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US: अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन की एंटी-DEI गाइडलाइन को किया रद्द, शिक्षकों की याचिका पर हो रही थी सुनवाई

Fri, 15 Aug 2025 09:16 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 15 Aug 2025 09:16 AM IST
सार

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की उन गाइडलाइनों को रद्द कर दिया है, जो स्कूलों और विश्वविद्यालयों में विविधता, समानता और समावेशन कार्यक्रमों को खत्म करने के लिए जारी की गई थीं। जज स्टेफनी गैलाघर ने कहा कि शिक्षा विभाग ने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

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US court cancels Donald Trump administration anti-DEI guideline teacher federation petition being heard
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिका में एक संघीय जज ने ट्रंप प्रशासन के उन निर्देशों को रद्द कर दिया है, जिनका उद्देश्य स्कूलों और विश्वविद्यालयों में विविधता, समानता और समावेशन यानि डीईआई (डाइवर्सिटी, इक्वटी और इन्क्लूजन) कार्यक्रमों को समाप्त करना था। मैरीलैंड की यूएस डिस्ट्रिक्ट जज स्टेफनी गैलाघर ने अपने फैसले में कहा कि शिक्षा विभाग ने कानून का उल्लंघन किया, जब उसने चेतावनी दी कि जो संस्थान डीईआई पहल जारी रखेंगे, उनका संघीय फंड काट दिया जाएगा। यह गाइडलाइन अप्रैल से ही आंशिक रूप से निलंबित थी।
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यह मामला अमेरिकी फेडरेशन ऑफ टीचर्स और अमेरिकन सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की ओर से दाखिल फरवरी महीने की याचिका पर आधारित था। इसमें सरकार के उन दो मेमो को चुनौती दी गई थी, जिनमें स्कूलों और विश्वविद्यालयों को आदेश दिया गया था कि किसी भी तरह के रेस-बेस्ड यानि जातीय आधार पर लिए जाने वाले निर्णय बंद किए जाएं, वरना उन्हें संघीय फंडिंग से वंचित किया जा सकता है। ट्रम्प प्रशासन ने इसे श्वेत और एशियाई-अमेरिकी छात्रों के खिलाफ भेदभाव समाप्त करने के नाम पर पेश किया था।
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गैलाघर का स्पष्ट रुख
जज गैलाघर ने कहा कि शिक्षा विभाग के मेमो सिर्फ सूचना नहीं थे, बल्कि उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी। इस वजह से लाखों शिक्षकों को डर था कि उनके वैध और लाभकारी भाषण या कार्यक्रम भी सजा का कारण बन सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इन नीतियों की अच्छाई या बुराई पर कोई राय नहीं दे रहीं, बल्कि केवल कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन पर फैसला दे रही हैं।
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सरकार के तर्क और विवाद
शिक्षा विभाग ने इन मेमो के जरिए सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले की व्याख्या को और बढ़ाया, जिसमें कॉलेज एडमिशन में जातीय विचार को प्रतिबंधित किया गया था। सरकार का कहना था कि यह पाबंदी एडमिशन से आगे बढ़कर शिक्षा के सभी क्षेत्रों पर लागू होती है, जिसमें फाइनेंशियल एड, हायरिंग और स्टूडेंट लाइफ के अन्य पहलू शामिल हैं। अप्रैल के दूसरे मेमो में राज्यों से यह प्रमाणपत्र मांगा गया था कि वे अवैध डीईआई प्रैक्टिस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, अन्यथा फंड रोकने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

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शिक्षा जगत की प्रतिक्रिया
इन आदेशों पर कई राज्यों और शिक्षा संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे अवैध सरकारी सेंसरशिप करार दिया। अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स ने कहा कि यह कदम अस्पष्ट और विषयात्मक था, जिससे शिक्षकों को अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करने या संघीय फंड खोने के बीच चुनाव करना पड़ रहा था। डेमोक्रेसी फॉरवर्ड नामक एडवोकेसी ग्रुप ने इसे "शिक्षा पर हमले" के खिलाफ एक अहम जीत बताया।

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