{"_id":"6aaf78973a7e7ba77305d2d8","slug":"incredible-to-watch-capability-isro-is-developing-in-science-missions-indian-american-nasa-senior-official-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"इसरो की काबिलियत का मुरीद हुआ नासा: अमेरिकी एजेंसी के अधिकारी बोले- हम साझेदारी को मजबूत करने के लिए उत्सुक","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
इसरो की काबिलियत का मुरीद हुआ नासा: अमेरिकी एजेंसी के अधिकारी बोले- हम साझेदारी को मजबूत करने के लिए उत्सुक
Sun, 20 Sep 2026 11:39 AM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, न्यूयॉर्क
पीटीआई, न्यूयॉर्क
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:39 AM IST
सार
नासा के वरिष्ठ अधिकारी अमित क्षत्रिय ने भारत के साथ अंतरिक्ष सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। उन्होंने निसार मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान में इसरो की क्षमताओं की सराहना की। कार्यक्रम में पेगी व्हिटसन और चार्ल्स बोल्डन ने भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और शुभांशु शुक्ला की तारीफ की।
विज्ञापन
इसरो और नासा (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Adobestock
विस्तार
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच की साझेदारी बेहद शानदार है और नासा भारत के साथ सहयोग को और अधिक विस्तार देने के लिए उत्सुक है। यह बात नासा के भारतीय-अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी अमित क्षत्रिय ने कही है।
नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर और चीफ इंजीनियर अमित क्षत्रिय ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि विज्ञान मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान दोनों ही क्षेत्रों में इसरो जो क्षमता विकसित कर रहा है, उसे देखना वाकई अद्भुत है। नासा के सर्वोच्च रैंकिंग वाले सिविल सेवक और मुख्य परिचालन अधिकारी क्षत्रिय ने कहा कि वे भविष्य में भारत के साथ और अधिक साझेदारी की उम्मीद कर रहे हैं।
अमित क्षत्रिय ने 'निसार' (एनआईएसएआर) मिशन का विशेष तौर पर जिक्र किया। यह नासा और इसरो का एक संयुक्त अर्थ-सेंसिंग ऑर्बिटर प्रोजेक्ट है, जिसे पृथ्वी की जमीन, बर्फ, पानी और पेड़-पौधों में हो रहे बदलावों को समझने के लिए जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया था। उन्होंने बताया कि इस संयुक्त प्रयास से दोनों को काफी फायदा हुआ है। इसके अलावा मानव अंतरिक्ष मिशनों में भी नासा अपने अनुभवों को इसरो के साथ साझा करता है।
विज्ञापन
भारत के 70 से अधिक अन्य देशों के साथ 'आर्टेमिस समझौते' पर हस्ताक्षर करने का उल्लेख करते हुए क्षत्रिय ने कहा कि यह इस बात की प्रतिबद्धता है कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और एक-दूसरे की अखंडता का सम्मान करते हुए अंतरिक्ष खोज को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने इसरो को एक अविश्वसनीय साझेदार बताया। अमित क्षत्रिय न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध इंट्रेपिड म्यूजियम में 'एंटरप्राइज' के 50 साल पूरे होने पर आयोजित एक चर्चा में भाग लेने पहुंचे थे।
इस कार्यक्रम में उनके साथ पूर्व नासा प्रमुख और अंतरिक्ष यात्री चार्ल्स एफ. बोल्डन जूनियर और एक्सिओम स्पेस की डायरेक्टर पेगी व्हिटसन भी मौजूद थीं। पेगी व्हिटसन ने एक्सिओम मिशन 4 (एएक्स-4) में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ काम करने का अनुभव साझा किया। व्हिटसन ने कहा कि शुभांशु शुक्ला का इस मिशन में पायलट होना उनके लिए बेहद खुशी की बात थी और उन्हें उन पर गर्व है।
लखनऊ में जन्मे और अशोक चक्र से सम्मानित भारतीय वायुसेना के पायलट शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय बने। वे विंग कमांडर राकेश शर्मा (1984) के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। जून 2025 में लॉन्च हुए इस 18 दिवसीय मिशन में कमांडर व्हिटसन और पायलट शुक्ला के अलावा पोलैंड के स्वावोज उज्नान्स्की-विश्नेव्स्की और हंगरी के तिबोर कापू शामिल थे। पेगी व्हिटसन अंतरिक्ष में कुल 695 दिन बिताने वाली दुनिया की सबसे अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री हैं।
वहीं, पूर्व नासा प्रमुख चार्ल्स एफ. बोल्डन ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला भारत दुनिया का पहला देश था। भारत ने नवंबर 2013 में 'मंगलयान' (एमओएम) लॉन्च किया था और इसरो मंगल की कक्षा में पहुंचने वाली दुनिया की चौथी अंतरिक्ष एजेंसी बनी थी।
छह महीने के इस मिशन ने सितंबर 2021 में अंतरिक्ष में अपने सात साल पूरे किए थे। बोल्डन ने बताया कि इस मिशन के दौरान नासा के डीप स्पेस नेटवर्क ने बेंगलुरु स्थित भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क को नेविगेशन और ट्रैकिंग में सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि भारत और यूएई दुनिया के ऐसे देश हैं जो पहले ही प्रयास में मंगल तक पहुंचे।
विज्ञापन
नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर और चीफ इंजीनियर अमित क्षत्रिय ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि विज्ञान मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान दोनों ही क्षेत्रों में इसरो जो क्षमता विकसित कर रहा है, उसे देखना वाकई अद्भुत है। नासा के सर्वोच्च रैंकिंग वाले सिविल सेवक और मुख्य परिचालन अधिकारी क्षत्रिय ने कहा कि वे भविष्य में भारत के साथ और अधिक साझेदारी की उम्मीद कर रहे हैं।
विज्ञापन
अमित क्षत्रिय ने 'निसार' (एनआईएसएआर) मिशन का विशेष तौर पर जिक्र किया। यह नासा और इसरो का एक संयुक्त अर्थ-सेंसिंग ऑर्बिटर प्रोजेक्ट है, जिसे पृथ्वी की जमीन, बर्फ, पानी और पेड़-पौधों में हो रहे बदलावों को समझने के लिए जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया था। उन्होंने बताया कि इस संयुक्त प्रयास से दोनों को काफी फायदा हुआ है। इसके अलावा मानव अंतरिक्ष मिशनों में भी नासा अपने अनुभवों को इसरो के साथ साझा करता है।
विज्ञापन
भारत के 70 से अधिक अन्य देशों के साथ 'आर्टेमिस समझौते' पर हस्ताक्षर करने का उल्लेख करते हुए क्षत्रिय ने कहा कि यह इस बात की प्रतिबद्धता है कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और एक-दूसरे की अखंडता का सम्मान करते हुए अंतरिक्ष खोज को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने इसरो को एक अविश्वसनीय साझेदार बताया। अमित क्षत्रिय न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध इंट्रेपिड म्यूजियम में 'एंटरप्राइज' के 50 साल पूरे होने पर आयोजित एक चर्चा में भाग लेने पहुंचे थे।
इस कार्यक्रम में उनके साथ पूर्व नासा प्रमुख और अंतरिक्ष यात्री चार्ल्स एफ. बोल्डन जूनियर और एक्सिओम स्पेस की डायरेक्टर पेगी व्हिटसन भी मौजूद थीं। पेगी व्हिटसन ने एक्सिओम मिशन 4 (एएक्स-4) में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ काम करने का अनुभव साझा किया। व्हिटसन ने कहा कि शुभांशु शुक्ला का इस मिशन में पायलट होना उनके लिए बेहद खुशी की बात थी और उन्हें उन पर गर्व है।
लखनऊ में जन्मे और अशोक चक्र से सम्मानित भारतीय वायुसेना के पायलट शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाने वाले पहले भारतीय बने। वे विंग कमांडर राकेश शर्मा (1984) के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं। जून 2025 में लॉन्च हुए इस 18 दिवसीय मिशन में कमांडर व्हिटसन और पायलट शुक्ला के अलावा पोलैंड के स्वावोज उज्नान्स्की-विश्नेव्स्की और हंगरी के तिबोर कापू शामिल थे। पेगी व्हिटसन अंतरिक्ष में कुल 695 दिन बिताने वाली दुनिया की सबसे अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री हैं।
वहीं, पूर्व नासा प्रमुख चार्ल्स एफ. बोल्डन ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला भारत दुनिया का पहला देश था। भारत ने नवंबर 2013 में 'मंगलयान' (एमओएम) लॉन्च किया था और इसरो मंगल की कक्षा में पहुंचने वाली दुनिया की चौथी अंतरिक्ष एजेंसी बनी थी।
छह महीने के इस मिशन ने सितंबर 2021 में अंतरिक्ष में अपने सात साल पूरे किए थे। बोल्डन ने बताया कि इस मिशन के दौरान नासा के डीप स्पेस नेटवर्क ने बेंगलुरु स्थित भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क को नेविगेशन और ट्रैकिंग में सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि भारत और यूएई दुनिया के ऐसे देश हैं जो पहले ही प्रयास में मंगल तक पहुंचे।