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अमेरिका में बंद होगा शिक्षा मंत्रालय: ट्रंप के फैसले के बाद कैसे चलेंगे शिक्षण संस्थान, कौन उठाएगा खर्च? जानें

Fri, 21 Mar 2025 05:43 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 21 Mar 2025 05:43 PM IST
सार

अमेरिका के शिक्षा मंत्रालय को बंद करने के फैसले के बाद वहां शिक्षा व्यवस्था कैसे चलेगी? इस फैसले का देश में शिक्षण संस्थानों पर क्या असर होगा? उनके खर्च कैसे चलेंगे? छात्रों और उनके अभिभावकों का क्या होगा? आइये जानते हैं...

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US President Donald Trump Orders Education Ministry dismantling what happens to students and Institutions
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला किया है। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान शिक्षा मंत्रालय को बंद करने के अपने वादे को निभाया है। गुरुवार को उन्होंने इससे जुड़े एक आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत अब संघीय स्तर पर शिक्षा मंत्रालय को खत्म किया जाना है। 
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ट्रंप के इस फैसले की पूरी दुनिया में चर्चा है। दरअसल, अमेरिका में शिक्षा व्यवस्था दुनिया में सबसे बेहतरीन स्तर की मानी जाती है। ऐसे में ट्रंप के इस फैसले को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। मसलन शिक्षा मंत्रालय को बंद करने के फैसले के बाद अमेरिका की शिक्षा व्यवस्था कैसे चलेगी? इस फैसले का देश में शिक्षण संस्थानों पर क्या असर होगा? उनके खर्च कैसे चलेंगे? छात्रों और उनके अभिभावकों का क्या होगा? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- क्या है अमेरिका का शिक्षा मंत्रालय, यह करता क्या है?
अमेरिका में शिक्षा मंत्रालय की स्थापना 1979 में तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर की तरफ से की गई थी। इसका मकसद अमेरिका में अलग-अलग राज्यों के साथ केंद्रीय स्तर पर शैक्षिक नीतियों की निगरानी और स्कूलों को वित्तीय मदद देना था। 

अमेरिका में शिक्षा व्यवस्था को चलाने का तरीका, भारत या अन्य देशों के मुकाबले काफी अलग है। अमेरिका में शिक्षा का अधिकतम भार केंद्र या संघ की सरकार के पास नहीं, बल्कि राज्य और जिला प्रशासन के ऊपर होता है। यानी अमेरिका में शिक्षा मंत्रालय का काम सरकारी स्कूलों को चलाना और उसका पाठ्यक्रम निर्धारित करना नहीं होता, यह जिम्मेदारी प्राथमिक तौर पर राज्यों और जिलों के प्रशासन की होती है। 
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  • संघीय शिक्षा मंत्रालय सरकारी और कुछ निजी स्कूलों की फंडिंग से जुड़े बेहद अहम कार्यक्रमों से जुड़ा रहता है। खासकर दिव्यांग छात्र-छात्राओं और कमजोर तबके के स्टूडेंट्स की शिक्षा के लिए फंड्स देने के मामले में।
  • शिक्षा मंत्रालय पूरे अमेरिका में नागरिक अधिकारों को लागू कराने के लिए भी जिम्मेदार होता है। केंद्रीय सरकार इस बाबत भी फंड्स जारी करती है कि स्कूलों में नस्ल और लैंगिक आधार पर भेदभाव को रोका जा सके। 
  • इतना ही नहीं शिक्षा मंत्रालय अमेरिकी स्कूलों का डाटा जुटाने और शिक्षा व्यवस्था में आ रही दिक्कतों को सुलझाने का भी काम करता है। 
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तो क्या शिक्षा मंत्रालय को राष्ट्रपति के आदेश पर ही बंद किया जा सकता है?
डोनाल्ड ट्रंप ने शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने का आदेश तो दे दिया है, लेकिन यह काम इतना भी आसान नहीं होने वाला। दरअसल, अमेरिका में मंत्रियों की नियुक्ति और इन्हें हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है, लेकिन मंत्रालयों को स्थापित करने, इनकी फंडिंग और बाकी चीजों की जिम्मेदारी अमेरिकी संसद के पास होती है। ऐसे में ट्रंप को शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने के लिए संसद की मंजूरी भी चाहिए होगी।

  • अमेरिकी संसद के उच्च सदन में ट्रंप को सुपरमेजौरिटी यानी 100 में से 60 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। ताजा आंकड़ों की बात करें तो चुनाव के बाद सीनेट में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। फिलहाल सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के 53 तो डेमोक्रेटिक पार्टी के 47 सांसद हैं। इस लिहाज से ट्रंप को शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने के लिए डेमोक्रेट पार्टी के 7 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी, जो कि दूर की कौड़ी साबित हो सकता है। 
  • इतना ही नहीं अमेरिकी संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी ट्रंप को शिक्षा मंत्रालय खत्म कराने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में मुश्किल आएगी। बीते साल जब एक अन्य विधेयक के साथ शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने के लिए एक संशोधन लाया गया था, तब रिपब्लिकन पार्टी के ही 60 सांसदों और पूरी डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसके खिलाफ वोट किया था। 

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इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने के अपने फैसले के साथ आगे बढ़े हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री लिंडा मैक्मेहन को आदेश दिया है कि वह इस एजेंसी को खत्म करने के लिए काम शुरू कर दें और संघ पर आने वाली सारी जिम्मेदारी (फंडिंग-व्यवस्था) को राज्यों और जिला प्रशासनों को हस्तांतरित कर दें। 

ट्रंप के इस आदेश में साफ नहीं है कि संघीय शिक्षा मंत्रालय के खत्म होने के बाद इसके कार्यक्रमों का क्या होगा या इसके कर्मचारियों को किसी और मंत्रालय में भेजा जाएगा या नहीं। इसके अलावा यह भी साफ नहीं है कि संघीय सरकार आगे वित्तीय मदद और छात्रों की तरफ से इस्तेमाल किए गए कर्ज के मुद्दे पर क्या करेंगे। ट्रंप के आदेश में शिक्षा मंत्रालय को पूरी तरह से खत्म करने की कोई समयावधि भी नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति के इस फैसले को अमेरिकी अदालतों में चुनौती दी जा सकती है। 

शिक्षा मंत्रालय खत्म हुआ तो छात्रों-अभिभावकों पर क्या पड़ेगा असर?
शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने से सैकड़ों स्कूलों को मिलने वाली वित्तीय सहायता खत्म हो जाएगी। इससे शिक्षकों और स्टूडेंट्स पर बराबर असर पड़ने की आशंका है। खासकर दिव्यांग छात्रों को बढ़ावा देने वाले और नस्लीय-लैंगिक विविधता बनाए रखने वाले स्कूलों पर इस फैसले का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। 

ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी शिक्षा मंत्रालय को खत्म क्यों करना चाहती है?
शिक्षा मंत्रालय की स्थापना होने के बाद से ही रिपब्लिकन पार्टी इसके खिलाफ रही है। डेमोक्रेट राष्ट्रपति जिमी कार्टर के दौर में ही रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर उभरे रोनाल्ड रीगन ने 1980 में चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने की बात कही थी। दरअसल, रिपब्लिकन पार्टी का तर्क है कि वह शिक्षा के केंद्रीयकरण के खिलाफ है और इसे राज्यों और स्थानीय प्रशासनों के हवाले ही कर देना चाहिए, जो कि अपनी जरूरत और आबादी की संरचना के हिसाब से शिक्षा से जुड़े सारे फैसले ले सकें। 

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में भी रिपब्लिकन पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का विरोध किया था। पार्टी ने मंत्रालय पर नागरिक अधिकारों की रक्षा के नाम पर बच्चों पर वोक (Woke) यानी उदारवादी राजनीतिक विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। साथ ही लैंगिक और नस्लीय मुद्दों पर भी इस विचारधारा का विरोध किया। 

ट्रंप ने अपने प्रचार अभियान के दौरान कहा था कि वह स्कूलों को नस्लीय भेदभाव को रोकने के लिए वित्तीय मदद देने की जगह नागरिक अधिकार से जुड़े केसों का सहारा लेंगे। उन्होंने इस एवज में दी जाने वाली मदद को नस्लभेद बढ़ाने वाला करार दिया है। इतना ही नहीं ट्रंप प्रशासन ने नस्लभेद के कथित आरोपों को लेकर कई कॉलेजों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।
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