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Indo-Pacific: हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका बढ़ाने में सहयोग करेगा अमेरिका, सेना के साथ काम करने पर भी जोर

Mon, 31 Oct 2022 05:09 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 31 Oct 2022 05:09 AM IST
सार

पेंटागन के एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने कहा कि जनवरी 2021 में सत्ता में आने के साथ ही राष्ट्रपति बाइडन के प्रशासन ने भारत-अमेरिकी रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत व अमेरिकी सेना के साथ काम करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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US partnering with India to enable it play broader stabilising role in Indo-Pacific
भारत-अमेरिका रक्षा संबंध (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

रणनीतिक महत्व रखने वाले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में भारत की भूमिका बढ़ाने के लिए अमेरिका साझेदारी करेगा। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के अनुसार भारत हिंद महासागर में पहले ही सुरक्षा मुहैया  करवा रहा  प्रमुख देश है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए भारत भी रक्षा आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है।

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पेंटागन के एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने कहा कि जनवरी 2021 में सत्ता में आने के साथ ही राष्ट्रपति बाइडन के प्रशासन ने भारत-अमेरिकी रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत व अमेरिकी सेना के साथ काम करने पर भी जोर दिया जा रहा है। अपनी सेनाओं के तीनों अंगों का साझा सैन्य अभ्यास इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल थी और भविष्य की चुनौतियों की तैयारी करने में मदद मिली। पेंटागन के अनुसार भावी चुनौतियों के लिए दोनों को संयुक्त कदम उठाने होंगे। यह कदम क्या होंगे, इस बारे में विस्तृत जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि कई सैन्य अभ्यास प्राकृतिक आपदाओं व अन्य संकट को लेकर हुए हैं।
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क्वाड (क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग) भी ऐसी ही एक आपदा हिंद महासागर की सुनामी के बाद शुरू हुआ। फायदा यह मिला कि भविष्य में आपदा आने पर दोनों देश तत्काल राहत पहुंचाने में सक्षम हैं। क्वाड को पेंटागन ने आपसी सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि आसियान व अन्य बहुत पक्षीय फोरम पर भी मिलकर सहयोग करने के रास्ते खोजे जा रहे हैं। ला पेरोज सैन्य अभ्यास इसका उदाहरण है।
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नई तकनीकों पर साथ काम
आधुनिक युद्ध शैली में नई तकनीकों का महत्व बढ़ा है, पेंटागन के अनुसार भारत-अमेरिका इसे समझ चुके हैं, साथ काम कर रहे हैं। अंतरिक्ष व साइबर-स्पेस सबसे अहम हैं।

  • पिछले वर्ष इन दोनों क्षेत्रों व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रक्षा सहयोग पर वार्ता हुई। अंतरिक्ष स्थिति-जन्य सजगता पर नया समझौता भी हुआ।


नौसैनिक सहयोग पर जोर
सैन्य कार्रवाइयों के परिपेक्ष्य में ज्यादा जोर नौसैनिक सहयोग पर दिया जा रहा है। पिछले साल 2 प्लस 2 वार्ता में इस पर चर्चा हुई और परिणाम चार्ल्स ड्रू जहाज को यात्रा के बीच के रिपेयर के लिए चेन्नई में रोकने के रूप में नजर आया।

  • भविष्य में दोनों नौसेनाओं को बेहतर रसद व संसाधन और संचालन में सहयोग मिलेगा।
  • भारत ने कंबाइंड मेरिटाइम फोर्स बहरीन से जुड़ने का निर्णय लिया। यह भी अमेरिका और नई दिल्ली का बहुपक्षीय सहयोग पर आगे बढ़ने का उदाहरण है।

भारत का विश्वसनीय साझेदार बनना है हमें
पेंटागन अधिकारी ने कहा कि भारत का विश्वसनीय साझेदार बनना अमेरिका की प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए भारत की रक्षा जरूरतों में जहां भी संभव हो, अमेरिका सहयोग दे रहा है।

  • अमेरिकी अधिकारी भारत में अपने समकक्षों से तात्कालिक रक्षा जरूरतों को लेकर नियमित बात कर रहे हैं। रक्षा सौदों और समझौतों का पुराना रिकॉर्ड भी मजबूत रहा है।


रणनीतिक साझेदारी हुई मजबूत : संधू
अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साथ आने से दोनों देशों के संबंधों को दृढ़ता और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच लगातार संवाद भी हो रहा है, जो संबंधों को दिशा दे रहा है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय व नागरिक मामलात संकुल में शनिवार को हुई कॉन्फ्रेंस ‘इंडिया एट 75’ में संधू मुख्य वक्तव्य दे रहे थे।

संधू ने कहा कि राजनीतिक ही नहीं, नागरिक संबंध, कारोबार, अध्ययन, शोधार्थियों के बीच संपर्क से भी इस सहयोग की बुनियाद मजबूत बनेगी। दोनों देशों के संबंध स्केल, स्पीड और स्किल से परिभाषित हो रहे हैं। स्केल का उदाहरण रोटावायरस के 1 डॉलर में मिल रहे रोटावैक टीके में है, जो पहले 60 डॉलर का था।



अहम रणनीतिक साझेदारियों में दोनों देश
क्वाड : लंबे समय से प्रस्तावित क्वाड का गठन भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया व जापान ने नवंबर 2017 में किया। चीन की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच इसका लक्ष्य नई रणनीति बनाकर अहम सामुद्रिक मार्गों को किसी के प्रभाव से मुक्त रखना है। चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, इनमें ताइवान, फिलीपींस, ब्रूनेई, मलयशिया, वियतनाम के दावे वाले क्षेत्र भी हैं। चीन ने कृत्रिम द्वीप तक बना दिए ताकि अपने सैन्य केंद्र स्थापित कर सके। पूर्वी चीन सागर में उसके क्षेत्र को लेकर जापान के साथ विवाद हैं।

आईपीईएफ : इसे 23 मई को भारत व अमेरिका सहित हिंद-प्रशांत के 14 देशों ने शुरू किया। बाकी देश ऑस्ट्रेलिया, ब्रूनेई, फिजी, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलयशिया, न्यूजीलैंड, फिलिपींस, सिंगापुर, थाईलैंड व वियतनाम हैं। इसका लक्ष्य आर्थिक साझेदारी बढ़ाना है।

आई2यू2 : भारत, इस्राइल, यूएई व अमेरिका ने अक्तूबर 2021 में यह समूह बनाया। लक्ष्य चारों देशों के कॉरपोरेट जगत को साथ लाना, निवेश बढ़ाना व जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा के लिए नई पहल करना है।

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