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US: ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ मुकदमा शुरू, कॉलेजों में फलस्तीन समर्थकों को बनाया गया निशाना
Mon, 07 Jul 2025 11:07 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 07 Jul 2025 11:07 AM IST
सार
मुकदमे में ट्फ्ट्स यूनिवर्सिटी की छात्रा रुमेया ओजतुर्क का भी जिक्र है, जिसे लुइसियाना के अप्रवासन विभाग के हिरासत केंद्र से मई में रिहा किया गया। रुमेया ने करीब छह हफ्ते हिरासत केंद्र में बिताए।
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : एक्स/व्हाइट हाउस
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विस्तार
ट्रंप प्रशासन की एक और कार्रवाई कानूनी मामले में फंस गई है। दरअसल ट्रंप प्रशासन ने कॉलेज कैंपसेस में फलस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की थी। जिसके खिलाफ संघीय अदालत में मामला दायर किया, जिस पर संघीय अदालत ने सोमवार को सुनवाई शुरू की। यह मुकदमा कई विश्वविद्यालयों द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन के कई अधिकारियों के खिलाफ दायर किया गया।
क्या कहना मुकदमा दायर करने वाले विश्वविद्यालयों का
वादियों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन और प्रशासन प्रक्रिया कानून का उल्लंघन करती है। मुकदमा दायर करने वाले विश्वविद्यालयों का कहना है कि सरकार की कार्रवाई से छात्र और शिक्षक डरे हुए हैं। छात्र और शिक्षक अब राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से दूरी बना रहे हैं। साथ ही फलस्तीन समर्थक समूहों से भी दूर हो रहे हैं। अब छात्र कक्षाओं में भी आत्म संयम बरत रहे हैं और इस मुद्दे पर कोई बात नहीं करते।
फलस्तीन समर्थकों के खिलाफ हुई कार्रवाई
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका का अप्रवासन विभाग विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि फलस्तीन समर्थन के तहत कुछ छात्र हमास का समर्थन कर रहे हैं। मुकदमे में मोहम्मद खलील का भी जिक्र है, जिसे अप्रवासन विभाग ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में फलस्तीन के समर्थन में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने पर हिरासत में ले लिया था। मोहम्मद खलील को 104 दिनों तक हिरासत में रखने के बाद बीते महीने ही रिहा किया गया है।
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ये भी पढ़ें- Trump: ब्रिक्स देशों को ट्रंप की चेतावनी, बोले- US विरोधी नीतियों का समर्थन करने पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे
मुकदमे में ट्फ्ट्स यूनिवर्सिटी की छात्रा रुमेया ओजतुर्क का भी जिक्र है, जिसे लुइसियाना के अप्रवासन विभाग के हिरासत केंद्र से मई में रिहा किया गया। रुमेया ने करीब छह हफ्ते हिरासत केंद्र में बिताए। उसे बोस्टन उपनगर में उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब वह सड़क पर टहल रही थी। रुमेया का दावा है कि उसने बीते साल गाजा में इस्राइल की कार्रवाई की आलोचना करते हुए एक सह-लेख लिखा था।
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क्या कहना मुकदमा दायर करने वाले विश्वविद्यालयों का
वादियों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन और प्रशासन प्रक्रिया कानून का उल्लंघन करती है। मुकदमा दायर करने वाले विश्वविद्यालयों का कहना है कि सरकार की कार्रवाई से छात्र और शिक्षक डरे हुए हैं। छात्र और शिक्षक अब राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से दूरी बना रहे हैं। साथ ही फलस्तीन समर्थक समूहों से भी दूर हो रहे हैं। अब छात्र कक्षाओं में भी आत्म संयम बरत रहे हैं और इस मुद्दे पर कोई बात नहीं करते।
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फलस्तीन समर्थकों के खिलाफ हुई कार्रवाई
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका का अप्रवासन विभाग विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि फलस्तीन समर्थन के तहत कुछ छात्र हमास का समर्थन कर रहे हैं। मुकदमे में मोहम्मद खलील का भी जिक्र है, जिसे अप्रवासन विभाग ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में फलस्तीन के समर्थन में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने पर हिरासत में ले लिया था। मोहम्मद खलील को 104 दिनों तक हिरासत में रखने के बाद बीते महीने ही रिहा किया गया है।
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मुकदमे में ट्फ्ट्स यूनिवर्सिटी की छात्रा रुमेया ओजतुर्क का भी जिक्र है, जिसे लुइसियाना के अप्रवासन विभाग के हिरासत केंद्र से मई में रिहा किया गया। रुमेया ने करीब छह हफ्ते हिरासत केंद्र में बिताए। उसे बोस्टन उपनगर में उस वक्त गिरफ्तार किया गया था, जब वह सड़क पर टहल रही थी। रुमेया का दावा है कि उसने बीते साल गाजा में इस्राइल की कार्रवाई की आलोचना करते हुए एक सह-लेख लिखा था।
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