नेपाल में आपदा के बाद कैबिनेट की आपात बैठक: सिचुआन भूकंप के बाद दोबारा बाढ़ का नया अलर्ट, अब जमीनी हालात क्या?
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने रसुवा बाढ़ से हुए नुकसान पर मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई। बाढ़ से 469 लोगों की मौत हुई और नेपाली सेना ने जलविद्युत सुरंग से दो लोगों को बचाया। तिब्बत में बांध टूटने की चेतावनी से चिंता बढ़ी, 26 भारतीय और विदेशी नागरिक लापता।
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नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने शुक्रवार को सिंह दरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई। यह बैठक 26 अगस्त को रसुवा के भोटेकोशी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ से हुए नुकसान पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए थी। इसमें बचाव, राहत और पुनर्निर्माण प्रयासों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) नेपाल ने फेसबुक पर यह जानकारी दी।
नेपाल इस प्राकृतिक विपदा में 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा पर अचानक आई बाढ़ के कारण के कारण फंसा। इसने भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में पानी, गाद और पत्थरों का शक्तिशाली बहाव भेजा, जिससे व्यापक तबाही हुई। नेपाल पुलिस के अनुसार, शुक्रवार तक आपदा में मृतकों की संख्या 469 हो गई है, जबकि 1,545 लोग घायल हुए और बचाए गए। सबसे अधिक मौतें चितवन जिले में (178) दर्ज की गईं, इसके बाद एनपी ईस्ट (110), गोरखा (44) और रसुवा (12) रहे। अधिकारियों ने रसुवा से 644, नुवाकोट से 898 और धाडिंग से तीन लोगों को सफलतापूर्वक बचाया है। पीएमओ ने बताया कि नेपाली सेना ने बाढ़ के बाद रसुवा में एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग के अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान तेज कर दिया है। सेना ने अब तक सुरंग से दो लोगों को सुरक्षित बचाया है।
क्या तिब्बत में बांध टूटने से बढ़ी नेपाल की चिंता?
शुक्रवार को चीन के सिचुआन में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे नेपाल में एक और बाढ़ की चेतावनी जारी हुई। नेपाल पुलिस ने बताया कि ऊपर से पानी के भारी बहाव से नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका के कारण नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र को फिर से खाली कराया जा रहा है। नेपाल पुलिस ने एक्स पर एक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि तिब्बत की ओर एक बांध फिर से टूट गया है। सभी सुरक्षाकर्मी, बचावकर्मी और आम जनता को तुरंत सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने का अनुरोध किया गया है।
बचाव अभियान में क्या चुनौतियां आ रही हैं?
प्रतिनिधि सभा में विपक्ष के नेता भीष्म राज अंगदेम्बे ने कहा कि नेपाल की सेना भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद बचाव अभियान जारी रखे हुए है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि यहां का भूभाग अभियानों के लिए मौसम की स्थिति को प्रतिकूल बनाता है। केंद्र, प्रांतीय और स्थानीय सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। दो सेना हेलीकॉप्टर और निजी क्षेत्र के अन्य हेलीकॉप्टर भी अभियान में तैनात हैं। त्रिशूली से रसुका तक बन रही सड़क का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। सभी जेसीबी मशीनें वापस बुला ली गई हैं और सड़क निर्माण का काम बंद कर दिया गया है।
कितने भारतीय और विदेशी नागरिक लापता हैं?
अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद 26 गुजराती फंसे और संपर्क से बाहर हैं। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या बढ़कर 26 हो गई है। इनमें 17 भारतीय मूल के विदेशी नागरिक हैं, जिनमें नौ अमेरिकी, पांच कनाडाई, एक ऑस्ट्रेलियाई और दो न्यूजीलैंडवासी शामिल हैं। बाकी भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से अधिकांश अहमदाबाद और आनंद से हैं। सूरत के परेश पटेल, ज्योति पटेल और मीनाक्षी रमानी 23 अगस्त को नेपाल के लिए निकले थे। उनका अंतिम स्थान नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पता चला था, जिसके बाद संपर्क टूट गया। आनंद के दो पर्यटक कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और तब से संपर्क से बाहर हैं। एसईओसी ने सभी 26 को 'लापता/संपर्क से बाहर' के रूप में सूचीबद्ध किया है। राज्य प्रशासन केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर उनके ठिकाने का पता लगाने का प्रयास कर रहा है।