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US Tariffs: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्यों आया भारत का जिक्र? जानें असहमति रखने वाले जज ने क्या कहा
Fri, 20 Feb 2026 10:54 PM IST
देवेश त्रिपाठी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Fri, 20 Feb 2026 10:54 PM IST
सार
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क और रूसी तेल की खरीद पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगाया था। हालांकि, अब पारस्परिक शुल्क घटकर 18 प्रतिशत हो गया है और रूसी तेल खरीद पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को हटा दिया गया है।
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पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया। वहीं न्यायमूर्ति ब्रेट कैवनॉ ने अपने असहमति वाले मत में रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर लगाए गए टैरिफ का जिक्र किया।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों ने शुक्रवार को 6-3 के मत से पाया कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता है। न्यायमूर्ति क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल ए. एलिटो जूनियर और कैवनॉ ने अदालत के फैसले से असहमति जताई।
विदेशी आयात पर लगाए गए शुल्क विदेश मामलों से जुड़े
न्यायाधीश कैवनॉ ने कहा, 'विदेशी आयात पर ऐतिहासिक रूप से लगाए गए शुल्कों की तरह, इस मामले में विवादित आईईईपीए के तहत विदेशी आयात पर लगाए गए शुल्क भी विदेश मामलों से जुड़े हैं। सरकार के अनुसार, राष्ट्रपति ने आईईईपीए के तहत लगाए गए शुल्कों का इस्तेमाल चीन, यूनाइटेड किंगडम और जापान सहित अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार समझौतों में किया है।'
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उन्होंने अपनी राय में लिखा, 'सरकार का कहना है कि टैरिफ ने कुछ विदेशी बाजारों को अमेरिकी व्यवसायों के लिए अधिक सुलभ बनाने में मदद की है। विदेशी राष्ट्रों के साथ खरबों डॉलर के व्यापार सौदों में योगदान दिया है।'
भारत का जिक्र कर क्या बोले अमेरिकी न्यायाधीश?
उन्होंने लिखा, 'इसके अलावा इतिहास और टैरिफ के पारंपरिक उपयोगों के अनुरूप, राष्ट्रपति रूसी संघ और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रही अत्यंत संवेदनशील वार्ताओं के संबंध में अपने आईईईपीए अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।'
उन्होंने लिखा, 'इसी उद्देश्य से 6 अगस्त, 2025 को राष्ट्रपति ने भारत पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात करने के लिए शुल्क लगाया। वहीं, 6 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति ने भारत पर शुल्क कम कर दिया क्योंकि सरकार के अनुसार, भारत ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई थी।'
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों ने शुक्रवार को 6-3 के मत से पाया कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता है। न्यायमूर्ति क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल ए. एलिटो जूनियर और कैवनॉ ने अदालत के फैसले से असहमति जताई।
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विदेशी आयात पर लगाए गए शुल्क विदेश मामलों से जुड़े
न्यायाधीश कैवनॉ ने कहा, 'विदेशी आयात पर ऐतिहासिक रूप से लगाए गए शुल्कों की तरह, इस मामले में विवादित आईईईपीए के तहत विदेशी आयात पर लगाए गए शुल्क भी विदेश मामलों से जुड़े हैं। सरकार के अनुसार, राष्ट्रपति ने आईईईपीए के तहत लगाए गए शुल्कों का इस्तेमाल चीन, यूनाइटेड किंगडम और जापान सहित अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार समझौतों में किया है।'
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उन्होंने अपनी राय में लिखा, 'सरकार का कहना है कि टैरिफ ने कुछ विदेशी बाजारों को अमेरिकी व्यवसायों के लिए अधिक सुलभ बनाने में मदद की है। विदेशी राष्ट्रों के साथ खरबों डॉलर के व्यापार सौदों में योगदान दिया है।'
भारत का जिक्र कर क्या बोले अमेरिकी न्यायाधीश?
उन्होंने लिखा, 'इसके अलावा इतिहास और टैरिफ के पारंपरिक उपयोगों के अनुरूप, राष्ट्रपति रूसी संघ और यूक्रेन के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रही अत्यंत संवेदनशील वार्ताओं के संबंध में अपने आईईईपीए अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।'
उन्होंने लिखा, 'इसी उद्देश्य से 6 अगस्त, 2025 को राष्ट्रपति ने भारत पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात करने के लिए शुल्क लगाया। वहीं, 6 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति ने भारत पर शुल्क कम कर दिया क्योंकि सरकार के अनुसार, भारत ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई थी।'
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