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US: अमेरिकी अदालत से भारतीय मूल के विशेषज्ञ एशले को बड़ी राहत; जासूसी कानून का मामला खारिज, जानें सबकुछ

Thu, 07 May 2026 11:21 AM IST
Riya Dubey आईएएनएस, वाशिंगटन
आईएएनएस, वाशिंगटन Published by: Riya Dubey Updated Thu, 07 May 2026 11:21 AM IST
सार

अमेरिकी अदालत ने भारतीय मूल के रणनीतिक विशेषज्ञ एशले जे. टेलिस के खिलाफ जासूसी कानून के तहत दर्ज मामला खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने गलत कानूनी धारा लगाई थी। टेलिस पर गोपनीय दस्तावेज घर में रखने का आरोप था, लेकिन बचाव पक्ष ने कहा कि उन्हें उन दस्तावेजों तक आधिकारिक पहुंच हासिल थी।

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US court dismisses espionage law case for Indian-origin expert Ashley
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय मूल के विशेषज्ञ एशले जे. टेलिस के खिलाफ चल रहे जासूसी कानून से जुड़े मामले में अमेरिकी अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। वर्जीनिया की एक संघीय अदालत ने तकनीकी कानूनी आधार पर यह मामला खारिज कर दिया। अदालती आदेश में कहा गया कि याचिका स्वीकार की गई और मामला बिना किसी पूर्वाग्रह के खारिज किया गया।
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अमेरिका के वर्जीनिया स्थित यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज माइकल एस. नाचमैनॉफ ने 16 अप्रैल को टेलिस की याचिका स्वीकार करते हुए केस को खारिज करने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने गलत कानूनी प्रावधान के तहत आरोप लगाए थे।
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क्या है मामला?

टेलिस अमेरिका की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन पर आरोप था कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज अपने निजी घर में रखे थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक टेलिस ने अमेरिकी विदेश विभाग और रक्षा तंत्र से जुड़े वरिष्ठ पदों पर काम करते हुए कई संवेदनशील दस्तावेज अपने पास रखे।
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सरकार की ओर से दायर आरोपपत्र में कहा गया था कि टेलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी 11 गोपनीय फाइलें अपने निजी निवास पर हार्ड कॉपी और डिजिटल फॉर्म में रखीं। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी उच्चस्तरीय पहुंच का फायदा उठाकर सुरक्षित सरकारी कार्यस्थलों से राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी जानकारी बाहर निकाली और उसे निजी तौर पर संग्रहीत किया।

टेलिस ने क्या दी दलील?

हालांकि टेलिस की कानूनी टीम ने अदालत में दलील दी कि सरकार ने जासूसी अधिनियम की गलत धारा के तहत मामला दर्ज किया। उनके वकीलों का कहना था कि जिस धारा 793(e) के तहत उन पर आरोप लगाए गए, वह केवल उन लोगों पर लागू होता है, जिनके पास गोपनीय दस्तावेज अनधिकृत रूप से हों। जबकि सरकार खुद मान रही थी कि टेलिस के पास उच्च स्तरीय सुरक्षा मंजूरी थी और उन्हें इन दस्तावेजों तक अधिकृत पहुंच प्राप्त थी।

बचाव पक्ष ने अदालत से कहा कि टेलिस को संबंधित दस्तावेज आधिकारिक रूप से सौंपे गए थे, इसलिए उन्हें अवैध कब्जा की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि सरकार ने उन पर गोपनीय जानकारी लीक करने या अपनी मंजूरी से बाहर जाकर दस्तावेज हासिल करने का आरोप भी नहीं लगाया।

कानूनी टीम ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष चाहे तो जासूसी कानून की दूसरी धारा 793(d) या धारा 1924 के तहत मामला दर्ज कर सकता था, जो सरकारी कर्मचारियों द्वारा गोपनीय दस्तावेज हटाने और रखने से संबंधित है। लेकिन सरकार ने जानबूझकर गलत प्रावधान चुना।

इससे पहले संघीय अभियोजकों ने टेलिस की जमानत शर्तों में ढील देने का विरोध किया था। सरकार का कहना था कि टेलिस राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा और फरार होने का जोखिम बने हुए हैं। अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि उनके पास हजारों पन्नों के गोपनीय दस्तावेज थे, जिनमें 1,000 से ज्यादा पन्ने टॉप सिक्रेट श्रेणी के थे।

सरकार ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ दस्तावेज चीन की परमाणु और सैन्य क्षमताओं से जुड़े थे। अभियोजकों का कहना था कि टेलिस के पास दशकों की संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा जानकारी मौजूद थी।

मामला खारिज होने के बाद टेलिस ने अदालत में अपनी जमानत राशि वापस करने की मांग की, जिस पर सरकार ने कोई आपत्ति नहीं जताई। वहीं अदालत ने जांच के दौरान जब्त की गई संपत्ति वापस करने की उनकी मांग पर भी सरकार से जवाब मांगा है।

इस मामले ने वॉशिंगटन के रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हलकों में काफी ध्यान खींचा, क्योंकि टेलिस लंबे समय तक अमेरिकी सरकार को रक्षा और इंडो-पैसिफिक नीति पर सलाह देते रहे हैं।


हाल के वर्षों में अमेरिका में गोपनीय दस्तावेजों के गलत तरीके से रखे जाने के मामलों पर सख्ती बढ़ी है। मौजूदा और पूर्व सरकारी अधिकारियों द्वारा संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज संभालने को लेकर कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच चल रही है।


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