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US-Iran Deal: ईरानी फंड पर कतर संग काम कर रहा अमेरिका, हालिया शांति समझौते का हिस्सा है वित्तीय प्रोत्साहन
Sun, 21 Jun 2026 04:51 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 21 Jun 2026 04:51 AM IST
सार
अमेरिका और कतर ईरान के लिए मानवीय सहायता फंड जारी करने की संभावित योजना पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह पहल हालिया अमेरिका-ईरान शांति समझौते से जुड़ी है और इसका उद्देश्य शांति समझौते के तहत मानवीय मदद करना है।
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अमेरिका ईरान युद्धविराम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ईरान में मानवीय कार्यों के लिए रोके गए अरबों डॉलर के फंड को जारी करने की योजना बनाने के लिए अमेरिका अब कतर के साथ मिलकर काम करने पर विचार कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि यह शुरुआती वित्तीय प्रोत्साहन तेहरान और वाशिंगटन के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते का ही एक हिस्सा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, योजना का मकसद ईरान को दुनिया भर में रोकी गई अपनी अनुमानित 100 अरब डॉलर की नकदी का कुछ हिस्सा खर्च करने और इस्तेमाल करने की सुविधा देना है। जिसमें सबसे पहले कतर में रखे छह अरब डॉलर तक पहुंच शामिल है। समझौते के तहत ईरान के सेंट्रल बैंक द्वारा ऑर्डर किए गए मानवीय सामान कतर खरीदेगा। इससे ईरान को परोक्ष रूप से सीधी मदद मिल सकेगी।
फंडिंग पर वार्ता में मदद को स्विट्जरलैंड तैयार
कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह ईरान में मानवीय कार्यों के लिए फंड देने की बातचीत स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी तथा स्विस विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस के बीच हुई बातचीत के दौरान सामने आई। स्विस विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह बातचीत में मदद करने के लिए तैयार है।
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स्विट्जरलैंड जाएंगे ट्रंप के विशेष दूत: एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, मामले से जुड़े अमेरिकी और राजनयिक सूत्रों का हवाला देते हुए, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड जाने वाले हैं। यह यात्रा पश्चिम एशिया में तनाव खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के बीच हाल ही में घोषित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद अमेरिका-ईरान बातचीत के नए दौर की तैयारियों के तहत हो रही है।
ये भी पढ़ें: ब्रिक्स देशों के सुरक्षा प्रमुखों की बैठक कल: ईरान-चीन समेत कई देश होंगे शामिल, जानें क्या है मुख्य एजेंडा
पहली शर्त लागू न करने से ईरानियों का भरोसा घटा
ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़े समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा हालात-खासकर लेबनान पर इस्राइल के लगातार हमले जारी रहे, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि समझौते की पहली शर्त को लागू न करने से ईरानियों का भरोसा कम हुआ है।
लेबनान मोर्चे पर कार्रवाई रोकनी होगी
अमेरिका-ईरान एमओयू की पहली शर्त के अनुसार, दोनों पक्ष लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने पर सहमत होंगे। हिजबुल्ला के हमलों के बाद इस्राइली सेना ने बेका घाटी में उसके ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की।
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रिपोर्ट के मुताबिक, योजना का मकसद ईरान को दुनिया भर में रोकी गई अपनी अनुमानित 100 अरब डॉलर की नकदी का कुछ हिस्सा खर्च करने और इस्तेमाल करने की सुविधा देना है। जिसमें सबसे पहले कतर में रखे छह अरब डॉलर तक पहुंच शामिल है। समझौते के तहत ईरान के सेंट्रल बैंक द्वारा ऑर्डर किए गए मानवीय सामान कतर खरीदेगा। इससे ईरान को परोक्ष रूप से सीधी मदद मिल सकेगी।
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फंडिंग पर वार्ता में मदद को स्विट्जरलैंड तैयार
कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह ईरान में मानवीय कार्यों के लिए फंड देने की बातचीत स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी तथा स्विस विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस के बीच हुई बातचीत के दौरान सामने आई। स्विस विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह बातचीत में मदद करने के लिए तैयार है।
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स्विट्जरलैंड जाएंगे ट्रंप के विशेष दूत: एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, मामले से जुड़े अमेरिकी और राजनयिक सूत्रों का हवाला देते हुए, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड जाने वाले हैं। यह यात्रा पश्चिम एशिया में तनाव खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के बीच हाल ही में घोषित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद अमेरिका-ईरान बातचीत के नए दौर की तैयारियों के तहत हो रही है।
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पहली शर्त लागू न करने से ईरानियों का भरोसा घटा
ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई रोकने से जुड़े समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा हालात-खासकर लेबनान पर इस्राइल के लगातार हमले जारी रहे, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि समझौते की पहली शर्त को लागू न करने से ईरानियों का भरोसा कम हुआ है।
लेबनान मोर्चे पर कार्रवाई रोकनी होगी
अमेरिका-ईरान एमओयू की पहली शर्त के अनुसार, दोनों पक्ष लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने पर सहमत होंगे। हिजबुल्ला के हमलों के बाद इस्राइली सेना ने बेका घाटी में उसके ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की।