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Omicron In USA: अमेरिका पर ओमिक्रॉन संक्रमण का खतरा, धीमे कदम उठाने के आरोपों से घिर गए हैं जो बाइडन
Thu, 23 Dec 2021 05:25 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 23 Dec 2021 05:25 PM IST
सार
विशेषज्ञों ने कहा है कि प्रशासन ने नई लहर को रोकने के कदम बहुत देर से उठाए। उन्होंने कहा है कि घर पर ही कोविड टेस्ट करने की सुविधाएं सबको उपलब्ध करवाई जानी चाहिए थी। लेकिन इस बारे में अब जाकर फैसला हुआ है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अमेरिका में कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण तेजी से बढ़ने के साथ राष्ट्रपति जो बाइडन आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं। उनके प्रशासन पर महामारी को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लग रहा है। आलोचकों ने कहा है कि छह महीने पहले राष्ट्रपति बाइडन ने एलान कर दिया था कि अमेरिका को कोविड-19 से मुक्ति मिल गई है। इस बाद प्रशासन लापरवाह हो गया। महामारी की नई लहर को रोकने के लिए जो कदम पहले उठाए जा सकते थे, वे नहीं उठाए गए।
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कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि प्रशासन ने नई लहर को रोकने के कदम बहुत देर से उठाए। उन्होंने कहा है कि घर पर ही कोविड टेस्ट करने की सुविधाएं सबको उपलब्ध करवाई जानी चाहिए थी। लेकिन इस बारे में अब जाकर फैसला हुआ है। इमरजेंसी फिजिशियन और बाल्टीमोर की पूर्व स्वास्थ्य आयुक्त लियेना वेन ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘प्रशासन को यह इंतजाम करना होगा कि हर अमेरिकी घर पर दो बार अपना कोविड टेस्ट कर सके।’ मॉलिकुलर मेडिसीन के प्रोफेसर एरिक टोपोल ने बुधवार को एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि बाइडन प्रशासन बीमारी फैलने के बाद प्रतिक्रिया दिखाने के रुख पर चल रहा है। आक्रामक नजरिया अपनाने में वह नाकाम रहा है।
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अमेरिका में ओमिक्रोन अब सबसे अधिक परेशानी पैदा करने वाला वैरिएंट बन चुका है। वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में इसकी वजह से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। आलोचकों के मुताबिक अब तक सिर्फ 30 अमेरिकी नागरिकों को कोरोना वैक्सीन का बूस्टर डोज लगा है। वैक्सीन के दोनों डोज भी सिर्फ 62 फीसदी योग्य आबादी को ही लगे हैं। इसकी कीमत अब चुकानी पड़ रही है। इसके अलावा कोविड टेस्ट की सुविधाएं भी फिलहाल जरूरत की तुलना में कम पड़ रही हैं।
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राष्ट्रपति बाइडन ने यह स्वीकार किया है कि टेस्टिंग सुविधाएं मुहैया कराने में उनके प्रशासन ने सुस्ती दिखाई। उन्होंने कहा- ‘इसमें लंबा वक्त लगा। कारण यह है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट जिस तेजी से फैला है, उसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था।’ प्रशासन के अधिकारियों ने ध्यान दिलाया है कि कई यूरोपीय देश भी टेस्टिंग सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने वेबसाइट एक्सियोस से कहा- ‘इस देश में ऐसी कई विनियामक प्रक्रियाएं हैं, जिनका पालन करते हुए हमें काम करना पड़ता है। यह इस देश की एक हकीकत है।’
ह्वाइट हाउस ने मंगलवार को एलान किया था कि अब देश में पांच करोड़ रैपिड टेस्ट किट उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मौजूदा कमी को दूर करने में मदद नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा है कि देश की आबादी 33 करोड़ है। पूरी आबादी को ये सुविधा मिलेगी, तभी कोई फर्क पड़ सकता है। इस बीच ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ा है। ब्राउन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डीन मेगन रैनी ने कहा- ‘राष्ट्रपति बाइडन ने अब जो योजना घोषित की है, मेरी राय उसे पहले किया गया होता, तो बेहतर होता।’
बाइडन प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि प्रशासन ने कोरोना वायरस को पहले कम करके आंका। लेकिन उनका कहना है कि ऐसा सिर्फ अमेरिका में ही नहीं हुआ है। बल्कि कई देशों में भी पहले यह सोच लिया गया थ कि महामारी खत्म हो रही है।