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सीक्रेट लेटर बम की निकली हवा: अमेरिका ने कहा- झूठा आरोप न लगाएं इमरान, इसमें हमारा कोई हाथ नहीं

Thu, 31 Mar 2022 12:41 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 31 Mar 2022 12:41 PM IST
सार

सीक्रेट लेटर बम पर अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए साफ कहा कि अमेरिका का इसमें कोई हाथ नहीं है। इमरान खान झूठा आरोप लगा रहे हैं।

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US denies any threat letter to Imran khan, his own advisors let Pak PM down
इमरान खान - फोटो : Twitter@ imran khan

विस्तार

पाकिस्तान में गहराते सियासी संकट के बीच जिस खुफिया पत्र को प्रधानमंत्री इमरान खान ने मीडिया से साझा किया अब उसे अमेरिका ने झूठा बताया है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए साफ कहा कि अमेरिका का इसमें कोई हाथ नहीं है। इमरान खान झूठा आरोप लगा रहे हैं। अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा कि हमारे तरफ से इस तरह का कोई पत्र किसी भी पाकिस्तानी अधिकारी को नहीं दिया गया है। प्रवक्ता ने ये भी कि पाकिस्तान में उभरे राजनीतिक संकट में उसका कोई हस्तक्षेप नहीं है। किसी भी अमेरिकी एजेंसी का इसमें कोई हाथ नहीं है।

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पीएम इमरान ने विदेशी साजिश का लगाया था आरोप
पीएम इमरान ने सरकार बचाने के लिए सीक्रेट लेटर बम का आखिरी दांव चला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार गिराने के लिए विदेशी ताकतें उनके खिलाफ साजिश रच चुकी हैं। इमरान ने बुधवार को इससे जुड़ा एक धमकी भरा पत्र मीडिया के सामने पेश किया। इसी के साथ उन्होंने इस दस्तावेज को पूरी तरह असली करार दिया। लेकिन अब अमेरिका ने इसे झूठा करार दिया।
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पढ़ें क्या लिखा था धमकी भरे पत्र में
पाकिस्तान के पत्रकारों के मुताबिक, इमरान खान ने यह चिट्ठी कुछ दूरी से पत्रकारों को दिखाई और सिर्फ इसकी ऊपरी बातों को ही मीडिया के सामने रखा गया। इस पत्र को जिन पत्रकारों को दिखाया गया, उनमें से एक ने एआरवाई न्यूज (ARY News) से बातचीत में कहा कि यह साफ है कि पाकिस्तान में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए जो घटनाक्रम हो रहा है, उसके बारे में सात मार्च को ही बताया गया था। पत्र में कहा गया था कि अगर अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है और इमरान सरकार गिर जाती है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की समस्याएं कम हो जाएंगी। अगर यह प्रस्ताव नाकाम होता है तो पाकिस्तान को बात मनवाने के लिए दबाव बनाना होगा। पत्रकारों के मुताबिक, इस चिट्ठी की भाषा धमकाने वाली थी और इमरान सरकार ने इसे कैबिनेट बैठक में सामने रखा। पत्रकार अरशद शरीफ ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि जब यह चिट्ठी कैबिनेट के सामने रखी गई तो पांच से छह मंत्री रोने लगे। प्रधानमंत्री ने खुद चर्चा के दौरान किसी देश या अफसर का नाम नहीं लिया। लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि इस पत्र को सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा और आईएसआई प्रमुख फैज हमीद के साथ साझा किया गया था। चिट्ठी में रूस-यूक्रेन युद्ध पर पाक के रुख का भी जिक्र किया गया था। 

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