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अमेरिका की एशिया-प्रशांत रणनीति में कमजोर कड़ी है दक्षिण कोरिया?

Fri, 19 Mar 2021 03:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 19 Mar 2021 03:50 PM IST
सार

दक्षिण कोरिया के रुख पर चीन में संतोष का भाव देखा गया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने गुरुवार को ही दक्षिण कोरिया की तारीफ में एक टिप्पणी प्रकाशित की। इसमें कई विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि दक्षिण कोरिया ने विवेकपूर्ण रुख अख्तियार किया है...

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US Secretary of State Antony Blinken and Defense Minister Lloyd Austin did not achieved the aim in their South Korea visit
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चुंग यूई-योंग के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन - फोटो : Agency

विस्तार

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन को अपनी दक्षिण कोरिया यात्रा में पूरी कामयाबी नहीं मिली। दोनों नेताओं की यहां दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चुंग यूई-योंग और रक्षा मंत्री सुह वूक से हुई बातचीत के बाद जारी साझा बयान में चीन का नाम नहीं लिया गया। बताया जाता है कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दक्षिण कोरिया ने चीन के खिलाफ मोर्चा खोलने या चीन की घेराबंदी की अमेरिकी योजना में सक्रिय होने से इनकार कर दिया। विश्लेषकों ने इसकी तुलना ब्लिंकेन और ऑस्टिन की एक दिन पहले हुई जापान यात्रा से की है। वहां जारी साझा बयान में चीन का नाम लेकर इस क्षेत्र में उसके ‘जोर-जबरदस्ती वाले व्यवहार’ की कड़ी निंदा की गई थी।

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अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साझा बयान में केंद्रीय पहलू कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों पर रहा। दोनों देशों ने इस समस्या का सामना करने की साझा प्रतिबद्धता जताई। बयान में दोनों देशों ने व्यापार, स्वास्थ्य, परमाणु अप्रसार, परमाणु ऊर्जा, कोविड- 19 महामारी, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में मिल कर काम करने का इरादा जताया।
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जबकि एक दिन पहले टोक्यो में जारी साझा बयान में अमेरिका और जापान ने कहा था कि चीन का व्यवहार वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से मेल नहीं खाता और इससे दोनों देशों के लिए राजनीतिक, आर्थिक, सैनिक और तकनीकी चुनौतियां पैदा हो रही हैं। टोक्यो में एक प्रेस कांफ्रेंस में ब्लिंकेन ने दक्षिण चीन सागर से लेकर ताइवान, हांगकांग, और शिनजियान से जुड़े तमाम मसलों की चर्चा की थी। अमेरिकी मंत्रियों ने सियोल में भी प्रेस से बातचीत के दौरान चीन का जिक्र किया। लेकिन दक्षिण कोरिया के नेताओं ने चीन का नाम तक नहीं लिया।
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गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका का निकट सहयोगी रहा है। आज भी वहां अमेरिकी फौज मौजूद है। लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री चुंग सी-क्यून के सत्ता में आने के बाद से दक्षिण कोरिया की नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चुंग ने न सिर्फ चीन, बल्कि उत्तर कोरिया से भी संबंध सुधारने को प्राथमिकता दी है। ये दोनों बातें अमेरिका को पसंद नहीं आई हैं। हाल में चुंग सरकार ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिकों द्वारा दक्षिण कोरियाई महिलाओं के यौन शोषण का मामला उठाया और जापान से मुआवजे की मांग दोहराई थी। इससे जापान के साथ दक्षिण कोरिया का संबंध तनावपूर्ण हुआ है। अमेरिकी विदेश और रक्षा मंत्रियों के दौरे समय दक्षिण कोरिया के दिखे नरम रुख को इस पूरी पृष्ठभूमि से जोड़ कर देखा जा रहा है।  

दक्षिण कोरिया के रुख पर चीन में संतोष का भाव देखा गया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने गुरुवार को ही दक्षिण कोरिया की तारीफ में एक टिप्पणी प्रकाशित की। इसमें कई विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि दक्षिण कोरिया ने विवेकपूर्ण रुख अख्तियार किया है। नॉर्थ-ईस्ट एशियन स्ट्रेटेजिक स्टडीज इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ दा झियांग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा कि दक्षिण कोरिया के ताजा रुख के बाद उसके और चीन के बीच कोरोना महामारी को लेकर पिछले साल शुरू हुए सहयोग के जारी रहने का रास्ता खुल गया है। दूसरे विशेषज्ञों ने कहा है कि दक्षिण कोरिया ने अपने भू-राजनीतिक हितों को ज्यादा अहमियत दी है। इसका लाभ कोरियाई जनता को मिलेगा। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया और चीन के बीच आर्थिक सहयोग भी बढ़ा है।


हाल के समय में दक्षिण कोरिया में जनता के स्तर पर भी अमेरिका विरोधी भावनाएं देखने को मिली हैं। ब्लिंकेन और ऑस्टिन की यात्रा घोषित होने पर इस यात्रा के खिलाफ कुछ सिविल सोसायटी संगठनों ने प्रदर्शन आयोजित किए थे। इसीलिए कई विशेषज्ञों ने पहले ही कहा था कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन को घेरने की अमेरिका की रणनीति में दक्षिण कोरिया एक कमजोर कड़ी है। ब्लिंकेन और ऑस्टिन की यात्रा से संकेत मिला कि इस बात में दम है।

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