US: वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड की तैनाती पर विवाद, जिला प्रशासन ने ट्रंप के आदेश को कोर्ट में दी चुनौती
वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड की तैनाती को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रही है। जहां राष्ट्रपति ट्रंप के सेना तैनाती के फैसले के खिलाफ कानूनी जंग शुरू हो गई है। अटॉर्नी जनरल ब्रायन श्वाल्ब ने इसे अवैध सैन्य कब्जा बताते हुए संघीय अदालत में याचिका दायर की है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद राजधानी वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड की तैनाती के मामले में विवाद बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में अब ट्रंप के फैसले को लेकर राज्यभर में विरोध तेज हो गया है। इसके बाद डीसी के अटॉर्नी जनरल ब्रायन श्वाल्ब ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप की तरफ से नेशनल गार्ड की तैनाती सैन्य कब्जे जैसी है और यह कानून के खिलाफ है।
श्वाल्ब ने कहा कि किसी भी अमेरिकी क्षेत्र पर जबरन सैन्य तैनाती नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि डीसी में 1,000 से ज्यादा सैनिकों की तैनाती अवैध है और घरेलू कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना का उपयोग नहीं किया जा सकता। हालांकि दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन की प्रवक्ता अबीगैल जैक्सन ने इस मुकदमे को राष्ट्रपति की सफल कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशों को कमजोर करने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप का यह कदम हिंसा और अपराध को रोकने के लिए जरूरी था।
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अब समझिए क्या है पूरा मामला?
बात अगर पूरे मामले की करें तो राष्ट्रपति ट्रंप ने अगस्त में एक कार्यकारी आदेश जारी कर डीसी की पुलिस पर नियंत्रण कर लिया था और इसके साथ ही अन्य राज्यों से भी नेशनल गार्ड के जवानों को बुला लिया गया। यह कदम उस समय उठाया गया जब डीसी में अपराध के मामलों को लेकर चिंता जताई जा रही थी। हालांकि आंकड़ों के अनुसार उस समय अपराध पहले से ही घट रहा था। बावजूद इसके ट्रंप ने इसे अपराध पर काबू पाने के लिए जरूरी बताया।
डेमोक्रेट पार्टी के डीसी से मेयर म्यूरियल बाउजर ने भी इस कदम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय स्वशासन और होम रूल एक्ट का उल्लंघन हुआ है। यह कानून 1973 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने साइन किया था, जिससे डीसी को कुछ हद तक स्वायत्तता दी गई थी।
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अब समझिए मामले में अदालत का स्टैंड?
गौरतलब है कि हाल ही में कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत ने भी एलए में नेशनल गार्ड की तैनाती को अवैध बताया था। हालांकि, यह फैसला डीसी पर सीधे लागू नहीं होता, क्योंकि राजधानी में राष्ट्रपति का अधिकार अधिक होता है। डीसी में तैनात नेशनल गार्ड के जवानों की सेवा अवधि दिसंबर तक बढ़ा दी गई है। इसका मतलब यह है कि यह अभियान जल्दी खत्म नहीं होने वाला। यह मुकदमा अटॉर्नी जनरल श्वाल्ब की ओर से ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दूसरा बड़ा कानूनी कदम है। अब देखना होगा कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है।