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ड्रैगन की नई चाल: ईरान संकट में उलझा रहा अमेरिका, चीन ने चोरी छिपे किया परमाणु मिसाइल परीक्षण, किसे खतरा?
Mon, 20 Jul 2026 05:15 AM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 20 Jul 2026 05:15 AM IST
सार
अमेरिका इस समय ईरान के साथ युद्ध में पूरी तरह व्यस्त है और इसी का फायदा उठाकर चीन ने पनडुब्बी से परमाणु ले जाने वाली मिसाइल का बड़ा टेस्ट कर लिया। चीन अब अपने परमाणु हथियारों को छुपाने के बजाय खुलकर दुनिया को अपनी ताकत दिखा रहा है, जिसने भारत सहित पूरे प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है।
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चीन की नई चाल
- फोटो : @AI/अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
चीन ने चुपके से समुद्र के नीचे से एक बेहद खतरनाक मिसाइल का परीक्षण किया है। यह मिसाइल अपने साथ परमाणु बम ले जा सकती है। हैरानी की बात यह है कि इस बड़े खतरे पर दुनिया का जितना ध्यान जाना चाहिए था, उतना नहीं गया। एक नई रिपोर्ट में इसकी बड़ी वजह बताई गई है। दरअसल, महाशक्ति अमेरिका इस समय पश्चिम एशिया के एक बड़े युद्ध में बुरी तरह फंसा हुआ है। इसी वजह से अमेरिका और बाकी दुनिया चीन की इस खतरनाक सैन्य हरकत पर ठीक से नजर नहीं रख पाई।
क्या खाड़ी के युद्ध ने चीन को बड़ा मौका दिया?
एशिया मीडिया सेंटर ने इस मामले पर एक खास रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट कहती है कि चीन ने इस टेस्ट के लिए जो समय चुना, उसकी बहुत बारीकी से जांच होनी चाहिए। असल में, फरवरी महीने के आखिरी दिनों से ही अमेरिका पूरी तरह ईरान के साथ युद्ध में उलझा हुआ है। जिस हफ्ते चीन ने अपनी पनडुब्बी से मिसाइल दागी, ठीक उसी हफ्ते अमेरिका और ईरान की लड़ाई बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। अमेरिका ने समुद्री जहाजों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए ईरान के दर्जनों ठिकानों पर भीषण बमबारी की थी। पिछले कई महीनों से अमेरिका का पूरा दिमाग, उसकी सेना और उसके बड़े नेता केवल खाड़ी देश के इसी संकट को सुलझाने में लगे हुए हैं। यह रिपोर्ट न्यूजीलैंड के एक नामी मीडिया संस्थान ने तैयार की है।
क्या चीन की परमाणु नीति पूरी तरह बदल चुकी है?
इस रिपोर्ट को लिखने वाली एक्सपर्ट दिव्या मल्होत्रा का कहना है कि सिर्फ इस बात से यह तय नहीं होता कि चीन ने अमेरिका को फंसा हुआ देखकर जानबूझकर यह चाल चली है। चीन का अपना दावा है कि यह टेस्ट तो उसकी सेना का एक साधारण और सालाना अभ्यास था। लेकिन लेखिका का मानना है कि चीन ने यह धमाका ठीक उस समय किया, जब उसका मुकाबला करने वाला इकलौता देश अमेरिका दूसरे मोर्चे पर व्यस्त था। भले ही अमेरिका का ध्यान भटका हो, लेकिन भारत , जापान और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विशेषज्ञों ने चीन की इस हरकत को बहुत गंभीरता से नोट किया है।
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इस टेस्ट से प्रशांत महासागर के देशों में डर का माहौल है। यह मिसाइल जिस इलाके में गिरी, उसे 'परमाणु-मुक्त क्षेत्र' माना जाता है। यह इलाका न्यूजीलैंड का रणनीतिक पड़ोसी है। इस टेस्ट ने पूरे क्षेत्र की शांति को खतरे में डाल दिया है।
यह भी पढ़ें: संसद मार्च को लेकर टकराव: वांगचुक की पत्नी करेंगी प्रदर्शन की अगुवाई, पुलिस बोली- इजाजत नहीं, धारा 163 लागू
चीन के इस मिसाइल टेस्ट के पांच मुख्य बिंदु
लगातार बढ़ती ताकत: यह कोई एक बार का टेस्ट नहीं है, चीन लगातार अपनी परमाणु ताकत का आक्रामक प्रदर्शन कर रहा है।
44 साल का रिकॉर्ड: सितंबर 2024 में चीन ने प्रशांत महासागर के खुले पानी में एक खतरनाक आईसीबीएम यानी लंबी दूरी की मिसाइल दागी थी, जो 44 साल में पहली बार हुआ था।
जमीन से भी हमला: दिसंबर 2024 में चीन ने जमीन के नीचे बने साइलो से भी परमाणु मिसाइलें छोड़कर दुनिया को चौंकाया था।
अब कुछ भी गुप्त नहीं: चीन पहले अपने परमाणु हथियारों की जानकारी छुपाकर रखता था, लेकिन अब वह दुनिया को डराने के लिए इनका खुला प्रदर्शन कर रहा है।
समुद्र में परमानेंट पहरा: चीन अब अमेरिका और ब्रिटेन की तरह समुद्र के भीतर हर समय परमाणु पनडुब्बियां तैनात रखने की तैयारी में है, ताकि कभी भी अचानक हमला किया जा सके।
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क्या खाड़ी के युद्ध ने चीन को बड़ा मौका दिया?
एशिया मीडिया सेंटर ने इस मामले पर एक खास रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट कहती है कि चीन ने इस टेस्ट के लिए जो समय चुना, उसकी बहुत बारीकी से जांच होनी चाहिए। असल में, फरवरी महीने के आखिरी दिनों से ही अमेरिका पूरी तरह ईरान के साथ युद्ध में उलझा हुआ है। जिस हफ्ते चीन ने अपनी पनडुब्बी से मिसाइल दागी, ठीक उसी हफ्ते अमेरिका और ईरान की लड़ाई बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। अमेरिका ने समुद्री जहाजों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए ईरान के दर्जनों ठिकानों पर भीषण बमबारी की थी। पिछले कई महीनों से अमेरिका का पूरा दिमाग, उसकी सेना और उसके बड़े नेता केवल खाड़ी देश के इसी संकट को सुलझाने में लगे हुए हैं। यह रिपोर्ट न्यूजीलैंड के एक नामी मीडिया संस्थान ने तैयार की है।
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क्या चीन की परमाणु नीति पूरी तरह बदल चुकी है?
इस रिपोर्ट को लिखने वाली एक्सपर्ट दिव्या मल्होत्रा का कहना है कि सिर्फ इस बात से यह तय नहीं होता कि चीन ने अमेरिका को फंसा हुआ देखकर जानबूझकर यह चाल चली है। चीन का अपना दावा है कि यह टेस्ट तो उसकी सेना का एक साधारण और सालाना अभ्यास था। लेकिन लेखिका का मानना है कि चीन ने यह धमाका ठीक उस समय किया, जब उसका मुकाबला करने वाला इकलौता देश अमेरिका दूसरे मोर्चे पर व्यस्त था। भले ही अमेरिका का ध्यान भटका हो, लेकिन भारत , जापान और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा विशेषज्ञों ने चीन की इस हरकत को बहुत गंभीरता से नोट किया है।
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इस टेस्ट से प्रशांत महासागर के देशों में डर का माहौल है। यह मिसाइल जिस इलाके में गिरी, उसे 'परमाणु-मुक्त क्षेत्र' माना जाता है। यह इलाका न्यूजीलैंड का रणनीतिक पड़ोसी है। इस टेस्ट ने पूरे क्षेत्र की शांति को खतरे में डाल दिया है।
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चीन के इस मिसाइल टेस्ट के पांच मुख्य बिंदु
लगातार बढ़ती ताकत: यह कोई एक बार का टेस्ट नहीं है, चीन लगातार अपनी परमाणु ताकत का आक्रामक प्रदर्शन कर रहा है।
44 साल का रिकॉर्ड: सितंबर 2024 में चीन ने प्रशांत महासागर के खुले पानी में एक खतरनाक आईसीबीएम यानी लंबी दूरी की मिसाइल दागी थी, जो 44 साल में पहली बार हुआ था।
जमीन से भी हमला: दिसंबर 2024 में चीन ने जमीन के नीचे बने साइलो से भी परमाणु मिसाइलें छोड़कर दुनिया को चौंकाया था।
अब कुछ भी गुप्त नहीं: चीन पहले अपने परमाणु हथियारों की जानकारी छुपाकर रखता था, लेकिन अब वह दुनिया को डराने के लिए इनका खुला प्रदर्शन कर रहा है।
समुद्र में परमानेंट पहरा: चीन अब अमेरिका और ब्रिटेन की तरह समुद्र के भीतर हर समय परमाणु पनडुब्बियां तैनात रखने की तैयारी में है, ताकि कभी भी अचानक हमला किया जा सके।