Tue, 16 Jun 2026 10:08 PM IST
सार
ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने दावा किया कि अमेरिका ने लगभग दो महीने से ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटा दी है। यह कदम स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित समझौते से पहले उठाया गया। ट्रंप और मैक्रों ने समझौते को क्षेत्रीय शांति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
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अमेरिका-ईरान शांति समझौता होने लगा प्रभावी?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने दावा किया है कि अमेरिका ने लगभग दो महीने से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी हटा दी है। यह कदम शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से पहले उठाया गया है। सरकारी वेबसाइट के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, तख्त-रवांची ने कहा कि नाकेबंदी हटाना ईरान की शुरुआती मांगों में शामिल था और अब इस दिशा में कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'नाकेबंदी हटाने पर हम शुरू से जोर देते रहे हैं। अब यह प्रक्रिया शुरू हो गई है और समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर से पहले ही प्रतिबंध हटा दिया गया है'।
दो महीने से जारी थी नाकेबंदी
ईरान का आरोप था कि अमेरिका ने उसके बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे थे, जिससे तेल निर्यात और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। सोमवार को ईरानी मीडिया ने दावा किया कि तीन तेल टैंकर और आवश्यक सामान लेकर जा रहे दो मालवाहक जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को पार कर ईरान पहुंचने में सफल रहे। इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का संकेत माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें- G7 शिखर सम्मेलन: 16 महीने बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात, वैश्विक मंच पर दिखी गर्मजोशी
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अमेरिका-ईरान समझौते की ओर बढ़ते कदम
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के साथ हुए नए समझौते को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने मुलाकात की और कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और परमाणु सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
परमाणु विवाद सुलझाने में मदद मिलेगी
मैक्रों ने कहा कि यह समझौता सबसे पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद को हल करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, 'यह बहुत महत्वपूर्ण समझौता है। इससे परमाणु मुद्दे का समाधान होगा और दुनिया में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी'। मैक्रों के अनुसार, इस समझौते से लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसके क्रियान्वयन में सहयोग देने के लिए तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलने की उम्मीद
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि समझौते के सकारात्मक प्रभाव अभी से दिखाई देने लगे हैं। उनके मुताबिक, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से फिर से जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। ट्रंप ने कहा, 'समझौता लगभग पूरा हो चुका है और जलडमरूमध्य आंशिक रूप से खुल चुका है। जहाज अब निकलना शुरू हो गए हैं। शुक्रवार तक यह पूरी तरह खुल जाएगा'।
यह भी पढ़ें- G7 Summit: कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का बड़ा बयान, 'जी7 अब दुनिया नहीं चलाता, भारत की उपस्थिति इसका प्रमाण'
वैश्विक तेल बाजार को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है और ईरान पर समुद्री प्रतिबंधों में ढील जारी रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है। अब सभी की नजर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक समझौते पर है। यदि समझौते पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में कमी आ सकती है और पश्चिम एशिया में स्थिरता की नई उम्मीद पैदा हो सकती है।
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दो महीने से जारी थी नाकेबंदी
ईरान का आरोप था कि अमेरिका ने उसके बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे थे, जिससे तेल निर्यात और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। सोमवार को ईरानी मीडिया ने दावा किया कि तीन तेल टैंकर और आवश्यक सामान लेकर जा रहे दो मालवाहक जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को पार कर ईरान पहुंचने में सफल रहे। इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का संकेत माना जा रहा है।
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अमेरिका-ईरान समझौते की ओर बढ़ते कदम
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के साथ हुए नए समझौते को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने मुलाकात की और कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और परमाणु सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
परमाणु विवाद सुलझाने में मदद मिलेगी
मैक्रों ने कहा कि यह समझौता सबसे पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद को हल करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, 'यह बहुत महत्वपूर्ण समझौता है। इससे परमाणु मुद्दे का समाधान होगा और दुनिया में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी'। मैक्रों के अनुसार, इस समझौते से लेबनान सहित पूरे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसके क्रियान्वयन में सहयोग देने के लिए तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलने की उम्मीद
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि समझौते के सकारात्मक प्रभाव अभी से दिखाई देने लगे हैं। उनके मुताबिक, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से फिर से जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। ट्रंप ने कहा, 'समझौता लगभग पूरा हो चुका है और जलडमरूमध्य आंशिक रूप से खुल चुका है। जहाज अब निकलना शुरू हो गए हैं। शुक्रवार तक यह पूरी तरह खुल जाएगा'।
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वैश्विक तेल बाजार को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है और ईरान पर समुद्री प्रतिबंधों में ढील जारी रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है। अब सभी की नजर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक समझौते पर है। यदि समझौते पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में कमी आ सकती है और पश्चिम एशिया में स्थिरता की नई उम्मीद पैदा हो सकती है।