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US: अमेरिका में संघीय कर्मचारियों की छंटनी पर रोक, ट्रंप प्रशासन को अदालत से बड़ा झटका; आदेश अनिश्चितकाल तक
Wed, 29 Oct 2025 02:06 AM IST
शिवम गर्ग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सैन फ्रांसिस्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सैन फ्रांसिस्को
Published by: शिवम गर्ग
Updated Wed, 29 Oct 2025 02:06 AM IST
सार
अमेरिका में संघीय कर्मचारियों की छंटनी पर बड़ा फैसला। सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को सरकारी शटडाउन के दौरान कर्मचारियों की बर्खास्तगी से रोका। जज ने कहा- यह कार्रवाई अवैध और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हो सकती है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अमेरिका में चल रहे सरकारी शटडाउन के बीच ट्रंप प्रशासन को एक बड़ा झटका लगा है। सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत की जज सूसन इल्सटन ने मंगलवार को ट्रंप प्रशासन को संघीय कर्मचारियों की बर्खास्तगी से अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है।
जज सुसान इल्सटन ने यह आदेश उस मामले की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें कर्मचारियों के संगठन ने ट्रंप प्रशासन की बर्खास्तगी को अवैध और राजनीतिक बताया था। इससे पहले जज ने इस पर अस्थायी रोक लगाई थी, जो बुधवार को खत्म होने वाली थी। इल्सटन ने कहा कि शुरुआती सबूत बताते हैं कि ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई मनमानी और अधिकारों से परे थी।
कर्मचारियों की छंटनी पर विवाद बढ़ा
ट्रंप प्रशासन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य ऐसे क्षेत्रों में नौकरियों में कटौती की है, जिन्हें आम तौर पर डेमोक्रेटिक नीतियों के पक्षधर माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम बजट नियंत्रण के तहत लिया गया है, जबकि श्रमिक संघों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। अमेरिकन फेडरेशन ऑफ गवर्नमेंट एंप्लॉइज और अन्य संगठनों ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि यह रेडक्शन इन फोर्स प्रक्रिया सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है।
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जज ने कहा- बर्खास्तगी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित लगती है
15 अक्तूबर को हुई सुनवाई में जज इल्सटन ने कहा कि 10 अक्तूबर से भेजी गई बर्खास्तगी नोटिसें राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित और जल्दबाजी में जारी लगती हैं। करीब 4,100 कर्मचारियों को छंटनी के नोटिस भेजे गए, जिनमें कई ऐसे कर्मचारी शामिल हैं जो पहले से फरलो पर थे और अपने आधिकारिक ईमेल तक एक्सेस नहीं कर सकते थे। कुछ मामलों में तो बिना वेतन के कर्मचारियों को वापस बुलाकर उन्हें खुद के बर्खास्तगी पत्र सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
सरकारी सहायता योजनाओं पर भी असर
प्रशासन ने कहा है कि वह करीब 5 अरब डॉलर की आपात निधि का उपयोग नहीं करेगा। इसके कारण गरीबों को दी जाने वाली SNAP (खाद्य सहायता) जैसी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें:- Israel: बंधक के शव को लेकर हमास की 'धोखेबाजी' पर नेतन्याहू सख्त, बताया शांति समझौते का स्पष्ट उल्लंघन
राजनीतिक गतिरोध जारी
डेमोक्रेटिक सांसदों ने शर्त रखी है कि सरकार को दोबारा खोलने के समझौते में स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी और मेडिकेड कटौती को वापस लेने की मांग शामिल की जाए। वहीं रिपब्लिकन स्पीकर माइक जॉनसन ने साफ कहा है कि सरकार तब तक नहीं खुलेगी, जब तक डेमोक्रेट्स पहले उसके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देते। यह अमेरिका का दूसरा सबसे लंबा सरकारी शटडाउन बन गया है। इससे पहले, ट्रंप के पहले कार्यकाल में यूएस-मेक्सिको बॉर्डर वॉल फंडिंग को लेकर 2019 में 35 दिनों तक शटडाउन चला था।
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जज सुसान इल्सटन ने यह आदेश उस मामले की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें कर्मचारियों के संगठन ने ट्रंप प्रशासन की बर्खास्तगी को अवैध और राजनीतिक बताया था। इससे पहले जज ने इस पर अस्थायी रोक लगाई थी, जो बुधवार को खत्म होने वाली थी। इल्सटन ने कहा कि शुरुआती सबूत बताते हैं कि ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई मनमानी और अधिकारों से परे थी।
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कर्मचारियों की छंटनी पर विवाद बढ़ा
ट्रंप प्रशासन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य ऐसे क्षेत्रों में नौकरियों में कटौती की है, जिन्हें आम तौर पर डेमोक्रेटिक नीतियों के पक्षधर माना जाता है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम बजट नियंत्रण के तहत लिया गया है, जबकि श्रमिक संघों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। अमेरिकन फेडरेशन ऑफ गवर्नमेंट एंप्लॉइज और अन्य संगठनों ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि यह रेडक्शन इन फोर्स प्रक्रिया सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है।
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जज ने कहा- बर्खास्तगी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित लगती है
15 अक्तूबर को हुई सुनवाई में जज इल्सटन ने कहा कि 10 अक्तूबर से भेजी गई बर्खास्तगी नोटिसें राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित और जल्दबाजी में जारी लगती हैं। करीब 4,100 कर्मचारियों को छंटनी के नोटिस भेजे गए, जिनमें कई ऐसे कर्मचारी शामिल हैं जो पहले से फरलो पर थे और अपने आधिकारिक ईमेल तक एक्सेस नहीं कर सकते थे। कुछ मामलों में तो बिना वेतन के कर्मचारियों को वापस बुलाकर उन्हें खुद के बर्खास्तगी पत्र सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
सरकारी सहायता योजनाओं पर भी असर
प्रशासन ने कहा है कि वह करीब 5 अरब डॉलर की आपात निधि का उपयोग नहीं करेगा। इसके कारण गरीबों को दी जाने वाली SNAP (खाद्य सहायता) जैसी योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
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राजनीतिक गतिरोध जारी
डेमोक्रेटिक सांसदों ने शर्त रखी है कि सरकार को दोबारा खोलने के समझौते में स्वास्थ्य बीमा सब्सिडी और मेडिकेड कटौती को वापस लेने की मांग शामिल की जाए। वहीं रिपब्लिकन स्पीकर माइक जॉनसन ने साफ कहा है कि सरकार तब तक नहीं खुलेगी, जब तक डेमोक्रेट्स पहले उसके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देते। यह अमेरिका का दूसरा सबसे लंबा सरकारी शटडाउन बन गया है। इससे पहले, ट्रंप के पहले कार्यकाल में यूएस-मेक्सिको बॉर्डर वॉल फंडिंग को लेकर 2019 में 35 दिनों तक शटडाउन चला था।