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US: ईरान की नाकाबंदी के बीच अमेरिका का एक और बड़ा फैसला, चीनी तेल रिफाइनरी और 40 कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध

Sat, 25 Apr 2026 12:36 AM IST
Nirmal Kant वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन डीसी।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन डीसी। Published by: Nirmal Kant Updated Sat, 25 Apr 2026 12:36 AM IST
सार

US: अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़ी चीन की एक बड़ी रिफाइनरी और करीब 40 कंपनियों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, ताकि तेहरान की तेल निर्यात से होने वाली आय को रोका जा सके। यह कार्रवाई उन कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की नीति का हिस्सा है, जो ईरान से व्यापार करती हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-

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US imposes sanctions on China-based oil refinery 40 shippers over Iranian oil
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के तेल से जुड़ी एक बड़ी चीन स्थित रिफाइनरी पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इसके साथ ही लगभग 40 शिपिंग कंपनियों और तेल टैंकरों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जो ईरान का तेल एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम कर रहे हैं। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
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यह कदम ट्रंप की उस चेतावनी का हिस्सा है, जिसमें कहा गया था कि जो देश या कंपनियां ईरान के साथ व्यापार करेंगी, उन पर भी पाबंदी लगाई जाएगी। इसका मकसद तेल के निर्यात से ईरान को होने वाली आय को रोकना है। इस बीच, अमेरिका ने इस महीने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी को बढ़ाया है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है।
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ये प्रतिबंध कंपनियों को अमेरिका की वित्तीय प्रणाली से अलग कर देते हैं और जो भी इनके साथ व्यापार करता है, उसे भी सजा दी जाती है। यह कदम ऐसे समय आया है, जब कुछ हफ्तों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की चीन में मुलाकात होने वाली है।
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शुक्रवार को लगाए गए प्रतिबंधों में चीन के डालीयन बंदरगाह शहर के पास स्थित हेंगली पेट्रोकेमिकल की इकाई भी शामिल है, जिसकी तेल प्रसंस्करण क्षमता करीब चार लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन है, जिससे यह चीन की सबसे बड़ी रिफाइनरी में से एक बनती है।

ये भी पढ़ें: ईरान में 3500 मौतों पर भी US बेपरवाह: रक्षा मंत्री ने जंग को दुनिया के वरदान बताया, क्या संदेश दे रहा अमेरिका?

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि हेंगली पेट्रोकेमिकल को 2023 से ईरानी कच्चे तेल की खेपें मिली हैं और उसने ईरान की सेना के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर की आय उत्पन्न की है। एक संगठन 'यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान' ने फरवरी 2025 में कहा था कि हेंगली पेट्रोकेमिकल ईरानी तेल खरीदने वाले दर्जनों चीनी खरीदारों में शामिल है।

ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है चीन
चीन ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। युद्ध से पहले चीन ईरानी तेल का लगभग 80 से 90 फीसदी आयात करता था। यह तेल अक्सर गुप्त जहाजों के नेटवर्क के जरिये भेजा जाता है और इसका असली स्रोत छिपा दिया जाता है। दस्तावेजों में  इसे मलयेशिया जैसे दूसरे देशों से आया तेल बताया जाता है। छोटी रिफाइनरी आमतौर पर ईरानी तेल के खरीदार होते हैं। इन्हें 'टीपॉट रिफाइनरी' कहा जाता है। ईरान पहले भी कह चुका है कि युद्ध समाप्त करने की उसकी शर्तों में प्रतिबंध हटाना शामिल है।

अमेरिकी वित्त मंत्री ने क्या कहा?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को कहा कि उनका विभाग उन जहाजों, बिचौलियों और खरीदारों के नेटवर्क को और सीमित करता रहेगा, जिन पर ईरान अपने तेल को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए निर्भर है। इस महीने की शुरुआत में बेसेंट के मंत्रालय ने चीन, हांगकांग, यूएई और ओमान की वित्तीय संस्थाओं को पत्र भेजकर चेतावनी दी थी कि अगर वे ईरान के साथ व्यापार करते हैं तो उन पर सेकंडरी प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

व्हाइट हाउस में 15 अप्रैल को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बेसेंट ने कहा था कि उनके प्रशासन ने देशों को बता दिया है कि यदि वे ईरानी तेल खरीदते हैं या ईरानी पैसा उनके बैंकों में रखा है, तो अमेरिका अब सेकंडरी प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार है।


वैश्विक उर्जा व्यापार में तनाव के बीच लगाए प्रतिबंध
ये प्रतिबंध ऐसे समय आए हैं, जब वैश्विक ऊर्जा व्यापार तनाव में है, क्योंकि फारस की खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के कारण तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बढ़ती तेल कीमतों के असर को कम करने के लिए रूस के तेल पर प्रतिबंधों में अस्थायी छूट और ईरानी तेल पर एक बार की छूट भी दी है।

अमेरिकी प्रतिबंधों पर चीन का क्या रुख रहा है?
चीन पहले भी अमेरिकी प्रतिबंधों से असहमत रहा है। लेकिन उसकी बड़ी कंपनियां और बैंक फिर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करते हैं, क्योंकि वे अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से जुड़े हुए हैं। इस महीने की शुरुआत में जब अमेरिका ने एक चीनी रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाए थे, तो वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा था कि ऐसे प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था और नियमों को नुकसान पहुंचाते हैं। सामान्य आर्थिक और व्यापारिक लेन-देन को बाधित करते हैं और चीनी कंपनियों व व्यक्तियों के वैध अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।



 
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