India-US Trade Talk: 'अमेरिका से व्यापार समझौते पर भारत को सतर्क रहने की जरूरत', जीटीआरआई की चेतावनी
India-US Trade Talk: भारत के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से किए गए किसी भी व्यापार समझौते को कांग्रेस में संशोधन या अस्वीकृति का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच जीटीआरआई नाम आर्थिक थिंक टैंक ने भारतीय अधिकारियों को बातचीत में सावधान रहने की सलाह दी है। जीटीआरआई ने क्या कहा है, आइए जानें।
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अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान भारत को सावधान रहना होगा, क्योंकि अमेरिका में फास्ट ट्रैक ट्रेड अथॉरिटी (Fast Track Trade Authority) नहीं होने के कारण समझौते में किसी भी बड़े बदलाव के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत पड़ सकती है। आर्थिक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने दोनों देशों के बीच व्यापार पर वार्ता शुरू होने के खबरों के बीच यह बात कही है।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका की पोस्ट-एफटीए सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के कारण, अमेरिका को किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भी फिर से मोलभाव करने का मौका मिल जाता है। बातचीत के दौरान अमेरिकी अधिकारी भारत से घरेलू कानून में बदलाव, नियामकीय सुधार और नीतिगत बदलाव से जुड़े ऐसे मांग कर सकते हैं, जिससे देश की संप्रभुता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा, "भारत को अमेरिका से बातचीत में न केवल कूटनीतिक कौशल दिखाने की जरूरत है। इसके अलावे हमें अमेरिका की व्यापारिक नीतियों में मौजूद कानूनी असमानताओं से भी सतर्क रहना होगा।"
अमेरिका से बातचीत क्यों है भारत के लिए चिंता की बात?
अमेरिका में फास्ट ट्रैक ट्रेड अथॉरिटी नामक प्राधिकरण 2021 से समाप्त हो चुका है। इसके कारण, अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से किए गए किसी भी व्यापार समझौते को कांग्रेस में संशोधन, टलने या अस्वीकृति का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, किसी भी व्यापार समझौते में अमेरिका एकतरफा यह तय करता है कि समझौते के तहत भागीदार देश ने अपनी सभी शर्तें पूरी की हैं या नहीं। अमेरिकियों ने प्रक्रिया का अतीत में कई देशों पर अतिरिक्त शर्तें थोपने के लिए इस्तेमाल किया है।
श्रीवास्तव ने कहा, "ये दोनों कारण व्यापार समझौते से जुड़ी गंभीर अनिश्चितता पैदा करते हैं। अमेरिका समझौते में बाद में बदलाव कर सकता है या अतिरिक्त मांगें रख सकता है। ऐसे में भारत को एफटीए वार्ता में अत्यधिक सतर्क रहने की जरूरत है।" इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 2 अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ लगाने की योजना के मद्देनजर, भारत और अमेरिका के अधिकारी बुधवार से व्यापार समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू कर रहे हैं।