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H-1B: 'IT उद्योग होगा तबाह, कुशल कामगारों को दूर करने का भयावह प्रयास'; ट्रंप के फैसले का अमेरिकी कर रहे विरोध

Sun, 21 Sep 2025 05:57 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, न्यूयॉर्क/वाशिंगटन
एजेंसी, न्यूयॉर्क/वाशिंगटन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 21 Sep 2025 05:57 AM IST
सार

सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने का ट्रंप का फैसला बेहद कुशल कामगारों को अमेरिका से दूर करने का एक भयावह प्रयास है। इन कुशल कामगारों ने लंबे समय से हमारे कार्यबल को मजबूत किया है, नवाचार को बढ़ावा दिया है और लाखों अमेरिकियों को रोजगार देने वाले उद्योगों की स्थापना में मदद की है।

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US lawmakers and community leaders protesting Donald Trump decision to impose 100000 Dollar fee on H-1B visa
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिकी सांसदों और सामुदायिक नेताओं ने एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को विवेकहीन और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि इस कदम का सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने का ट्रंप का फैसला बेहद कुशल कामगारों को अमेरिका से दूर करने का एक भयावह प्रयास है। इन कुशल कामगारों ने लंबे समय से हमारे कार्यबल को मजबूत किया है, नवाचार को बढ़ावा दिया है और लाखों अमेरिकियों को रोजगार देने वाले उद्योगों की स्थापना में मदद की है। कृष्णमूर्ति ने कहा कि कई एच-1बी वीजा धारक अंततः नागरिक बन जाते हैं और ऐसे व्यवसाय शुरू करते हैं जिनसे अमेरिका में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां सृजित होती हैं। जब दूसरे देश वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने की होड़ में लगे हैं तो अमेरिका को भी अपने कार्यबल को मजबूत बनाने के साथ-साथ आव्रजन प्रणाली को आधुनिक बनाना चाहिए। अमेरिका को ऐसी बाधाएं खड़ी नहीं करनी चाहिए जो हमारी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को कमजोर करें।
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छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को कुचल देगा: भुटोरिया
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान उनके सलाहकार रहे और आव्रजन नीति पर एशियाई-अमेरिकी समुदाय के नेता अजय भुटोरिया ने ट्रंप के इस फैसले से अमेरिकी प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त पर संकट मंडराने की चेतावनी दी। भूटोरिया ने कहा, दुनिया भर से शीर्ष प्रतिभाओं को आकर्षित करने वाले एच-1बी कार्यक्रम के तहत फिलहाल 2000 से 5000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लिया जा रहा था। ऐसे में कुल शुल्क में भारी वृद्धि होने से इसपर अभूतपूर्व संकट मंडरा रहा है, जो प्रतिभाशाली कामगारों पर निर्भर छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को कुचल देगा। इस कदम से वे कुशल पेशेवर दूर हो जाएंगे जो सिलिकॉन वैली को शक्ति प्रदान करते हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर का योगदान देते हैं।

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बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण फैसला : खंडेराव कांद
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज के खंडेराव कांद ने कहा कि एच1बी वीजा पर 100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाया जाना एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। इसका व्यवसायों विशेष रूप से सॉफ्टवेयर और प्रौद्योगिकी उद्योग पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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