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Donald Trump: ट्रंप का दावा- मैंने रुकवाए छह युद्ध, संघर्ष विराम नहीं कराया; पर क्या है सच्चाई? जानें

Wed, 20 Aug 2025 07:53 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 20 Aug 2025 07:53 AM IST
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सार
ट्रंप के इन दावों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं। मसलन जो आंकड़े बताए जा रहे हैं उनमें क्या सच्चाई है? ट्रंप संघर्षों को जिन तरीकों से रुकवाने की बात कह रहे हैं, उनकी क्या असलियत है? ट्रंप लगातार इन दावों को दोहरा क्यों रहे हैं? आइये जानते हैं...
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US President Donald Trump claims of stopping Conflicts and Wars fact checked and explained India Pakistan Iran
Donald Trump, Trump War Claims - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते करीब सात महीने से रूस-यूक्रेन संघर्ष को जल्द से जल्द रुकवाने का दावा करते आ रहे हैं। हालांकि, उनकी इन कोशिशों को अब तक सफलता नहीं मिली है। इस बीच ट्रंप ने कुछ और देशों के बीच जारी संघर्ष को पूरी तरह रुकवाकर शांति स्थापित करने की बात कही है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन का दावा है कि जनवरी में शपथ लेने के बाद से ट्रंप बीते छह महीने में छह संघर्ष रुकवा चुके हैं। ट्रंप ने सोमवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ बैठक में यहां तक दावा कर दिया कि उन्होंने जितने भी युद्ध रुकवाए, वह संघर्ष विराम नहीं थे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को भी सीजफायर की नहीं, बल्कि स्थायी शांति समझौते की जरूरत है। 


ट्रंप के इन दावों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं। मसलन जो आंकड़े बताए जा रहे हैं उनमें क्या सच्चाई है? ट्रंप संघर्षों को जिन तरीकों से रुकवाने की बात कह रहे हैं, उनकी क्या असलियत है? ट्रंप लगातार इन दावों को दोहरा क्यों रहे हैं? आइये जानते हैं...

पहले जानें- ट्रंप के जंग रुकवाने से जुड़े दावे क्या हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ सोमवार को होने वाली बैठक से पहले रूस-यूक्रेन के बीच शांति समझौता कराने को लेकर बयान दिया। इस दौरान उन्होंने कहा...



ट्रंप ने जब अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए अपना प्रचार अभियान शुरू किया था, तभी उन्होंने दावा किया था कि वे राष्ट्रपति बनने के 24 घंटे के अंदर रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध को रुकवा देंगे। हालांकि, अब उनके राष्ट्रपति पद संभालने के सात महीने बाद भी रूस-यूक्रेन के बीच जंग जारी है। 

अब जानें- क्या है ट्रंप के जंग रुकवाने के दावों की सच्चाई?
एक तरफ जहां डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को छह महीने में छह जंग रुकवाने का दावा किया तो वहीं उनके प्रशासन ने सात महीने में सात जंग रुकवाने की जानकारी दी है। मजेदार बात यह है कि जिन सात युद्धों की सूची जारी हुई है, उनमें से दो- सर्बिया-कोसोवो और मिस्र-इथियोपिया के बीच अस्थायी समझौते ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान कराए गए थे। इनमें से मिस्र-इथियोपिया के बीच संघर्ष को लेकर संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर तक नहीं हुए थे। 

ट्रंप प्रशासन की तरफ से संघर्ष रुकवाने को लेकर जो दावे किए जाते हैं उनमें से कुछ तो अभी रुके तक नहीं हैं। दूसरी तरफ ट्रंप के दावों के मुताबिक, रूस-यूक्रेन संघर्ष और इस्राइल-हमास के बीच चल रहा संघर्ष भी अब तक जारी है, जबकि ट्रंप इन्हें रुकवाने की बात कहते रहे हैं।

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ट्रंप जिन संघर्षों को रुकवाने का दावा कर रहे, उनकी मौजूदा स्थिति क्या?

1. अर्मेनिया-अजरबैजान

क्यों जारी था संघर्ष?
इन दोनों देशों के बीच 1980 से ही नगोरनो काराबाख को लेकर तनाव की स्थिति बरकरार थी, जो कि कई बार संघर्ष में भी बदल गई। 2023 में दोनों देशों के बीच जंग भी हुई, जिसमें अजरबैजान ने तुर्किये की मदद से नगोरनो काराबाख पर कब्जा कर लिया। 



 

क्या हैं मौजूदा हालात?
जहां ट्रंप का कहना है कि इस समझौते के बाद दोनों देश लंबे समय तक मित्र रहेंगे, तो वहीं विश्लेषकों का मत है कि दोनों ही देश अपनी जनता के हितों और उनकी मर्जी के आधार पर ही इस समझौते पर आगे बढ़ेंगे। दूसरी तरफ ईरान और रूस ने इस डील पर आपत्ति जताई है और कहा है कि अमेरिका इस क्षेत्र की भूराजनीतिक स्थिति बदलने की कोशिश में है। 

2. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो और रवांडा

क्यों जारी था संघर्ष?
यह दोनों देश बीते कई वर्षों से सीमापार संघर्ष में जुटे हैं। इसके चलते करोड़ों लोगों को अपने घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा है। यह लोग दूर-दराज के इलाकों में खराब स्थिति में रहने को मजबूर हैं। दरअसल, हालिया विवाद की वजह कॉन्गो में दुर्लभ खनिजों- सोना और कोल्टान की मौजूदगी है। कॉन्गो का आरोप है कि इन खनिजों के लिए रवांडा उसके खिलाफ हिंसा फैला रहे बागी गुट एम23 को समर्थन देता रहता है।

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कब हुआ समझौता?
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो और रवांडा के राष्ट्राध्यक्षों ने इस साल जून में व्हाइट हाउस पहुंचकर शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। ट्रंप ने जून में संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर कराते हुए कहा था कि आज हिंसा और तबाही खत्म होती है और यह क्षेत्र के लिए नई उम्मीद और मौके लेकर आएगा। 

क्या है मौजूदा स्थिति?
हालांकि, बीते कुछ दिनों में कॉन्गो की सेना और रवांडा समर्थिक एम23 बागी समूह ने एक-दूसरे पर ट्रंप की मध्यस्थता से कराए गए शांति समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। साथ ही सीमाओं पर सेना को जुटाने और हमले करवाने के आरोप भी लगाए हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच कई वर्षों के अविश्वास की वजह से शांति समझौता और क्षेत्र की शांति लगातार खतरे में है। 

3. भारत और पाकिस्तान

क्यों जारी था संघर्ष?
भारत और पाकिस्तान का हालिया संघर्ष तब शुरू हुआ, जब कुछ पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में घुसकर 26 पर्यटकों की बर्बर हत्या कर दी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान में स्थित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को तबाह कर दिया और सैकड़ों आतंकियों को मार गिराया। इसके बादपाकिस्तानी सेना द्वारा ड्रोन हमले की नाकाम कोशिश की गई। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस, फाइटर जेट और हथियारों को तबाह कर दिया। 

कब हुआ समझौता?
7 मई को शुरू हुए संघर्ष में निर्णायक चरण 10 मई को आया, जब भारत ने पाकिस्तान के एयरबेसों को नेस्तनाबूत कर दिया। पाकिस्तानी सेना के अफसरों की ओर से संघर्ष विराम की गुहार पर भारत ने संघर्ष को रोकने का फैसला किया। इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी दोनों पक्षों के शांति की अपील की थी। हालांकि, इससे पहले कि भारत की तरफ से संघर्ष रोकने को लेकर कोई एलान हो पाता, अमेरिकी राष्ट्रपति ने संघर्ष विराम कराने का श्रेय ले लिया और दावा किया कि उन्होंने ही दोनों देशों को जंग रोकने को मजबूर किया। ट्रंप का दावा है कि यह संघर्ष परमाणु युद्ध का रूप भी ले सकता था। 

क्या है मौजूदा स्थिति?
भारत लगातार ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करता आया है। पीएम मोदी संसद में कह चुके हैं कि भारत की तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष रोकने का फैसला बिना किसी बाहरी के दखल के लिया गया और इसमें सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की कोई भूमिका नहीं थी। माना जा रहा है कि भारत सरकार के इन दावों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को झूठा साबित कर दिया और उनकी नाराजगी का असर अब दोनों देशों के रिश्तों पर देखा जा रहा है। 

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4. इस्राइल और ईरान

क्यों जारी था संघर्ष?
इस्राइल ने 2023 में हमास के खिलाफ छेड़े गए संघर्ष के बाद पहले लेबनान में हिज्बुल्ला और फिर यमन में हूतियों के खिलाफ अभियान चलाकर ईरान के करीबी कहे जाने वाले इन संगठनों पर वार किए। इस साल जून में इस्राइल ने ईरान पर भी सीधा हमला कर दिया। इस दौरान इस्राइल ने ईरान के कई परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया।

कब हुआ समझौता?
  • इस्राइल-ईरान के बीच 12 दिन चले संघर्ष का अंत तब हुआ, जब अमेरिका ने उसके फोर्दो परमाणु केंद्र पर बी-2 बॉम्बर से बंकर बस्टर बम गिरा दिया। इसके बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए कतर में अमेरिकी बेस को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी रक्षा प्रणालियों ने हमले को नाकाम कर दिया।
  • इस टकराव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस्राइल और ईरान के बीच जंग रुकवाने की बात कही। हालांकि, खुद अमेरिका भी इस जंग का हिस्सा बन चुका था। ट्रंप दावा करते हैं कि उसके हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कई महीने पीछे ढकेल दिया है।

क्या है मौजूदा स्थिति?
संघर्ष विराम के दावों के बावजूद पश्चिमी एशिया में स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई है। इस्राइल का कहना है कि अगर ईरान फिर अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाता है तो वह उस पर हमला बोलेगा। दूसरी तरफ ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम के लिए बातचीत की मेज पर आना होगा, लेकिन इस ओर कोई प्रगति नहीं हुई है। ऐसे में अगर ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को तेज करता है तो स्थिति फिर बिगड़ सकती है।

5. कंबोडिया-थाईलैंड

क्यों जारी था संघर्ष?
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पूरा विवाद एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। दरअसल, 1907 में कंबोडिया जब फ्रांस के साम्राज्य के अंतर्गत आता था, तब सियाम और कंबोडिया के बीच सीमाएं तय की गई थीं। हालांकि, आगे चलकर 817 किमी लंबी इस सीमा को लेकर विवाद शुरू हो गए। खासकर कुछ ऐतिहासिक मंदिरों को लेकर दोनों देशों में यह विवाद खासा गहरा गया। 

दोनों देशों के बीच मौजूदा विवाद जून-जुलाई के बीच सीमापार घुसपैठ और जबरन फायरिंग करने की घटना के आरोपों से जुड़ा है। दरअसल, सीमा के पास ही कुछ थाई सैनिकों के लगातार मारे जाने और घायल होने के बाद थाईलैंड की वायुसेना ने सीमा पर एफ-16 लड़ाकू विमान तैनात कर दिए थे और सैनिकों की संख्या भी बढ़ा दी थी। जवाब में कंबोडिया भी टकराव के लिए तैयार था। 

कब हुआ समझौता?
  • कंबोडिया-थाईलैंड के बीच पांच दिन तक सीमापार गोलीबारी के बाद जुलाई में ही संघर्ष विराम पर सहमति बन गई। हालांकि, तब तक सीमाई इलाकों से हजारों लोगों को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। 
  • इस संघर्ष विराम के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को वजह माना जाता है। अमेरिका का दावा है कि जब कंबोडिया-थाईलैंड को दोनों देशों से व्यापार न करने की धमकी दी गई, तो दोनों बातचीत की मेज पर आए।

क्या है मौजूदा स्थिति?
इन दोनों देशों ने मलयेशिया में बैठक के बाद संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, बीते दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम तोड़ने के आरोप लगाए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि सदियों से जारी यह टकराव मंदिरों और सीमाओं की समझ को लेकर फिर भड़क सकता है। 

6. मिस्र-इथियोपिया (ट्रंप के पहले कार्यकाल में)

क्यों हुआ था संघर्ष?
मिस्र और इथियोपिया के बीच राजनयिक स्तर का संघर्ष इथियोपिया की ओर से नील नदी पर बनाए जाने वाले- ग्रैंड इथियोपियन रेनेसा डैम (GERD) को लेकर शुरू हुआ था। मिस्र को डर है कि इस बांध की वजह से उसकी पानी की जरूरतों पर असर पड़ सकता है। 

कब हुआ समझौता?
  • व्हाइट हाउस के दावों के उलट इस संघर्ष को लेकर दोनों देशों में कभी संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए, क्योंकि जंग जैसी स्थिति कभी पैदा ही नहीं हुई। यह सिर्फ राजनयिक स्तर का संघर्ष था, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे को धमकी दे रहे थे। 
  • अमेरिका ने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान दोनों में शांति समझौता कराने की कोशिश की। हालांकि, इथियोपिया ने इससे कदम पीछे खींच लिए। बाद में जब ट्रंप ने कहा कि मिस्र आगे इथियोपिया के बांध को तबाह कर सकता है तो इथियोपिया ने आरोप लगाया कि ट्रंप युद्ध भड़काने का काम कर रहे हैं। 

अभी क्या है स्थिति?
मिस्र और इथियोपिया अभी भी इथियोपियाई बांध के सही इस्तेमाल को लेकर समझौते की कोशिश कर रहे हैं। मिस्र ने जुलाई में इथियोपिया पर आरोप लगाया था कि वह राजनीतिक चाह के अनुसार किसी डील पर नहीं पहुंचना चाहता। 

7. सर्बिया और कोसोवो (ट्रंप के पहले कार्यकाल में)

क्यों हुआ था संघर्ष?
2008 में कोसोवो ने सर्बिया से स्वतंत्रता घोषित कर दी थी। इसके बाद से ही दोनों पक्षों के बीच जंग शुरू हो गई। सर्बिया ने अब तक कोसोवो की स्वतंत्रता को मान्यता नहीं दी है और जंग लगातार जारी रही।

कब हुआ समझौता?
2020 में ट्रंप प्रशासन ने दोनों पक्षों के बीच एक सीमित शांति समझौता कराया था। इसे वॉशिंगटन समझौता नाम दिया गया था और इसे दोनों देशों में सामान्य आर्थिक रिश्ते लाने के लिए लागू कराया गया था। 

अभी क्या स्थिति?
सर्बिया और कोसोवो के बीच विवाद अभी भी नहीं सुलझा है। अमेरिका के नेतृत्व वाला नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) लगातार दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने की अपील करता रहा है।

क्यों लगातार संघर्ष विराम के दावों को दोहरा रहे ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक कई मौकों पर सोशल मीडिया से लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कह चुके हैं कि अलग-अलग देशों के बीच शांति स्थापित कराने के बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था- मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। मुझे भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, मुझे सर्बिया और कोसोवो के बीच युद्ध रुकवाने के लिए पुरस्कार नहीं मिलेगा। मुझे मिस्र और इथियोपिया के बीच शांति बनाए रखने के लिए पुरस्कार नहीं मिलेगा। मुझे पश्चिम एशिया में अब्राहम समझौते के लिए नोबल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा।  

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अब तक इस्राइल, पाकिस्तान, कंबोडिया की सरकारें नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर चुकी हैं। इसके अलावा हाल ही में अजरबैजान और अर्मेनिया ने भी मध्यस्थता के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग की थी। ट्रंप खुद भारत के दावों के विपरीत भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम का दावा करते हैं। 

उन्होंने कहा कि मुझे अब तक नोबल शांति पुरस्कार 4-5 बार मिल जाना चाहिए था लेकिन वे मुझे यह पुरस्कार नहीं देंगे क्योंकि वे इसे केवल लिबरल को देते हैं। उन्होंने कहा कि मैं चाहे कुछ भी कर लूं, चाहे रूस-यूक्रेन और इस्राइल-ईरान हो, परिणाम जो भी हों मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा।

गौरतलब है कि ट्रंप के लिए इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लेकर पाकिस्तान की सरकार तक ने नोबेल शांति पुरस्कार की मांग की है। 
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