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US चुनाव में व्यापक बदलाव की पहल: अनिवार्य नागरिकता सहित कई अहम कार्यकारी आदेश लागू, भारत-ब्राजील का भी जिक्र
Wed, 26 Mar 2025 03:21 AM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 26 Mar 2025 03:21 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे और अंतिम कार्यकाल में लगातार कड़े फैसले ले रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में ट्रंप ने देश के चुनावों में बड़े बदलावों की पहल की है। उन्होंने नागरिकता की अनिवार्यता सहित अमेरिकी चुनावों में व्यापक बदलाव के लिए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के चुनावों में आमूलचूल परिवर्तन की तैयारी की है। उन्होंने व्यापक कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर आगे की कार्रवाई के रास्ते खोल दिए हैं। अब संघीय चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण के बिना पंजीकरण नहीं कराया जा सकेगा। डाक से मतदान को लेकर नियमों में भी बदलाव होगा। ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश के मुताबिक चुनाव के दिन तक सभी मतपत्र प्राप्त होने पर ही उन्हें गिना जाएगा। ट्रंप के ताजा आदेश में कहा गया है कि अमेरिका 'बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा लागू करने में विफल रहा है।'
ट्रंप प्रशासन ने संघीय वित्तीय मदद वापस लेने की धमकी भी दी
नए कार्यकारी आदेश जारी होने के बाद संघीय प्रशासन ने राज्यों से मतदाता सूचियों को साझा करने और चुनाव अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए संघीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया है। सहयोग न करने पर राज्यों से संघीय वित्तीय मदद वापस लेने की धमकी भी दी गई है। अगर राज्यों के चुनाव अधिकारी संघीय आदेशों का अनुपालन नहीं करेंगे तो संघीय वित्त पोषण रोकी जा सकती है।
ये भी पढ़ें- US Ukraine Ties: अमेरिका-यूक्रेन में बड़ा समझौता, काला सागर में व्यावसायिक जहाजों पर हमले रोकने पर बनी सहमति
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चुनावों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोप
राष्ट्रपति ट्रंप को इन फैसलों के कारण देश के मताधिकार संगठनों की ओर से तीव्र विरोध और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि ट्रंप अक्सर ऐसे दावे करते हैं कि अमेरिका के चुनावों में धांधली हो रही है। 2020 में चुनाव नतीजे आने से पहले ही डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बाइडन के खिलाफ उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए थे। चार साल पहले मिली मात के बाद से ही ट्रंप मतदान से जुड़े कई कानूनों का मुखर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।
आदेश में भारत का जिक्र
आदेश में भारत और ब्राजील को उन्नत मतदाता पहचान प्रणाली लागू करने वाले देशों के उदाहरण तौर पर दिखाया गया। इसमें कहा गया कि स्वशासन में अग्रणी होने के बावजूद अमेरिका अब आधुनिक, विकसित देशों के साथ-साथ अभी भी विकासशील देशों द्वारा नियोजित बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा को लागू करने में विफल रहा है। उदाहरण के लिए भारत और ब्राजील मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए बड़े पैमाने पर स्व-सत्यापन पर निर्भर करता है।
ये भी पढ़ें- India-US Trade Talk: 'अमेरिका से व्यापार समझौते पर भारत को सतर्क रहने की जरूरत', जीटीआरआई की चेतावनी
हस्ताक्षर के बाद ट्रंप बोले- आने वाले सप्ताह में और अधिक कार्रवाई
यह भी दिलचस्प है कि विशेष रूप से ट्रंप मेल वोटिंग पर बात करते हैं। उन्होंने बिना किसी सबूत के तर्क दिया है कि यह असुरक्षित है और इससे धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है। हालांकि, इस साल चुनाव में मिली जीत के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर अपना रुख बदल दिया है, क्योंकि रिपब्लिकन नेताओं सहित समर्थक मतदाताओं के बीच इसकी लोकप्रियता है। अमेरिकी चुनाव पर नजर रखने वाले लोगों के मुताबिक धोखाधड़ी के मामले दुर्लभ हैं। इनका दायरा सीमित है और मामले उजागर होने के बाद देश के कानून के मुताबिक मुकदमे भी चलाए जाते हैं। मंगलवार को हस्ताक्षर के बाद ट्रंप ने कहा कि आने वाले सप्ताह में चुनाव संबंधी और अधिक कार्रवाई की जाएगी।
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ट्रंप प्रशासन ने संघीय वित्तीय मदद वापस लेने की धमकी भी दी
नए कार्यकारी आदेश जारी होने के बाद संघीय प्रशासन ने राज्यों से मतदाता सूचियों को साझा करने और चुनाव अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए संघीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया है। सहयोग न करने पर राज्यों से संघीय वित्तीय मदद वापस लेने की धमकी भी दी गई है। अगर राज्यों के चुनाव अधिकारी संघीय आदेशों का अनुपालन नहीं करेंगे तो संघीय वित्त पोषण रोकी जा सकती है।
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चुनावों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोप
राष्ट्रपति ट्रंप को इन फैसलों के कारण देश के मताधिकार संगठनों की ओर से तीव्र विरोध और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि ट्रंप अक्सर ऐसे दावे करते हैं कि अमेरिका के चुनावों में धांधली हो रही है। 2020 में चुनाव नतीजे आने से पहले ही डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बाइडन के खिलाफ उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए थे। चार साल पहले मिली मात के बाद से ही ट्रंप मतदान से जुड़े कई कानूनों का मुखर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं।
आदेश में भारत का जिक्र
आदेश में भारत और ब्राजील को उन्नत मतदाता पहचान प्रणाली लागू करने वाले देशों के उदाहरण तौर पर दिखाया गया। इसमें कहा गया कि स्वशासन में अग्रणी होने के बावजूद अमेरिका अब आधुनिक, विकसित देशों के साथ-साथ अभी भी विकासशील देशों द्वारा नियोजित बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा को लागू करने में विफल रहा है। उदाहरण के लिए भारत और ब्राजील मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए बड़े पैमाने पर स्व-सत्यापन पर निर्भर करता है।
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हस्ताक्षर के बाद ट्रंप बोले- आने वाले सप्ताह में और अधिक कार्रवाई
यह भी दिलचस्प है कि विशेष रूप से ट्रंप मेल वोटिंग पर बात करते हैं। उन्होंने बिना किसी सबूत के तर्क दिया है कि यह असुरक्षित है और इससे धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलता है। हालांकि, इस साल चुनाव में मिली जीत के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर अपना रुख बदल दिया है, क्योंकि रिपब्लिकन नेताओं सहित समर्थक मतदाताओं के बीच इसकी लोकप्रियता है। अमेरिकी चुनाव पर नजर रखने वाले लोगों के मुताबिक धोखाधड़ी के मामले दुर्लभ हैं। इनका दायरा सीमित है और मामले उजागर होने के बाद देश के कानून के मुताबिक मुकदमे भी चलाए जाते हैं। मंगलवार को हस्ताक्षर के बाद ट्रंप ने कहा कि आने वाले सप्ताह में चुनाव संबंधी और अधिक कार्रवाई की जाएगी।
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