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US FDA: अमेरिकी दवा नियामक का बड़ा फैसला, देशहित सर्वोपरि रखने पर नई दवाओं की तेज समीक्षा करा सकेंगी कंपनियां!

Wed, 18 Jun 2025 08:37 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 18 Jun 2025 08:37 AM IST
सार

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद लगातार बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। अब देश की संघीय एजेंसी- खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने फैसला लिया है कि जो दवा कंपनियां 'राष्ट्रीय प्राथमिकताओं' को बढ़ावा देंगी, उन कंपनियों से बनने वाली दवाओं की समीक्षा तेजी से कराई जा सकेगी। जानिए एफडीए की इस नई कवायद के मायने

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US FDA decision companies to get faster service in new drug review  America national interest paramount
ट्रंप और एफडीए प्रमुख मार्टी मकरी (फाइल) - फोटो : पीटीआई / एक्स@MartyMakary

विस्तार

अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) ने दवाओं की समीक्षा प्रक्रिया तेज करने का फैसला लिया है। संघीय एजेंसी ने इसके लिए एक नई पहल की घोषणा की है। इस पहल के तहत उन कंपनियों की नई दवाओं को समीक्षा के दौरान प्राथमिकता दी जाएगी जो 'अमेरिकी लोगों के स्वास्थ्य हितों' को बढ़ावा देती हैं। FDA प्रमुख मार्टी मकारी ने बताया कि चुनिंदा दवाओं की समीक्षा अब केवल एक से दो महीनों में पूरी की जा सकेगी।

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वर्तमान प्रणाली में छह से 10 महीने का समय लगता है
बता दें कि अमेरिका में पारंपरिक रूप से दवाओं की समीक्षा में लगभग 10 महीने लगते हैं। वर्तमान में FDA का तेज समीक्षा कार्यक्रम के तहत छह महीने में निर्णय देता है। हालांकि, ये सुविधा केवल उन विशेष दवाओं को मिलती है जिनका इस्तेमाल जानलेवा बीमारियों का इलाज करने में किया जाता है।
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दवाओं को समीक्षा में तेजी के लिए क्या है ट्रंप प्रशासन की नई योजना

नई योजना के तहत, FDA कुछ कंपनियों को 'नेशनल प्रायोरिटी वाउचर' देगा। इससे वे कुछ विशेष लाभ ले सकेंगी, मसलन दवाओं के संबंध में संघीय दवा नियामक से अतिरिक्त संवाद, स्ट्रीमलाइन समीक्षा और अग्रिम डेटा जमा करने की सुविधा। यह वाउचर उन्हीं कंपनियों को दिया जाएगा जो अमेरिका की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होंगी। हालांकि यह योजना पहले से चली आ रही 'तेज समीक्षा कार्यक्रमों' से मिलती-जुलती है, लेकिन इस बार FDA अधिकारियों को अधिक विवेकाधिकार मिलेगा कि वाउचर किस कंपनी को दिया जाए। इसका मकसद आम जनता तक उपचार और दवाओं को जल्दी पहुंचाना है।

कुछ मामलों में वैज्ञानिक मानकों में ढील दी जा सकती है
एफडीए प्रमुख मकारी ने यह भी संकेत दिया है कि दवाओं की समक्षी के कुछ मामलों में वैज्ञानिक मानकों में ढील दी जा सकती है। उदाहरण के लिए यादृच्छिक (randomized) परीक्षणों की जरूरतों को कम किया जा सकता है। रैंडम तरीके से किए जाने वाले ये परीक्षण चिकित्सा अनुसंधान के 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माने जाते हैं, लेकिन FDA पहले भी दुर्लभ बीमारियों के मामलों में कम साक्ष्य वाले परीक्षणों को मंजूरी दे चुका है। हालांकि, हाल ही में FDA को उन दवाओं को मंजूरी देने के लिए आलोचना झेलनी पड़ी थी जिनके प्रारंभिक आंकड़े बाद में प्रभावी साबित नहीं हुए।


टीकों के इस्तेमाल में तेज समीक्षा की नीति नहीं!
दिलचस्प है कि मकारी और स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने वैक्सीन नीति में 'तेज समीक्षा' के विपरीत रुख अपनाया है। ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल में हुए इस फैसले के तहत अब प्रत्येक नई वैक्सीन को प्लेसीबो परीक्षणों से गुजरना होगा। मौसम बदलने पर इस्तेमाल होने वाली सीजनल COVID-19 वैक्सीन को भी कड़े परीक्षणों की जरूरत होगी।

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अपनी नीतियों के कारण चर्चा में है अमेरिकी दवा नियामक- FDA
यह भी दिलचस्प है कि कई बड़े बदलाव कर रहा राष्ट्रपति ट्रंप का प्रशासन अपनी नीतियों के कारण लगातार चर्चा में बना हुआ है। अमेरिका की संघीय दवा नियामक के प्रमुख मकारी ने बीते साल नवंबर में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद इसी वर्ष अप्रैल में FDA ज्वाइन किया है। उन्होंने कर्मचारियों से पारंपरिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाने और नए तरीके अपनाने का आह्वान किया है। हाल ही में प्रकाशित एक मेडिकल पत्रिका में उन्होंने सुझाव दिया कि COVID-19 वैक्सीन के त्वरित अनुमोदन की तरह ही कुछ अन्य दवाओं के इस्तेमाल को हरी झंडी दिखाने के लिए 'त्वरित या तात्कालिक समीक्षा प्रक्रिया' अपनाई जा सकती है।

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