फंस गया जो बाइडन का इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज, प्रोग्रेसिव धड़ा हुआ बेसब्र!
सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि व्हाइट हाउस रिपब्लिकन पार्टी से बातचीत कर इस मामले में आम सहमति बनाना चाहता है। वह ये धारणा नहीं बनने देना चाहता कि बाइडन प्रशासन ने सीनेट की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पारित कराया...
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रगतिशील आर्थिक एजेंडा फंसता हुआ दिख रहा है। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव खेमे की बेसब्री बढ़ रही है। अमेरिकी सीनेट की बजट समिति के अध्यक्ष और सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स ने अब खुलेआम कहा है कि अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज के लिए रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन जुटाने की राष्ट्रपति जो बाइडन की कोशिश से उनका धीरज टूट रहा है। वेबसाइट एक्सियोस.कॉम को दिए इंटरव्यू में सैंडर्स ने कहा- अमेरिकी जनता नतीजे चाहती है। उसे इस बात की चिंता नहीं है कि उसके लिए दोनों पार्टियां सहमत हैं या नहीं।
वेबसाइट एक्सियोस ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि सैंडर्स का बेसब्री जताना महत्वपूर्ण घटना है। बजट समिति के अध्यक्ष के रूप में सैंडर्स इस हैसियत में हैं कि वे बाइडन प्रशासन के लिए कई तरह के सिरदर्द पैदा कर सकते हैं। सीनेट की बजट प्रक्रिया पर उनका नियंत्रण है। इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल कर उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के विरोध को नजरअंदाज करते हुए राष्ट्रपति बाइडन के कोरोना राहत पैकेज को पारित कराया था।
राष्ट्रपति बाइडन ने लगभग सवा दो ट्रिलियन डॉलर का अमेरिकन जॉब्स प्लान घोषित किया है। इसे इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज के नाम से जाना जा रहा है। इसके तहत सड़क, पुल, रेलमार्ग, सस्ते आवास जैसे निर्माण के अलावा शिक्षा और बाल देखभाल जैसे क्षेत्रों के पुनर्निर्माण का इरादा जताया गया है। लेकिन रिपब्लिकन पार्टी इस योजना के बिल्कुल खिलाफ है। इसलिए सैंडर्स और डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रोग्रेसिव धड़ा चाहता है कि इस योजना को भी डेमोक्रेटिक पार्टी अपने बहुमत से उसी तरह पारित करा ले, जैसा उसने 1.9 ट्रिलियन डॉलर के कोरोना राहत पैकेज के मामले में किया था। ये नियम लागू होने पर साधारण बहुमत से प्रस्ताव पास हो सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के पास सदन में साधारण बहुमत है।
लेकिन व्हाइट हाउस की राय है कि कोरोना राहत पैकेज की तरह इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज आपातकालीन उपाय नहीं है। इसलिए बजट रिकॉन्सिलिएशन का नियम लागू कर इसे पास कराना उचित नहीं होगा। सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि व्हाइट हाउस रिपब्लिकन पार्टी से बातचीत कर इस मामले में आम सहमति बनाना चाहता है। वह ये धारणा नहीं बनने देना चाहता कि बाइडन प्रशासन ने सीनेट की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पारित कराया। लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव खेमे का कहना है कि इस पैकेज में कंपनियों और धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाने का जो प्रस्ताव है, उसे रिपब्लिकन पार्टी कभी स्वीकार नहीं करेगी। बाइडन प्रशासन ने इन्फ्राक्ट्रक्चर पैकेज पर होने वाले खर्च को जुटाने के लिए टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
विश्लेषकों का कहना है कि रिपब्लिकन पार्टी अधिक से अधिक उतने बजट को मंजूरी देने के लिए तैयार हो सकती है, जिसे परंपरागत रूप से जिसे इन्फ्रास्ट्रक्चर समझा जाता है, उस पर खर्च किया जाना है। इसके तहत सड़क, पुल, बंदरगाह आदि के पुनर्निर्माण के लिए वह राजी हो सकती है। लेकिन वह मानव संसाधन विकास की योजनाओं पर सहमत नहीं होगी। साथ ही वह टैक्स बढ़ाने के लिए राजी नहीं होगी। व्हाइट हाउस को चिंता इस बात की भी है कि खुद डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सीनेटर टैक्स बढ़ाने और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर इतना बड़ा खर्च करने के खिलाफ हैं। अगर उनमें एक ने भी सदन में प्रस्ताव का विरोध कर दिया, तो फिर उसे पास कराना असंभव हो जाएगा।
जानकारों के मुताबिक दोनों पार्टियों के बीच इस बुनियादी मतभेद से गतिरोध जैसी हालत बन गई है। इससे सैंडर्स और उनके साथी बेसब्र हो रहे हैं। व्हाइट हाउस बातचीत में समय लगाना चाहता है, जबकि वे इसे बेमतलब कोशिश मानते हैं। बताया जाता है कि इसे देखते हुए व्हाइट हाउस ने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव नेताओं से बातचीत शुरू की है। इस काम में उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को लगाया गया है। उन्होंने एलिजाबेथ वॉरेन, प्रमिला जयपाल, केटी पोर्टर आदि से बात की है। परिवहन मंत्री पीट बुटेजीज ने पिछले हफ्ते कांग्रेस के प्रोग्रेसिव कॉकस से मुलाकात की थी।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि दोनों तरफ की खींचतान के बीच फंसे व्हाइट हाउस को ये उम्मीद नहीं है कि अगले कुछ महीनों में ये प्रस्ताव पास हो पाएगा।