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ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से आठ कंपनियां बाहर: अमेरिका में इंफोसिस-टीसीएस समेत इन पर गिरी गाज; भारत पर क्या असर?
Thu, 08 Oct 2026 08:52 PM IST
शिवम गर्ग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 08 Oct 2026 08:52 PM IST
सार
अमेरिका ने आठ आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से निलंबित कर दिया है। सरकार ने विदेशी कर्मचारियों के आंकड़ों का हवाला दिया। आखिर अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया? जानिए...
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इंफोसिस, टीसीएस समेत आठ कंपनियों पर अमेरिका ने लगाई रोक।
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
अमेरिका ने बड़ी आईटी कंपनियों पर बड़ा कदम उठाते हुए आठ कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम) से निलंबित कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस फैसले के बाद इन कंपनियों से जुड़े नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ेगी। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। इस दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के प्रमुख भी मौजूद थे।
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किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई?
सोंडरलिंग ने कहा कि दुनिया की कुछ बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित किया जा रहा है। इनमें कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी श्रम विभाग ने माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस कार्यक्रम से निलंबित किया है। इस फैसले के तहत इन कंपनियों से जुड़े किसी नए स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पहले से लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया रोक दी जाएगी।
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30 लाख विदेशी कर्मचारियों का दावा
अमेरिकी श्रम मंत्री ने इन कंपनियों के पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2009 से अब तक सिर्फ इन कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए हैं। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के कर्मचारियों के लिए 2.30 लाख से ज्यादा एच-1बी वीजा मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा एक लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणन भी जारी किए गए हैं। सोंडरलिंग ने दावा किया कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सैकड़ों हजारों नौकरियां प्रभावित हुईं।
माइक्रोसॉफ्ट पर जेडी वेंस ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप
इस कार्रवाई को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर भी निशाना साधा। उन्होंने कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया और एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका आने वाले विदेशी कर्मचारियों को लेकर सवाल उठाए। व्हाइट हाउस में फैसले की घोषणा के दौरान वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट में कर्मचारियों की छंटनी और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के बीच संबंध होने का दावा किया। वेंस ने कहा कि पिछले साल कंपनी ने करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि इसी दौरान उसे 6,300 एच-1B वीजा मिले। वेंस ने कहा कि अमेरिका में कोई दूसरी कंपनी इस व्यवस्था का माइक्रोसॉफ्ट से ज्यादा दुरुपयोग नहीं कर रही है।
H-1B वीजा फिर चर्चा में
अमेरिका में एच-1बी वीजा कार्यक्रम लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक इस कार्यक्रम को अमेरिकी कर्मचारियों के हितों से जोड़कर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां एच-1बी कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए करती हैं। दूसरी ओर, तकनीकी क्षेत्र की कंपनियां लंबे समय से इस कार्यक्रम को कुशल पेशेवरों की जरूरत पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण बताती रही हैं।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर क्या असर?
स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में आठ बड़ी आईटी कंपनियों को इस कार्यक्रम से निलंबित किए जाने से उनके विदेशी कर्मचारियों से जुड़े स्थायी रोजगार प्रमाणन आवेदनों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि निलंबित कंपनियों से जुड़े नए आवेदनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।