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White House on US Tariffs: चीन पर कुल टैरिफ 145 फीसदी; भारत को 26% अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क से 9 जुलाई तक राहत
Thu, 10 Apr 2025 10:17 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 10 Apr 2025 10:17 PM IST
सार
अमेरिका ने भारत पर 26% अतिरिक्त टैरिफ को निलंबित कर दिया है। इसे लेकर व्हाइट हाउस ने कहा है कि भारत पर लगने वाले अतिरिक्त टैरिफ को 90 दिनों के लिए स्थगित किया जा रहा है। यानी अब यह शुल्क 9 जुलाई 2025 तक लागू नहीं होगा। वहीं अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि, चीन पर कुल टैरिफ 145 फीसदी है।
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व्हाइट हाउस
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर लगाई गई 26 प्रतिशत की अतिरिक्त टैरिफ (आयात शुल्क) को अस्थायी रूप से 90 दिनों के लिए टाल दिया है। अब यह टैरिफ 9 जुलाई 2025 तक लागू नहीं होगा। इस फैसले की जानकारी व्हाइट हाउस की ओर से जारी कार्यकारी आदेश में दी गई है।
क्या है मामला?
2 अप्रैल को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 60 देशों से आने वाले माल पर आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा की थी। इनमें भारत, चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं। इस फैसले के तहत भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 26 प्रतिशत की अतिरिक्त टैरिफ लगाई गई थी। इसका मकसद अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना और घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना बताया गया था।
यह भी पढ़ें - Trump Tariffs: 'दुनिया पर करम, चीन पर सितम', टैरिफ पर हर दिन चौंकाने वाले ट्रंप 90 दिन क्या करेंगे? जानें
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9 जुलाई तक समझौते पर होगा मंथन
यह टैरिफ अस्थायी तौर पर टाला गया है। इसका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत और अमेरिका के बीच अगले 90 दिनों में व्यापार को लेकर कैसी बातचीत होती है। अगर समझौता हो गया, तो शायद यह टैरिफ पूरी तरह हटा दिया जाए। लेकिन अगर बात नहीं बनी, तो 9 जुलाई के बाद ये शुल्क दोबारा लागू हो सकता है।
75 देशों ने हमारी चिंताओं को दूर करने के लिए संपर्क किया- ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में कहा, जब से मैंने (राष्ट्रपति ने) कार्यकारी आदेश 14257 पर हस्ताक्षर किए हैं, 75 से अधिक अन्य विदेशी व्यापार साझेदारों ने हमारे आर्थिक संबंधों में व्यापार पारस्परिकता की कमी और हमारी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से संपर्क किया है। 9 अप्रैल को जारी इस आदेश में कहा गया है, यह इन देशों की ओर से गैर-पारस्परिक व्यापार व्यवस्थाओं को सुधारने और आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ पर्याप्त रूप से सहयोग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अगले हफ्तों में कई देशों से व्यापार वार्ता करेगा अमेरिका
टैरिफ स्थगन के बाद ट्रंप का प्रशासन अब अलग-अलग देशों के साथ व्यापार वार्ता में जुटेगा। व्हाइट हाउस नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हैसेट ने बुधवार को एक न्यूज चैनल को बताया कि ट्रंप प्रशासन के पास पहले से ही 15 से अधिक देशों की ओर से बातचीत के प्रस्ताव हैं। हैसेट ने कहा कि अगला कदम यह निर्धारित करने का होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप वार्ता से क्या चाहते हैं। वहीं, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, कोई भी व्यापार समझौता अब विशिष्ट होगा, न कि देशों के समूह के बीच कोई व्यापक समझौता।
यह भी पढ़ें - India-Bangladesh Border: सीमा पार करने की ताक में तस्कर, मंसूबे पर BSF जवानों ने फेरा पानी; तीन कोशिशें नाकाम
चीन पर कुल 145 फीसदी टैरिफ
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक टैरिफ युद्ध को सिर्फ चीन-हांगकांग तक सीमित करते हुए चीन से होने वाले सभी तरह के आयात पर टैरिफ को बढ़ाकर 145 फीसदी कर दिया है। इससे दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं। व्हाइट हाउस ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि चीन को संयुक्त राज्य अमेरिका में सभी आयातों पर न्यूनतम 145 प्रतिशत टैरिफ दर का सामना करना पड़ेगा। एक दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वे चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 125 प्रतिशत कर रहे हैं, क्योंकि बीजिंग ने उनके पिछले शुल्कों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है। गुरुवार को व्हाइट हाउस ने बताया कि 125 प्रतिशत टैरिफ उस 20 प्रतिशत टैरिफ के अतिरिक्त है, जो राष्ट्रपति ने पहले अमेरिका को फेंटेनाइल की आपूर्ति करने में चीन की भूमिका के लिए चीन से आने वाले सामानों पर लगाया था।
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क्या है मामला?
2 अप्रैल को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 60 देशों से आने वाले माल पर आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा की थी। इनमें भारत, चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं। इस फैसले के तहत भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 26 प्रतिशत की अतिरिक्त टैरिफ लगाई गई थी। इसका मकसद अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना और घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना बताया गया था।
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9 जुलाई तक समझौते पर होगा मंथन
यह टैरिफ अस्थायी तौर पर टाला गया है। इसका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत और अमेरिका के बीच अगले 90 दिनों में व्यापार को लेकर कैसी बातचीत होती है। अगर समझौता हो गया, तो शायद यह टैरिफ पूरी तरह हटा दिया जाए। लेकिन अगर बात नहीं बनी, तो 9 जुलाई के बाद ये शुल्क दोबारा लागू हो सकता है।
75 देशों ने हमारी चिंताओं को दूर करने के लिए संपर्क किया- ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में कहा, जब से मैंने (राष्ट्रपति ने) कार्यकारी आदेश 14257 पर हस्ताक्षर किए हैं, 75 से अधिक अन्य विदेशी व्यापार साझेदारों ने हमारे आर्थिक संबंधों में व्यापार पारस्परिकता की कमी और हमारी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से संपर्क किया है। 9 अप्रैल को जारी इस आदेश में कहा गया है, यह इन देशों की ओर से गैर-पारस्परिक व्यापार व्यवस्थाओं को सुधारने और आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ पर्याप्त रूप से सहयोग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अगले हफ्तों में कई देशों से व्यापार वार्ता करेगा अमेरिका
टैरिफ स्थगन के बाद ट्रंप का प्रशासन अब अलग-अलग देशों के साथ व्यापार वार्ता में जुटेगा। व्हाइट हाउस नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक केविन हैसेट ने बुधवार को एक न्यूज चैनल को बताया कि ट्रंप प्रशासन के पास पहले से ही 15 से अधिक देशों की ओर से बातचीत के प्रस्ताव हैं। हैसेट ने कहा कि अगला कदम यह निर्धारित करने का होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप वार्ता से क्या चाहते हैं। वहीं, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, कोई भी व्यापार समझौता अब विशिष्ट होगा, न कि देशों के समूह के बीच कोई व्यापक समझौता।
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चीन पर कुल 145 फीसदी टैरिफ
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक टैरिफ युद्ध को सिर्फ चीन-हांगकांग तक सीमित करते हुए चीन से होने वाले सभी तरह के आयात पर टैरिफ को बढ़ाकर 145 फीसदी कर दिया है। इससे दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं। व्हाइट हाउस ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि चीन को संयुक्त राज्य अमेरिका में सभी आयातों पर न्यूनतम 145 प्रतिशत टैरिफ दर का सामना करना पड़ेगा। एक दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वे चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 125 प्रतिशत कर रहे हैं, क्योंकि बीजिंग ने उनके पिछले शुल्कों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है। गुरुवार को व्हाइट हाउस ने बताया कि 125 प्रतिशत टैरिफ उस 20 प्रतिशत टैरिफ के अतिरिक्त है, जो राष्ट्रपति ने पहले अमेरिका को फेंटेनाइल की आपूर्ति करने में चीन की भूमिका के लिए चीन से आने वाले सामानों पर लगाया था।
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